
(पटना): बहुचर्चित चारा घोटाले के तीन मामले में सजायाफ्ता राष्ट्रीय जनता दल प्रमुख लालू प्रसाद को झारखंड उच्च न्यायालय से बड़ा झटका लगा है। झारखंड उच्च न्यायालय ने लालू प्रसाद की ओर से दायर प्रोविजनल जमानत याचिका की अवधि को तीन महीने बढ़ाने से इंकार कर दिया है और 30 अगस्त तक सरेंडर करने का आदेश दिया है।
उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अपरेश कुमार सिंह की अदालत में शुक्रवार को याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने लालू प्रसाद की ओर से अदालत में पक्ष रखा और बीमारियों का हवाला देते हुए प्रोविजनल जमानत अवधि को बढ़ाने का आग्रह किया। अदालत ने इस याचिका को खारिज कर दिया। इससे पहले 17 अगस्त को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने लालू प्रसाद की प्रोविजनल जमानत की अवधि को 27 अगस्त तक के लिए बढ़ा दिया था।
इससे पहले 10 अगस्त को हाईकोर्ट ने लालू प्रसाद के जमानत के दौरान घर में रहने पर नाराजगी जताई थी। अदालत ने कहा था कि लालू प्रसाद सजायफ्ता हैं। तबीयत खराब है, तो वह अस्पताल में रहें। ठीक हैं तो जेल में। घर पर रहकर सारी सुविधाएं नहीं ले सके।
गौरतलब है कि 11 मई को झारखंड उच्च न्यायालय ने लालू प्रसाद को अपनी बीमारियों के इलाज के लिए छह हफ्ते के लिए सशर्त प्रोविजनल जमानत दी थी। इसके बाद कई अन्य मौके पर भी अदालत ने प्रोविजनल जमानत की अवधि कुछ दिनों के लिए बढ़ाने की याचिका मंजूर की, लेकिन अब लालू प्रसाद को फिर से सरेंडर कर वापस रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारा जाना पड़ेगा। लालू प्रसाद को चारा घोटाले के तीन मामलों आरसी-68ए/96, आरसी- 38ए/96, आरसी-64ए/96 में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत द्वारा सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
Published on:
24 Aug 2018 03:15 pm
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