
लालू यादव और तेजस्वी यादव (फ़ोटो-Lalu Yadav FB)
लैंड फॉर जॉब केस की राउज एवेन्यू कोर्ट ने गुरूवार को सुनवाई करते हुए लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी,तेजस्वी यादव और तेज प्रताप यादव को व्यक्तिगत पेशी से फिलहाल छूट दी है। इन लोगों ने स्वास्थ्य और अन्य कारणों का हवाला देकर फिजिकल अपीयरेंस से छूट मांगी थी, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर कर लिया।लेकिन, कोर्ट ने पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए 9 मार्च से इस केस की सुनवाई प्रतिदिन आधार पर करने की बात कही। ताकि ट्रायल में तेजी लाई जा सके। आज इस मामले में दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई सुनवाई में लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और राबड़ी देवी कोर्ट में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए। जबकि लालू यादव की बेटी मीसा भारती और हेमा यादव व्यक्तिगत तौर से कोर्ट में हाजिर हुईं थी।अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 9 मार्च से केस का ट्रायल शुरू होगा।
जांच एजेंसी इस दौरान सबूत भी पेश करेगी। कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा था कि लालू यादव ने रेल मंत्रालय को अपनी निजी जागीर की तरह में इस्तेमाल किया। सरकारी नौकरी को सौदेबाजी के हथियार के रूप में इस्तेमाल करके यादव परिवार ने रेलवे अधिकारियों और अपने करीबी सहयोगियों की मिलीभगत से जमीन हासिल की।
लालू प्रसाद यादव पर सीबीआई का आरोप है कि रेल मंत्री रहते हुए उन्होंने वर्ष 2004 से 2009 के बीच रेलवे के विभिन्न जोनों (ग्रुप-डी पदों) में नियुक्तियों के बदले उम्मीदवारों से जमीन ली थी। यह जमीन पटना और अन्य इलाकों में ली गई थी। इस कीमती जमीनों को बहुत ही कम कीमतों पर लालू परिवार के सदस्यों या उनसे जुड़ी कंपनियों ने अपने नाम पर ट्रांसफर कराया है। जांच एजेंसी का दावा है कि कई मामलों में उचित चयन प्रक्रिया या विज्ञापन के बिना ही नियुक्तियां कर दी गईं है। सीबीआई ने यह भी दावा किया कि ये नियुक्तियां नियमों का उल्लंघन करके की गईं और इन लेन-देन में बेनामी संपत्तियां शामिल थीं, जो आपराधिक कदाचार और साजिश के समकक्ष है। जबकि लालू परिवार ने अपने ऊपर लगे आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि यह मामला राजनीतिक रूप से प्रेरित है।
Updated on:
29 Jan 2026 01:05 pm
Published on:
29 Jan 2026 12:29 pm
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