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Marine Drive: बिहार को मिला एक और मरीन ड्राइव का तोहफा, भागलपुर से मुंगेर का सफर होगा आसान

Marine Drive पटना की तर्ज पर बिहार में एक और मरीन ड्राइव का निर्माण किया जायेगा। मुंगेर से भागलपुर तक बनने वाले इस गंगा एक्सप्रेस वे के बनने से जहां एक ओर दोनों शहरों का सफर आसान हो जायेगा। वहीं गंगा किनारे बसे शहरों और कस्बे भी मुख्य सड़क से सीधा जुड़ जायेंगे।

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Marine Drive

मरीन ड्राइव की सांकेतिक तस्वीर । फोटो-ANI

Marine Drive News: पटना की तर्ज पर भागलपुर में भी मरीन ड्राइव का निर्माण होगा। बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने मंगलवार को इस बात की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भागलपुर से मुंगेर तक बनने वाले इस गंगा पथ (मरीन ड्राइव) दो भाग में बनेगा। एक सबौर से मुंगेर तक और दूसरा सुल्तानगंज से सबौर तक। नीतीश कैबिनेट ने मंगलवार को इसको अपनी मंजूरी भी दे दी है।

पटना की तर्ज पर बनेगा भागलपुर में मरीन ड्राइव

मुंगेर से भागलपुर के सबौर तक बनने वाले गंगा नदी के किनारे मरीन ड्राइव के निर्माण से राज्य के पूर्वी बिहार क्षेत्र के लिए विकास और पर्यटन की दृष्टि से एक नया द्वार खुल जायेगा। इस सड़क को “गंगा एक्सप्रेस वे” के रूप में विकसित किया जाएगा, जो न केवल आवाजाही को सुगम बनाएगा बल्कि गंगा किनारे बसे शहरों और कस्बों को भी सीधा जोड़ेगा। गंगा के किनारे बसे ऐतिहासिक शहरों को जोड़ने वाली यह सड़क धार्मिक, सांस्कृतिक और व्यावसायिक रूप से भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

पहले चरण में बनेगा मुंगेर से सबौर गंगा एक्सप्रेस वे

सरकार की ओर से मुंगेर से सबौर के बीच 82.80 किलोमीटर लंबे गंगा पथ परियोजना पर कुल 9969.63 करोड़ रुपये की लागत आएगी। मुंगेर (सफियाबाद) से बरियारपुर, घोरघट होते हुए सुल्तानगंज तक 42 किलोमीटर लंबे गंगा पथ HAM यानि हाइब्रिड एन्युटी मॉडल पर बनाया जाएगा। इस खंड पर कुल 511980.00 लाख (पांच हजार एक सौ उन्नीस करोड़ अस्सी लाख) रूपये खर्च किए जाएंगे।

दूसरे चरण में बनेगा सुल्तानगंज से सबौर गंगा एक्सप्रेस वे

इसी प्रकार से सुल्तानगंज से भागलपुर होते हुए सबौर तक 40.80 किलोमीटर लंबी गंगा पथ परियोजना को भी HAM मॉडल पर बनाया जाएगा। इस खंड पर अनुमानित लागत 484983.00 लाख (चार हजार आठ सौ उनचास करोड़ तिरासी लाख) रूपये खर्च होंगे। इसे दो चरणों में बनाया जाएगा।

HAM मॉडल पर होगा निर्माण

मुंगेर से सुल्तानगंज तक बनने वाला एक्सप्रेस वे का निर्माण HAM मॉडल पर होगा। इस मॉडल में सरकार और प्राइवेट कंपनियों की साझेदारी होती है। जिसमें निर्माणकर्ता को आंशिक भुगतान निर्माण के समय किया जाता है। और शेष राशि तय अवधि में किस्तों के रूप में की जाती है।