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मुजफ्फरपुर में घूस कांड: 20 हजार की मांग, 5 हजार लेते कैमरे में कैद, दरोगा सस्पेंड

मुजफ्फरपुर के एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा ने रिश्वत लेते हुए वीडियो वायरल होने के बाद अपर थानाध्यक्ष अभिनंदन कुमार को निलंबित कर दिया है।

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Bribe

रिश्वत लेते हुए प्रतीकात्मक तस्वीर: AI

बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के पियर थाना में तैनात अपर थानाध्यक्ष अभिनंदन कुमार का रिश्वत लेते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। मामले को गंभीरता से लेते हुए मुजफ्फरपुर के एसएसपी ने जांच के आदेश दिए। जांच के बाद सोमवार रात अभिनंदन कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया।

क्या है मामला

सोमवार सुबह से सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में अभिनंदन कुमार एक बिचौलिये के माध्यम से एक फरियादी से 5 हजार रुपये लेते हुए नजर आ रहे हैं। वीडियो सामने आने के बाद एसएसपी ने मामले की जांच का जिम्मा एसडीपीओ पूर्वी-1 मनोज कुमार सिंह को सौंपा। एसडीपीओ ने पूरे मामले की जांच कर सोमवार शाम अपनी रिपोर्ट एसएसपी को सौंपी। रिपोर्ट में आरोपों की पुष्टि होने के बाद एसएसपी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए अभिनंदन कुमार को निलंबित कर दिया।

20 हजार की मांग

वायरल वीडियो में दिख रहा है कि मद्य निषेध विभाग द्वारा पकड़े गए एक व्यक्ति को छुड़वाने के लिए अपर थानाध्यक्ष अभिनंदन कुमार अपने एक सहयोगी के माध्यम से 20 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। वहीं, सामने वाला व्यक्ति उन्हें 5 हजार रुपये देने की बात करता नजर आता है। कुछ देर बातचीत के बाद अभिनंदन कुमार अपने सहयोगी के जरिए 5 हजार रुपये लेते हुए दिखाई देते हैं। इस मामले में नूनफारा गांव निवासी शत्रुघ्न राम ने बताया कि कुछ दिन पहले मद्य निषेध विभाग ने उनके भाई को पकड़ लिया था। उन्हें लगा कि उनके भाई को पियर थाना की पुलिस ने हिरासत में लिया है, जिसके बाद वे थाने पहुंचे।

5 हजार लेते वीडियो वायरल

शत्रुघ्न राम के अनुसार, थाने पर मौजूद एक व्यक्ति ने उनके भाई को छुड़ाने के लिए 20 हजार रुपये की मांग की। जब उन्होंने बताया कि उनके पास सिर्फ 5 हजार रुपये ही हैं, तो उस व्यक्ति ने वही राशि लेकर अपर थानाध्यक्ष को दे दी। इसके बाद उन्हें अगले दिन दोपहर 2 बजे कोर्ट पहुंचने के लिए कहा गया। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वीडियो वायरल करने के उद्देश्य से नहीं बनाया गया था, बल्कि इसे अपने परिजनों को दिखाने के लिए रिकॉर्ड किया गया था। हालांकि, बाद में उनका मोबाइल फोन चोरी हो गया, जिसके बाद यही वीडियो विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो गया। शत्रुघ्न राम ने यह भी आरोप लगाया कि वीडियो वायरल होने के बाद उन पर मामले को मैनेज करने का दबाव बनाया जा रहा था।