17 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

‘जिम्मेदारी नहीं निभाई…’, तेजस्वी पर पप्पू यादव ने उठाए सवाल; राज्य सभा हार के बाद महागठबंधन में दरार!

राज्य सभा चुनाव में हार के बाद अब महागठबंधन के भीतर आपसी कलह के संकेत उभरने लगे हैं। पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने तेजस्वी के नेतृत्व और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

2 min read
Google source verification

पटना

image

Anand Shekhar

Mar 17, 2026

bihar politics, राज्य सभा चुनाव, पप्पू यादव , तेजस्वी यादव

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और पूर्णिया सांसद पप्पू यादव

बिहार से पांचवीं राज्य सभा सीट गंवाने के बाद महागठबंधन में सिर-फुटव्वल शुरू हो गई है। NDA की क्लीन स्वीप विपक्षी खेमे में निराशा पैदा कर दी है। पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने सीधे तौर पर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के नेतृत्व पर सवाल उठाया है और उन्हें हार के लिए जिम्मेदार ठहराया है। पप्पू यादव ने साफ शब्दों में कहा कि चुनावी रणनीति बनाने और गठबंधन के सभी सहयोगियों को साथ लेकर चलने की जिम्मेदारी तेजस्वी यादव की थी, लेकिन उन्होंने इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की।

नेता प्रतिपक्ष ने किसी से बात नहीं की - पप्पू यादव

तेजस्वी यादव पर तीखा हमला बोलते हुए पप्पू यादव ने जोर देकर कहा कि हार के लिए दूसरों को दोष देने से पहले, तेजस्वी को अपनी खुद की रणनीति की समीक्षा करनी चाहिए थी। उन्होंने कहा, 'चुनाव के संबंध में कांग्रेस पार्टी के बिहार प्रभारी, प्रदेश अध्यक्ष, या अन्य नेताओं के साथ बातचीत करना नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी थी। लेकिन उन्होंने न तो मेरे प्रदेश अध्यक्ष से बात की, न ही पार्टी प्रभारी से और न ही उन्होंने शीर्ष नेतृत्व को विश्वास में लिया। जब आप सबके साथ बैठकर सामूहिक रूप से परामर्श करने में विफल रहते हैं, तो ऐसा परिणाम आना तय है।'

पप्पू यादव ने आगे कहा कि सभी सहयोगियों को साथ लेकर चलना और रणनीतियां बनाने के लिए समय-समय पर बैठकें बुलाना नेता प्रतिपक्ष का कर्तव्य है। हालांकि, इस चुनाव में ऐसा नहीं हुआ और यह बिल्कुल गलत है।

तेजस्वी यादव ने क्या कहा?

चुनाव परिणामों की घोषणा के बाद, नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए BJP पर हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के चार विधायकों को मतदान प्रक्रिया से दूर रखना एक बड़ी साजिश का हिस्सा था। तेजस्वी ने BJP पर धन-बल और सरकारी सत्ता के दुरुपयोग के माध्यम से लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का आरोप लगाया।

RJD उम्मीदवार ने भी सवाल उठाए

RJD के राज्य सभा उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह ने भी चुनावी प्रक्रिया के संबंध में सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव बड़े पैमाने पर हॉर्स-ट्रेडिंग (खरीद-फरोख्त) और सत्ता के खुले दुरुपयोग से प्रभावित था। उन्होंने दावा किया कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हेरफेर करने के लिए पैसे और दबाव की युक्तियों का इस्तेमाल किया गया, जिससे चुनाव के अंतिम नतीजों पर असर पड़ा।

तेजस्वी की 'किलेबंदी' की रणनीति कैसे फेल हुई?

तेजस्वी यादव ने राज्य सभा चुनाव में जीत के लिए जरूरी संख्या बल जुटाने के मकसद से एक खास रणनीति बनाई थी। उन्होंने ओवैसी की पार्टी (AIMIM) के पांच विधायकों और BSP के एक विधायक का समर्थन हासिल कर लिया था। कागजों पर, महागठबंधन काफी मजबूत दिख रहा था। लेकिन, आखिरी मौके पर चार विधायकों की गैर-मौजूदगी ने उनकी सारी योजनाओं पर पानी फेर दिया।

वोटिंग के दिन, कांग्रेस के विधायक सुरेंद्र कुशवाहा (वाल्मीकिनगर), मनोज विश्वास (फारबिसगंज) और मनोहर सिंह (मनिहारी) वोट डालने नहीं पहुंचे। इसी तरह, RJD के फैसल रहमान (ढाका) भी वोट डालने नहीं आए। इन चार वोटों की कमी ने NDA के लिए जीत का रास्ता आसान बना दिया और महागठबंधन के अमरेंद्र धारी सिंह (AD सिंह) चुनाव हार गए।