
रोशनी कुमारी। फोटो -पत्रिका
पटना गर्ल्स हॉस्टल मामले में पटना एसएसपी ने बड़ा एक्शन लेते हुए दो पुलिस पदाधिकारी को पूरे मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में सस्पेंड कर दिया है। पटना के शंभू हॉस्टल में रहकर नीट की तैयारी करने वाली एक छात्रा के साथ कथित हैवानियत के बाद 11 जनवरी को इलाज के दौरान मौत हो गई थी। पटना पुलिस ने इस मामले में घटना के 18 दिनों बाद कड़ा एक्शन लेते हुए दो पुलिस पदाधिकारी को सस्पेंड कर दिया। अभी तक का यह सबसे बड़ा एक्शन कहा जा रहा है। पटना के एसएसपी ने FSL रिपोर्ट मिलने के बाद यह एक्शन लिया है।
पटना एसएसपी ने चित्रगुप्तनगर थाना कांड संख्या 14/26 की जांच के बाद कदमकुआं थाना के अवर निरीक्षक हेमंत झा और चित्रगुप्तनगर थानाध्यक्ष अवर निरीक्षक रोशनी कुमारी को निलंबित किया है। इन दोनों पर आरोप है कि सूचना मिलने के बाद भी समय पर उचित कार्यवाही नहीं किया। जिसकी वजह से जांच प्रभावित हुई और शुरुआती दौर में सही दिशा की जानकारी नहीं मिली। इसके साथ ही ये अपने कार्य में भी विफलता दिखाई थी।
शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद से चित्रगुप्त नगर थाना पुलिस की संवेदनशीलता और जांच के तरीकों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पीड़िता के परिजनों ने छात्रा के साथ रेप को लेकर एफआईआर भी दर्ज कराया गया था, लेकिन इसके बाद भी चित्रगुप्त नगर पुलिस पूरे मामले में निष्क्रिय रही। पटना पुलिस इस पूरे मामले को 'सुसाइड' का रूप देने में लगी थी। जबकि पीड़िता के परिजन छात्रा के शरीर पर चोट के निशान का हवाला देकर उसके साथ जबरदस्ती की बात कह रहे थे। इस पूरे मामले में पुलिस चित्रगुप्त नगर थाना प्रभारी रौशनी पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे थे? एसएचओ ने खुद मौके पर जाने के बजाय अपने प्राइवेट ड्राइवर से सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर लाने के लिए भेजा था। इस घटना के सामने आने के बाद से ही रौशनी कुमारी कठघरे में खड़े हो गई थी। मामले के तुल पकड़ने पर पुलिस मुख्यालय की ओर से इस पूरे मामले की जांच का जिम्मा पटना पुलिस से लेकर एसआईटी को दे दिया गया था। लेकिन, जांच से अलग हटने के बाद भी रौशनी कुमारी की इस पूरे मामले में सक्रियता कई सवाल खड़े कर रहे थे।
शंभू हॉस्टल में रहने वाली छात्रा को 6 जनवरी को बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल प्रबंधन की ओर से कहा जा रहा है कि हमने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दे दी थी। इसके बावजूद चित्रगुप्त नगर पुलिस 6, 7 और 8 जनवरी तक खामोश रही। 9 जनवरी को छात्रा की हालत नाजुक हो गई तब पुलिस की सक्रियता बढ़ी। इस बीच अस्पताल के ही एक डॉक्टर ने चुपके से पीड़िता के परिजनों से कहा था कि आपकी बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है, तब परिजनों ने इसको लेकर एफआईआर भी दर्ज कराई। लेकिन, इसके बाद भी पुलिस ने इस पूरे मामले में चुप्पी साधे रही।
पोस्टमॉर्टम, FSL रिपोर्ट और मीडिया की किरकिरी के बाद पुलिस अपनी जांच तेज की। परिजनों की ओर से पुलिस पर लीपापोती का आरोप लगने के बाद पटना पुलिस को दो अधिकारियों को निलंबित किया गया। लेकिन, अभी भी घटना का मुख्य अभियुक्त फरार है।
Updated on:
25 Jan 2026 09:01 am
Published on:
25 Jan 2026 08:24 am
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
पटना
बिहार न्यूज़
ट्रेंडिंग
