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72 घंटे तक क्यों सोती रही पटना पुलिस? पोस्टमार्टम के बाद टूटी नींद, नीट छात्रा की मौत को ‘सुसाइड’ बताने की इतनी जल्दी क्यों थी?

पटना गर्ल्स हॉस्टल: एसएचओ ने खुद घटनास्थल पर जाने के बजाय अपने प्राइवेट ड्राइवर से सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर मंगवाया था। इसको लेकर थाना की एसएचओ रौशनी पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं।

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रौशनी कुमारी, एसएचओ। फाइल फोटो

पटना के शंभू गर्ल्स हॉस्टल में छात्रा की संदिग्ध मौत के बाद चित्रगुप्त नगर थाना पुलिस पर पुलिस की संवेदनशीलता और जांच के तरीकों पर बड़े सवाल खड़े कर दिया हैं। पीड़िता के परिजनों का आरोप है कि छात्रा के शरीर पर चोट के निशान थे। उसके साथ जबरदस्ती की गई थी। पुलिस को हम लोग बता रहे थे, लेकिन पुलिस इस पूरे मामले को 'सुसाइड' का रूप देने में लगी थी। थाना की एसएचओ रौशनी पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं। एसएचओ ने खुद मौके पर जाने के बजाय अपने प्राइवेट ड्राइवर से सीसीटीवी फुटेज और डीवीआर लाने के लिए भेजा था। इस घटना के सामने आने के बाद से ही रौशनी कुमारी की भूमिका पर कई तरह के सवाल खड़ा हो रहे हैं। इस मामले के तुल पकड़ने पर पुलिस मुख्यालय की ओर से इस पूरे मामले की जांच पटना पुलिस से लेकर एसआईटी को दे दिया। लेकिन, जांच से अलग हटने के बाद भी रौशनी कुमारी की इस पूरे मामले में सक्रियता कई सवाल खड़े कर रहे हैं।

72 घंटे पुलिस ने कुछ नहीं किया ?

शंभू हॉस्टल में रहने वाली छात्रा को 6 जनवरी को बेहोशी की हालत में अस्पताल ले जाया गया था। अस्पताल प्रबंधन की ओर से कहा जा रहा है कि हमने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दे दी थी। इसके बावजूद चित्रगुप्त नगर पुलिस 6, 7 और 8 जनवरी तक खामोश रही। 9 जनवरी को छात्रा की हालत नाजुक हो गई तब पुलिस की सक्रियता बढ़ी। इस बीच अस्पताल के ही एक डॉक्टर ने चुपके से पीड़िता के परिजनों से कहा था कि आपकी बेटी के साथ कुछ गलत हुआ है, तब परिजनों ने इसको लेकर एफआईआर भी दर्ज कराई। लेकिन, इसके बाद भी पुलिस ने इस पूरे मामले में चुप्पी साधे रही।

ड्राइवर की 'जांच'

इस पूरे प्रकरण में एसएचओ के प्राइवेट ड्राइवर की भूमिका की काफी चर्चा हो रही है। एक स्टिंग ऑपरेशन में ड्राइवर ने स्वीकार किया कि मैडम (रोशनी कुमारी) को हॉस्टल का पता नहीं था, इसलिए हम वहां गए थे। इसके बाद हमने ही हॉस्टल में लगे डीवीआर (DVR) उठाकर ले आया थे। सवाल ये उठता है कि वारदात के 72 घंटे बाद क्या सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित थे? क्या इस दौरान फुटेज के साथ छेड़छाड़ या उन्हें डिलीट नहीं किया जा सकता था? पुलिस टीम के बजाय एक प्राइवेट ड्राइवर हॉस्टल के कमरे से डीवीआर (DVR) लाने गया।

कठघरे में पुलिस

11 जनवरी को छात्रा की मौत के बाद पुलिस के बयान ने पटना पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया। पुलिस ने 12 जनवरी को लड़की की मौत को आत्म हत्या करार दे दिया। एएसपी अभिनव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर दावा किया कि कमरे से नींद की गोलियां मिली हैं। इससे साफ है कि छात्रा ने आत्महत्या किया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने तक पुलिस अधिकारी अपने इस बयान पर कायम रहे। हालांकि, परिजनों का सवाल है कि अगर यह सुसाइड था, तो शरीर पर चोट के निशान क्यों थे? पुलिस बिना जांच के ही पूरे मामले में हॉस्टल को 'क्लीन चिट' देने की कोशिश क्यों कर रही थी?