
प्रशांत किशोर के साथ रितेश पांडे (फोटो X@riteshpandeyrp)
बिहार विधानसभा चुनाव में पिछले साल मिली करारी हार के बाद से प्रशांत किशोर की जन सुराज में भगदड़ मची हुई है। पीके के खास भोजपुरी सिंगर रितेश पांडे ने पार्टी छोड़ दी है। पार्टी छोड़ने के अगले दिन वे बीजेपी नेताओं के साथ दिखे। चर्चा है कि आरसीपी सिंह भी जदयू में वापस लौटने की तैयारी कर रहे हैं। इधर, जन सुराज के नेताओं का कहना है कि संगठन अपनी स्थिति का आकलन कर रही है। इसके साथ ही वह बूथ लेवल तक नॉमिनेटेड पार्टी लीडरशिप की "संस्कृति" को खत्म करने की कोशिश कर रही है। पहले कदम के तौर पर, जन सुराज ने पिछले नवंबर में अपनी सभी अंदरूनी कमेटियों को भंग कर दिया, ताकि उनकी जगह चुनी हुई कमेटियां बनाई जा सकें।
भोजपुरी सिंगर रितेश पांडे, जो कि जन सुराज पार्टी के हाई-प्रोफाइल चेहरों में से एक हैं, सोमवार को पार्टी छोड़ने की घोषणा की और पूर्व केंद्रीय मंत्री आर सी पी सिंह ने संकेत दिए कि वह मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जनता दल (यूनाइटेड) में वापस आ सकते हैं। रितेश पांडे रोहतास जिले में प्रशांत किशोर के गृह क्षेत्र करगहर से विधानसभा चुनाव लड़े थे। लेकिन उनकी करारी हार हुई थी।
इसके बाद उन्होंने सोमवार को अपने संगीत करियर के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का हवाला देते हुए जन सुराज से इस्तीफा दे दिया। लेकिन अगले ही दिन वे बीजेपी के सीनियर नेताओं के साथ दिखे। इससे इस बात की कयास लगया जाने लगा कि रितेश पांडेय बीजेपी ज्वाइन करेंगे। इस बीच, आरसीपी सिंह, जिन्होंने पिछले मई में अपनी आप सबकी आवाज पार्टी का जन सुराज में विलय कर दिया था, रविवार को पटेल सेवा संघ द्वारा आयोजित मकर संक्रांति कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन्होंने सीएम की तारीफ की और कहा, "नीतीश कुमार और मैं एक जैसे हैं"। सिंह की बेटी लता ने पिछले साल नालंदा जिले की अस्थावां विधानसभा सीट से जन सुराज उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ी थी, लेकिन वह हार गईं थी।
इससे जुड़े सवाल पर पार्टी के अध्यक्ष मनोज भारती कहते हैं कि हमें लगता है कि जो लोग हमें छोड़ रहे हैं, वे कभी हमारे साथ थे ही नहीं। पार्टी छंट रही है और सिर्फ असली जन सुराज के लोग ही साथ रहेंगे। वे आगे कहते हैं कि हम अपनी गलतियों से सीख रहे हैं। हमने सभी लेवल पर अपनी कमेटियों को भंग कर दिया है, क्योंकि उनमें नॉमिनेटेड सदस्य थे। हम अपने बूथ-लेवल कमेटियों तक चुने हुए सदस्य लाने के लिए संगठनात्मक चुनाव करवाएंगे। हम समर्पित नेता और मेहनती कार्यकर्ता चाहते हैं।
विधानसभा चुनाव में हार के बाद प्रशांत किशोर सुर्खियों से दूर हो गए हैं। दिसंबर में कांग्रेस महासचिव और लोकसभा सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ उनकी मुलाकात ने राजनीतिक गलियारों में अटकलों को जन्म दिया था। जन सुराज ने कहा कि पार्टी के संस्थापक फरवरी में अपनी सार्वजनिक गतिविधियां फिर से शुरू करेंगे। प्रशांत किशोर कहां हैं? इसपर भारती कहते हैं कि हमें अभी तक उनका (किशोर का) शेड्यूल नहीं मिला है, लेकिन वह जल्द ही बिहार में एक्टिव होंगे, और कहा कि नई कमेटियां बनने के बाद पार्टी अपने लॉन्ग-टर्म प्रोग्राम पर काम करना शुरू कर देगी। विधानसभा चुनाव में हार के बाद किशोर की मुख्य घोषणाओं में से एक यह थी कि मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना के उन लाभार्थियों से आवेदन मांगे जाएं जिन्हें इस योजना के तहत दूसरी किस्त नहीं मिली है।
मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना, जिसके तहत 1.62 करोड़ संभावित महिला उद्यमियों को सहायता के तौर पर 10,000 रुपये की पहली किस्त मिली है, बिहार चुनावों से ठीक पहले घोषित की गई थी, जो इस मुकाबले को NDA के पक्ष में एकतरफा बनाने में अहम साबित हुई, जिसने राज्य की 243 विधानसभा सीटों में से 202 सीटें जीतीं। जन सुराज ने 238 सीटों पर चुनाव लड़ा, जिसमें उसके उम्मीदवारों की 235 सीटों पर जमानत जब्त हो गई और पार्टी को सिर्फ 3.4% वोट मिले।
Updated on:
14 Jan 2026 08:46 pm
Published on:
14 Jan 2026 09:53 am
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