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‘मुस्लिमों के लिए ठुकराया था टिकट, अब वजूद की लड़ाई’, बीजेपी में जाने से पहले रितु जायसवाल का ऑडियो वायरल

Ritu Jaiswal Viral Audio: परिहार से विधानसभा चुनाव लड़ चुकी रितु जायसवाल अब भारतीय जनता पार्टी का दामन थामने वाली हैं। हालांकि, उनकी औपचारिक जॉइनिंग से पहले ही एक कथित ऑडियो वायरल हो गया है। इसमें उनका एक समर्थक उनके बीजेपी में जाने पर नाराजगी जता रहा है।

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पटना

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Anand Shekhar

May 14, 2026

Ritu Jaiswal Viral audio

रितु जायसवाल का ऑडियो वायरल

Ritu Jaiswal Viral Audio: राजद की महिला प्रकोष्ठ की प्रदेश अध्यक्ष रह चुकी रितु जायसवाल अब भाजपा में शामिल होने की तैयारी में हैं। वो जल्द ही पटना स्थित भाजपा प्रदेश कार्यालय में पार्टी की सदस्यता ग्रहण कर सकती हैं। लेकिन रितु जायसवाल के इस फैसले से उनके समर्थक नाराज दिख रहे हैं। उनके और एक समर्थक के बीच हुई बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

क्या मैं 10 साल घर बैठी रहूं?

वायरल ऑडियो में कैस रजा नाम का एक समर्थक रितु जायसवाल से भाजपा में शामिल होने पर निराशा जताते हुए कहता है कि हमने भाजपा के खिलाफ आपका साथ दिया था और अब आप उसी में जा रही हैं। इस पर रितु जायसवाल ने जवाब देते हुए कहा, 'आरजेडी ने मुझे 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया है। 6 साल के भीतर विधानसभा चुनाव (MLA) भी निकल जाएगा। इसी दौरान लोकसभा चुनाव (MP) भी संपन्न हो जाएगा। अगर 6 साल बाद पार्टी उन्हें वापस लेती भी है, तो अगला चुनाव लड़ने के लिए उन्हें 5 साल और इंतजार करना होगा। तो क्या आप चाहते हैं कि मैं 10 साल इंतजार करूं और घर बैठी रहूं?'

मुसलमानों की खातिर ठुकराया था बीजेपी का टिकट

ऑडियो में रितु जायसवाल ने दावा किया कि विधानसभा चुनाव के वक्त भाजपा ने उन्हें परिहार से चुनाव लड़ने का ऑफर दिया था। रितु ने कहा, 'अगर मैं सत्ता की लालची होती, तो उस वक्त टिकट लेकर आज बीजेपी की विधायक होती। लेकिन मैंने टिकट नहीं लिया क्योंकि मैं उन मुसलमानों की भावनाओं का अनादर नहीं करना चाहती थी जो दिल्ली, मुंबई और अहमदाबाद से मेरा साथ देने के लिए गांव आ चुके थे। मैं नहीं चाहती थी कि जब वे वापस आएं तो उन्हें पता चले कि रितु बीजेपी में चली गई। मैंने उस वक्त इंसानियत के लिए टिकट ठुकराया था, ताकि लोगों का भरोसा न टूटे।'

काम चाहिए या पार्टी का सिंबल

बातचीत के दौरान ऋतु जायसवाल ने तर्क दिया कि जनता को ऐसे नेता की जरूरत होनी चाहिए जो उनके लिए काम करे, न कि उस नेता की जो सिर्फ एक खास पार्टी का सिंबल लेकर बैठा रहे। रितु ने कहा, 'आपको अपने ईमान से जवाब देना होगा। आपको क्षेत्र में काम करने वाला व्यक्ति चाहिए या सिर्फ किसी पार्टी का झंडा? मैंने जनता के लिए अपना सब कुछ दांव पर लगाया, लेकिन पार्टी (RJD) ने मुझे बाहर का रास्ता दिखा दिया।'

धोखा तब होता जब मैं जीतकर जाती

जब समर्थक ने कहा कि यह हमारे साथ धोखा है, तो रितु ने जवाब देते हुए कहा कि उन्होंने चुनाव हारा है, जीता नहीं। अगर वे विधानसभा जीतकर भाजपा में जातीं, तो उसे जनादेश का अपमान या धोखा कहा जा सकता था। लेकिन वर्तमान स्थिति में, जब राजद ने ही उन्हें पार्टी से निकाल दिया है, तो वे अपने समर्थकों की सेवा के लिए किसी न किसी मंच की तलाश करने के लिए स्वतंत्र हैं।

कौन हैं रितु जायसवाल

1 मार्च 1977 को हाजीपुर में जन्मी रितु जायसवाल बिहार की सबसे शिक्षित और चर्चित महिला नेताओं में से एक हैं। राजनीति में उनकी पहचान तब बनी जब उन्होंने सीतामढ़ी की सिंहवाहिनी पंचायत की मुखिया के रूप में कार्यभार संभाला। पूर्व IAS अधिकारी अरुण कुमार की पत्नी होने के बावजूद, उन्होंने जमीनी स्तर पर शिक्षा, सड़क, स्वच्छता और महिला सशक्तिकरण के लिए ऐसा मॉडल पेश किया कि उन्हें मुखिया दीदी के नाम से जाना जाने लगा।

रितु जायसवाल को उनके कार्यों के लिए उन्हें 'चैंपियंस ऑफ चेंज' जैसे प्रतिष्ठित राष्ट्रीय पुरस्कारों से भी नवाजा जा चुका है। सामाजिक कार्यों से राजनीति तक पहुंचने के क्रम में वे आरजेडी की प्रखर प्रवक्ता बनीं। 2025 विधानसभा चुनाव में जब राजद ने उन्हें टिकट नहीं दिया तो वो निर्दलीय चुनाव लड़ीं। हालांकि चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अब व भाजपा में शामिल होने जा रही हैं।