
राजद प्रवक्ता शक्ति सिंह यादव (फोटो- X@shaktiyadav)
Bihar News: बिहार की आर्थिक स्थिति को लेकर राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने एक बार फिर नीतीश कुमार सरकार पर तीखा हमला बोला है। राजद के मुख्य प्रवक्ता और पूर्व विधायक शक्ति सिंह यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक विस्तृत पोस्ट साझा करते हुए दावा किया कि बिहार में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि यहां पैदा होने वाला हर बच्चा जन्म लेते ही 25 से 30 हजार रुपये के कर्ज में डूब जाता है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पिछले 20 वर्षों में विकास हुआ है, तो फिर बिहार प्रति व्यक्ति आय में देश में सबसे पीछे और पलायन में सबसे आगे क्यों है?
शक्ति सिंह यादव ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को घेरते हुए कहा कि बिहार में प्रति व्यक्ति आय प्रतिदिन सिर्फ 150 से 190 रुपये के बीच है, जो पूरे देश में सबसे कम है। उन्होंने तंज कसते हुए पूछा कि 20 सालों तक सत्ता में रहने के बावजूद नीतीश कुमार आखिर किस विकास की बात करते हैं। शक्ति यादव ने आरोप लगाया कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों में बिहार आज भी सबसे निचले पायदान पर खड़ा है।
राजद प्रवक्ता ने ई-श्रम पोर्टल के आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि लगभग 2 करोड़ 90 लाख बिहारी आज दूसरे राज्यों में दिहाड़ी मजदूरी करने को मजबूर हैं। उन्होंने इसे सरकार की नीतिगत विफलता करार देते हुए कहा कि अगर राज्य में रोजगार के पर्याप्त अवसर होते, तो इतनी बड़ी संख्या में लोगों को घर-परिवार छोड़कर बाहर जाने की नौबत नहीं आती।
शक्ति सिंह यादव ने आर्थिक सर्वेक्षण के आंकड़ों को “रोंगटे खड़े कर देने वाला” बताते हुए कहा कि बिहार की वित्तीय स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि यहां पैदा होने वाला हर बच्चा औसतन 25 से 30 हजार रुपये का कर्ज लेकर जन्म ले रहा है। उन्होंने दावा किया कि राज्य का खजाना खाली होने की कगार पर है और हालात यह हैं कि बिहार के वित्त मंत्री को केंद्र सरकार से एक लाख करोड़ रुपये से अधिक कर्ज लेने की अनुमति मांगनी पड़ रही है।
राजद नेता ने सरकार की चर्चित 2 लाख रुपये वाली महिला रोजगार योजना को भी कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने कहा कि यह योजना महज एक छलावा है। पहले 10 हजार रुपये दिए जाते हैं और फिर शर्त रखी जाती है कि प्रोग्रेस रिपोर्ट दिखाओ, तभी बाकी रकम मिलेगी। यादव का आरोप है कि इस शुरुआती राशि में भी प्रखंड स्तर पर कमीशनखोरी हो जाती है, जिससे लाभार्थी के हाथ में सिर्फ 7-8 हजार रुपये ही बचते हैं। उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि इतनी राशि में तो बकरी तक नहीं आती, उससे कौन सा रोजगार खड़ा होगा?
शक्ति सिंह यादव ने सरकार की योजनाओं की आर्थिक व्यवहारिकता पर भी सवाल उठाया। उनके मुताबिक, अगर 2 लाख रुपये वाली योजना को सही तरीके से लागू करना है, तो इसके लिए करीब 3 लाख करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी, जबकि बिहार का कुल बजट ही लगभग 3 लाख 18 हजार करोड़ रुपये है। उन्होंने पूछा कि अगर पूरा बजट इस योजना में लगा दिया गया, तो कर्मचारियों का वेतन और बुजुर्गों की पेंशन कहां से दी जाएगी?
राजद प्रवक्ता ने अंत में नीतीश कुमार सरकार पर गंभीर वित्तीय कुप्रबंधन का आरोप लगाते हुए कहा कि जनता को इन सवालों के जवाब चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार बड़े-बड़े दावे तो करती है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि बिहार की जनता आज भी गरीबी, बेरोजगारी और पलायन की मार झेल रही है।
Published on:
30 Jan 2026 06:44 pm

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