
लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य (फोटो- rohini acharya instagram)
Bihar Budget 2026: बिहार विधानसभा में मंगलवार को 2026-27 के लिए 3.47 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया। जिसके बाद बजट पर बयानबाजी का दौर भी शुरू हो गया। लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए बजट को आंकड़ों की बाजीगरी बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक लंबी पोस्ट में उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार के लगातार विकास और निवेश के दावों के बावजूद पिछले 10 सालों में 250 फैक्ट्रियां बिहार से बाहर क्यों चली गईं।
रोहिणी आचार्य ने कहा कि सरकार बड़े-बड़े आंकड़ों और बजट के आकार पर अपनी पीठ थपथपा रही है, लेकिन यह बजट आर्थिक विकास के साथ-साथ मानव विकास, जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, समृद्धि और समानता पर पूरी तरह से चुप है। उनके अनुसार, बिहार की सबसे बड़ी जरूरत एक ऐसी आर्थिक नीति है जो लगातार मानव विकास संकेतकों का मूल्यांकन करे और जमीनी स्तर पर उनके प्रभाव को दिखाए।
डबल इंजन सरकार पर निशाना साधते हुए रोहिणी आचार्य ने कहा कि डबल-इंजन वाली सरकार के नीति निर्धारकों को शायद यह बात पता नहीं है कि अगर लोगों को बुनियादी सेवाएं उनके अधिकार के तौर पर नहीं मिलती हैं, असमानता की खाई कम नहीं होती है और मजदूरों का पलायन जारी रहता है, तो विकास का पीटा जाने वाला झूठा ढिंढोरा भी जल्द ही दम तोड़ देगा। उन्होंने चेतावनी दी कि विकास सिर्फ घोषणाओं से नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक सुरक्षा में ठोस कदमों से आता है। जो सभी फिलहाल बजट में साफ तौर पर दिखाई नहीं दे रहे हैं।
रोहिणी आचार्य ने आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि प्रति व्यक्ति आय के मामले में बिहार देश के सबसे पिछड़े राज्यों में से एक है। इसके अलावा, सर्वेक्षण के अनुसार, पिछले दो सालों से बिहार की विकास दर गिर रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब ये आंकड़े सरकार की अपनी रिपोर्ट में दर्ज हैं, तो बजट विकास की इतनी अच्छी तस्वीर कैसे पेश कर रहा है?
रोहिणी आचार्य ने कहा कि पिछले 10 सालों में 250 फैक्ट्रियां बिहार छोड़कर दूसरे राज्यों में चली गईं। उन्होंने पूछा कि अगर राज्य में इंडस्ट्रीज के लिए अच्छा माहौल है, तो पूंजी और रोजगार बाहर क्यों जा रहे हैं? उनके मुताबिक, इंडस्ट्रीज के पलायन का सीधा असर रोजगार पर पड़ता है और यही वजह है कि आज भी बिहार से मजदूरों और युवाओं का पलायन जारी है। उन्होंने कहा कि सरकार को यह बताना चाहिए कि इंडस्ट्रीज को रोकने और नई इंडस्ट्रीज लाने के लिए ठोस कदम क्यों नहीं उठाए गए।
नीतीश कुमार के लगभग 20 साल के शासन का जिक्र करते हुए, रोहिणी आचार्य ने बजट और आर्थिक मैनेजमेंट को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि राज्य के बजट का आकार और योजनाओं का आकार एक जैसा नहीं है।
बजट का एक बड़ा हिस्सा बिना खर्च किए रह जाता है, जिससे योजनाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाती हैं। राज्य कई बड़ी केंद्रीय योजनाओं के लिए प्रस्ताव भी जमा नहीं करता है और अगर केंद्रीय फंड मिल भी जाता है, तो उसका सही इस्तेमाल नहीं होता है। हाल ही में 72,000 करोड़ रुपये के CAG घोटाले का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि यह साफ तौर पर खराब वित्तीय मैनेजमेंट और जवाबदेही की कमी को दिखाता है।
रोहिणी आचार्य ने निष्कर्ष निकाला कि इन सभी तथ्यों को देखते हुए, बिहार का बजट खोखली घोषणाओं के पुलिंदे से ज्यादा कुछ नहीं लगता। उनके अनुसार, बिहार की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए सबसे जरूरी है बजट घोषणाओं का सही, पारदर्शी और व्यावहारिक तरीके से लागू होना।
Updated on:
03 Feb 2026 04:12 pm
Published on:
03 Feb 2026 04:11 pm

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