
पटना होसताल कांड (फोटो- Rohini Acharya X)
पटना हॉस्टल कांड: पटना में NEET परीक्षा की तैयारी कर रही एक छात्रा की मौत को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमला कर रहा है। इसी कैद में रविवार को RJD सुप्रीमो लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य ने सोशल मीडिया एक्स पर एक के बाद एक दो पोस्ट किए और बिहार सरकार और अस्पताल प्रशासन पर जोरदार हमला बोला। इस घटना को बिहार के लिए एक और शर्मनाक घटना बताते हुए, उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से सीधे दखल देने की मांग की।
रोहिणी ने अपने पहले पोस्ट में भावनात्मक भाषा का इस्तेमाल करते हुए लिखा , "फिर से शर्मसार हुआ बिहार, ऐसे में बिहार की मां, बहन, बेटियों और हम सभी की एक ही गुहार है। क्या हॉस्टल में दरिंदगी की शिकार हुई बेटी के मामले में मिलेगा वाजिब इंसाफ और कब थमेगा अपने बिहार में बलात्कार ?”
अपने दूसरे पोस्ट में, रोहिणी आचार्य का लहजा और भी आक्रामक था। उन्होंने पटना के प्रभात मेमोरियल अस्पताल और लड़की का इलाज करने वाले डॉक्टरों के रवैये पर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा कि अस्पताल के डॉक्टरों ने जानबूझकर लड़की के शरीर पर दर्जनों चोट के निशानों को नजरअंदाज किया, उन्हें छिपाने और दबाने की हर मुमकिन कोशिश की, पुलिस या प्रशासन को बिना बताए लड़की को भर्ती किया और इलाज किया, परिवार को सच नहीं बताया, सबूतों से छेड़छाड़ की और लड़की के साथ बलात्कार की बात से इनकार किया और झूठ बोला। रोहिणी ने इसे प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बताया।
रोहिणी ने यह भी कहा कि मृत लड़की के परिवार ने भी अस्पताल की संदिग्ध भूमिका पर सवाल उठाया है और सीधे तौर पर अस्पताल प्रबंधन और इलाज करने वाले डॉक्टरों पर आरोप लगाया है। परिवार के आरोपों और अस्पताल द्वारा दिखाई गई लापरवाही के बारे में सामने आई तथ्यात्मक जानकारी के आधार पर, अस्पताल और इलाज करने वाले डॉक्टरों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई और जांच शुरू की जानी चाहिए।
रोहिणी ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से अपील करते हुए उनसे व्यक्तिगत रूप से इस मामले की निगरानी करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि जांच प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाना सरकार की जिम्मेदारी है। अपने पोस्ट में, रोहिणी ने यह भी लिखा कि जांच पूरी होने तक अस्पताल को सील कर दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आए तथ्य और परिवार द्वारा लगाए गए आरोप इस कदम को सही ठहराते हैं।
शुरुआत में पुलिस ने इस मामले को आत्महत्या माना था। परिवार लगातार कहता रहा कि यह रेप और मर्डर का मामला है। चार दिन बाद, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट जारी हुई और पुलिस ने यौन उत्पीड़न से इनकार करने वाले अपने शुरुआती बयान को बदल दिया। रिपोर्ट के अनुसार, छात्रा ने डेढ़ से दो घंटे तक संघर्ष किया था और उसके शरीर पर कई चोटें थीं। इस रिपोर्ट के बाद, पुलिस ने एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई और अस्पतालों पर छापे मारने शुरू किए।
Published on:
18 Jan 2026 04:54 pm
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