
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखे हुए सीएम नीतीश कुमार
Bihar Politics: बिहार की राजनीति में उतार-चढ़ाव कोई नई बात नहीं है, फिर भी सम्राट चौधरी और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बीच का रिश्ता एक अनोखी राजनीतिक कहानी बयां करता है। वही नेता, जिसने कभी एक सार्वजनिक मंच से नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने की कसम खाई थी, आज मुख्यमंत्री के रूप में उनका उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में सबसे आगे माना जा रहा है। यह बात सितंबर 2022 की है, जब भाजपा नेता सम्राट चौधरी ने अपनी मां के निधन के बाद अपने सिर पर 'मुरेठा' (पगड़ी) बांधा था। साथ ही उन्होंने सार्वजनिक रूप से यह प्रण लिया था कि यह पगड़ी तब तक उनके सिर पर बंधी रहेगी, जब तक वह नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री की कुर्सी से सफलतापूर्वक हटा नहीं देते।
उस समय, बिहार में महागठबंधन की सरकार सत्ता में थी, जिसमें नीतीश कुमार तेजस्वी यादव के साथ मिलकर सरकार चला रहे थे। सम्राट के इस प्रण को नीतीश के लिए एक सीधी राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा गया था। लेकिन आज, मार्च 2026 की बदलती परिस्थितियों में सवाल यह है कि क्या वही नीतीश कुमार अब अपने हाथों से सम्राट चौधरी के सिर पर सत्ता का ताज सजाने की तैयारी कर रहे हैं?
वह दृश्य आज भी बिहार के राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय है, जब बिहार विधान परिषद के भीतर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मुस्कुराते हुए सम्राट चौधरी की पगड़ी की ओर इशारा किया और पूछा, 'तुम इसे क्यों पहनते हो?' सम्राट चौधरी ने बिना पलक झपकाए जवाब दिया, 'आपको मुख्यमंत्री पद से हटाने के लिए। आपको हटाने के बाद ही इसे खोलूंगा। इसमें आपका भी सहयोग चाहिए।' उस पल, नीतीश कुमार बस मुस्कुरा दिए और उन्होंने कोई और जवाब नहीं दिया।
राजनीति में, समय ही सबसे बड़ा खिलाड़ी होता है और समय ने ऐसी करवट ली कि जनवरी 2024 में नीतीश कुमार NDA खेमे में वापस लौट आए। जिस व्यक्ति को सत्ता से हटाने की कसम खाकर सम्राट ने पगड़ी बांधी थी, वही व्यक्ति अब उनका नेता बन गया, जिसके अधीन उन्हें अब उपमुख्यमंत्री के तौर पर काम करना था। इसने सम्राट चौधरी के सामने सबसे बड़ी राजनीतिक दुविधा खड़ी कर दी। सरकार में शामिल होने के बाद, मुरेठा पहनना सम्राट चौधरी के लिए एक अजीब स्थिति बन गई।
विरोधियों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए, उस कसम का क्या हुआ? क्या सम्राट चौधरी अब अपना मुरेठा उतार देंगे? क्या सम्राट चौधरी अपने वादे से पीछे हट गए थे? आखिरकार, 21 महीने बाद, सम्राट चौधरी अयोध्या गए और सरयू नदी के तट पर अपनी पगड़ी उतार दी। उन्होंने इसके पीछे पार्टी और गठबंधन के हितों का हवाला दिया। हालांकि, तकनीकी रूप से उनकी कसम अधूरी ही रही, क्योंकि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री के पद पर बने रहे।
आज जब नीतीश कुमार राज्य सभा के लिए निर्वाचित हो चुके हैं, तो सम्राट चौधरी का कद अचानक और बढ़ गया है। हाल में समृद्धि यात्रा के दौरान, जिस तरह से नीतीश कुमार ने सम्राट चौधरी के कंधे पर हाथ रखा और पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, 'अब से, ये ही सब कुछ देखेंगे,' उसने उत्तराधिकारी के सवाल को लगभग खत्म कर दिया है। माना जा रहा है की सम्राट चौधरी बिहार के अगले सीएम हो सकते हैं, हालांकि इस संबंध में कोई भी आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
आखिर नीतीश कुमार उसी नेता को क्यों बढ़ावा दे रहे हैं जिसने कभी उन्हें सत्ता से हटाने की कसम खाई थी? राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा चल रही हैं कि नीतीश कुमार जानबूझकर सम्राट चौधरी का कद इसलिए बढ़ा रहे हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि मुख्यमंत्री का चेहरा कोई ऐसा व्यक्ति ही रहे जो नीतीश की नीतियों को स्वीकार करे और उनके मार्गदर्शन (और अनुभव) के अधीन रहे। साथ ही उनका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि भविष्य में, उनके बेटे निशांत कुमार और JDU के हितों के लिए BJP के भीतर एक सॉफ्ट कॉर्नर बना रहे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि नीतीश कुमार की राजनीति हमेशा संतुलन और नियंत्रण की रही है। ऐसे में वे किसी ऐसे नेता को आगे बढ़ाना चाहेंगे, जो उनके प्रभाव क्षेत्र को चुनौती न दे। सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाना एक मास्टरस्ट्रोक भी हो सकता है जहां बीजेपी भी संतुष्ट रहे और जेडीयू का प्रभाव भी बना रहे। दूसरी ओर, यह एक 'सुरक्षित दांव' भी हो सकता है, जिसका मकसद किसी भी मज़बूत और आज़ाद नेतृत्व को उभरने से रोकना हो।
सम्राट चौधरी आज बिहार भाजपा के निर्विवाद चेहरा बनकर उभरे हैं। वे नीतीश कुमार के कोर वोटर ओबीसी (कुशवाहा) समाज के बड़े नेता हैं। फिलहाल तस्वीर साफ नहीं है, लेकिन संकेत जरूर मिल रहे हैं। सम्राट चौधरी का नाम लगातार मुख्यमंत्री पद की चर्चा में आना अपने आप में बड़ा संकेत है।
प्रशांत किशोर पहले ही कह चुके हैं कि नीतीश कुमार किसी भी नेता को आसानी से अपने से आगे नहीं निकलने देंगे। उनका यह मानना काफी समय से रहा है कि नीतीश सत्ता पर अपनी पकड़ अंत तक बनाए रखते हैं और जाते-जाते भी राजनीति की दिशा अपने ही शर्तों पर तय करते हैं। एक मौके पर सम्राट चौधरी पर तंज कसते हुए प्रशांत किशोर ने कहा था कि नीतीश बाबू में सम्राट चौधरी जैसे दस लोगों को डुबो देने या नीचे गिरा देने की क्षमता है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिमी है कि क्या सम्राट चौधरी को आगे बढ़ाना एक स्थायी फैसला है या फिर कोई बड़ा सियासी प्रयोग?
नवंबर 2005 से ही नीतीश कुमार बिहार की राजनीति के केंद्र में बने हुए हैं। नौ महीने के एक छोटे से अंतराल को छोड़कर, उन्होंने लगभग दो दशकों तक बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया है। नतीजतन, वे कभी नहीं चाहेंगे कि सत्ता किसी ऐसे व्यक्ति के हाथों में जाए जो उनके कद को चुनौती दे सके। ऐसे में भाजपा का फेवरेबल सीएम ही जदयू की भविष्य की योजनाओं में फिट हो सकता है। वह इसलिए क्योंकि अब उनकी छवि के साथ साथ उनके पुत्र निशांत कुमार के भविष्य का भी सवाल है।
फिलहाल, सब कुछ ऑल इज वेल दिख रहा है। लेकिन, जब नीतीश कुमार पूरी तरह से दिल्ली की राष्ट्रीय राजनीति में व्यस्त हो जाएंगे, तब बिहार की बागडोर संभालने वाले किसी भी व्यक्ति चाहे वह सम्राट चौधरी हों या कोई अन्य नेता, के लिए असली चुनौती यह होगी कि वे नीतीश की परछाई से बाहर निकलकर अपनी एक अलग पहचान बना सकें।
Updated on:
25 Mar 2026 09:32 am
Published on:
25 Mar 2026 09:31 am
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