
सुप्रीम कोर्ट (सोर्स: ANI)
सुप्रीम कोर्ट ने बिहार पुलिस की उस अजीबोगरीब दलील पर कड़ी नाराजगी जताई है, जिसमें कहा गया था कि भ्रष्टाचार के एक मामले में जब्त किए गए रिश्वत के नोटों को चूहों ने कुतर कर बर्बाद कर दिया। न्यायमूर्ति जेबी पारदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस स्पष्टीकरण पर अविश्वास जताते हुए संकेत दिया है कि वे अब इस बात की गहराई से जांच करेंगे कि बिहार के पुलिस मालखानों में सबूतों को कैसे रखा जाता है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि वो इस दावे से हैरान हैं कि करेंसी नोटों को चूहों ने नष्ट कर दिया। अदालत ने इस मामले पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि इस तरह के अपराध में बरामद कितने नोट इसी तरह नष्ट हो जाते होंगे क्योंकि उन्हें सुरक्षित स्थान पर नहीं रखा जाता। यह राज्य के राजस्व की एक बड़ी हानि है। अदालत ने स्पष्ट किया कि मुख्य मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान इस मुद्दे की विस्तृत समीक्षा की जाएगी।
यह पूरा मामला साल 2019 का है, जब बिहार की आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने एक ट्रैप ऑपरेशन के दौरान एक महिला बाल विकास परियोजना पदाधिकारी (CDPO) को 10,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। जब्त किए गए इन नोटों को प्राथमिक साक्ष्य के रूप में सील कर पुलिस मालखाने में जमा कर दिया गया था। लेकिन, ट्रायल के दौरान जब अभियोजन पक्ष इन नोटों को अदालत में पेश नहीं कर पाया, तो तर्क दिया गया कि मालखाने में चूहों ने उस लिफाफे को कुतर दिया जिसमें कैश रखा गया था।
इस मामले में लोअर कोर्ट ने सबूतों के अभाव में महिला अधिकारी को बरी कर दिया था, लेकिन पटना हाई कोर्ट ने पिछले साल इस फैसले को पलटते हुए सजा सुनाई थी। हाई कोर्ट का मानना था कि मालखाना रजिस्टर जैसे डॉक्युमेंट्री सबूत सजा के लिए पर्याप्त हैं। हालांकि, अब सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषी महिला अधिकारी को जमानत दे दी है और उसकी चार साल की सजा को निलंबित कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को केवल एक केस तक सीमित न रखते हुए बिहार में साक्ष्य प्रबंधन की पूरी प्रणाली की जांच करने का मन बनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मुख्य मामले की अंतिम सुनवाई के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से गौर किया जाएगा।
Published on:
07 May 2026 08:31 am
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