जयपुर. इंटरनेट ऑफ थिंग्स, मशीन लर्निंग, बिग डेटा, क्लाउड और रोबोटिक्स जैसी उभरती हुई टेक्नोलॉजी हैं। अनुमान है कि आने वाले समय में मैनपावर का एक बड़ा हिस्सा ये टेक्नोलॉजी ले लेंगी। शायद यही वजह है कि आज के स्टूडेंट्स की डिमांड ये टेक्नोलॉजी हैं। इंडियन यूनिवर्सिटीज के कॅरिकुलम में भले ही ये कोर्सेज आने में समय लगे, लेकिन फॉरेन यूनिवर्सिटीज में इन कोर्सेज ने इंडियन स्टूडेंट्स को अट्रेक्ट करना शुरू कर दिया है। साथ ही बिजनेस, फैशन, आर्किटेक्चर, एरोस्पेस, बिजनेस एनालिटिक्स जैसे कोर्सेज के लिए सिंगापुर, हॉन्गकॉन्ग, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, स्विट्जरलैंड और पोलैंड नई चॉइसेज के रूप में डवलप हो रहे हैं। फॉरेन एजुकेशन एक्सपट्र्स का कहना है कि यूएस और यूके तो हमेशा से ही इंडियन स्टूडेंट्स की चॉइस में रहे हैं, लेकिन इन कंट्रीज की गवर्नमेंट की फॉरेन एजुकेशन पॉलिसी ने स्टूडेंट्स को खासा आकर्षित किया है। यूजी, पीजी और पीएचडी कोर्सेज के लिए स्टूडेंट्स इन कंट्रीज का रुख कर रहे हैं।