
आस्था की लौ से रोशन हो रही नई पीढ़ी (फोटो सोर्स- पत्रिका)
CG News: राजनांदगांव के संस्कारधानी स्वरूप को जीवंत बनाए रखने वाला एक अनोखा स्थल है ब्राह्मण पारा, जहां पिछले 82 सालों से प्रतिदिन रामायण पाठ की परंपरा निरंतर जारी है। यहां रामायण प्रचारक समिति की ओर से प्रतिदिन रात 8 से 9 बजे के बीच रामकथा का गुणगान किया जाता है। खास बात यह है कि अब इस आध्यात्मिक धारा से नई पीढ़ी को भी जोड़ने का संगठित प्रयास किया जा रहा है।
रामायण प्रचारक समिति की यह परंपरा केवल धार्मिक अनुष्ठान भर नहीं, बल्कि सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक जागरण का सशक्त माध्यम बन चुकी है। प्रतिदिन पांच दोहों का वाचन किया जाता है, जिसमें आसपास मोहल्ले के लोग भी सहभागी बनते हैं। आयोजन स्थल पर भक्ति, अनुशासन और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।
समिति से पिछले 40 सालों से जुड़े अरविंद तिवारी बताते हैं कि इस परंपरा की नींव 1946 (संवत-2001) में गोकुल प्रसाद तिवारी और रामजीवन तिवारी ने रखी थी। वे उस समय नगर के एकमात्र एमए शिक्षित व्यक्ति थे। उनका मानना था कि रामायण ऐसा साहित्य है, जिसमें जीवन के हर पड़ाव के गुर समाहित हैं, एक आदर्श बेटा, भाई, पिता, माता और पत्नी के मर्यादित स्वरूप का संदेश यहां मिलता है।
आज जब भागदौड़ भरी जिंदगी में आध्यात्मिक मूल्यों का क्षरण हो रहा है, तब ब्राह्मण पारा की यह रामकथा समाज को संस्कार, संयम और सद्भाव का संदेश दे रही है। यह स्थल अब केवल पूजा का केन्द्र नहीं, बल्कि शहर की सांस्कृतिक पहचान बन चुका है।
शुरुआत एक झोपड़ी से हुई, फिर समिति का गठन हुआ और सहयोग से भवन बना। भवन की दुकानों की आय से आज भी समिति संचालित है। छठवीं पीढ़ी तक यह परंपरा पहुंच चुकी है और एक भी दिन रामायण पाठ रुका नहीं। कोरोना काल में भी सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए पाठ जारी रहा। धमतरी के दाउद खान भी संस्था से जुडक़र रामायण पाठ किया करते थे। यहां रामायण पाठ के लिए शहर के मूर्धन्य साहित्यकार डॉक्टर बल्देव प्रसाद मिश्र और पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी भी शामिल होते थे।
Updated on:
16 Mar 2026 04:03 pm
Published on:
16 Mar 2026 04:02 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
