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जलकुंभी अब बोझ नहीं, रोजगार का अवसर… बिलासपुर की नीरजा बना रहीं साड़ी, बायोडिग्रेडेबल पेपर और सजावटी उत्पाद

Bilaspur News: नदियों और तालाबों में तेजी से फैलने वाली जलकुंभी को लंबे समय से जल स्रोतों के लिए बड़ी समस्या माना जाता रहा है। यह पौधा पानी की सतह को ढककर प्रदूषण और जल प्रवाह में बाधा पैदा करता है।

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जलकुंभी बनी रोजगार का जरिया (फोटो सोर्स- पत्रिका)

जलकुंभी बनी रोजगार का जरिया (फोटो सोर्स- पत्रिका)

CG News: नदियों और तालाबों में तेजी से फैलने वाली जलकुंभी को लंबे समय से जल स्रोतों के लिए बड़ी समस्या माना जाता रहा है। यह पौधा पानी की सतह को ढककर प्रदूषण और जल प्रवाह में बाधा पैदा करता है। लेकिन अब यही जलकुंभी नवाचार और रोजगार का माध्यम बनती नजर आ रही है।

बिलासपुर शहर की नीरजा सक्सेना ने इस समस्या को अवसर में बदलने का अनोखा प्रयास किया है। वे जलकुंभी के रेशों और लुगदी से साड़ी, हैंडलूम उत्पाद, बायोडिग्रेडेबल पेपर और विभिन्न सजावटी वस्तुएं तैयार कर रही हैं। उनका कहना है कि यदि इस पौधे का सही तरीके से उपयोग किया जाए तो इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी पैदा किए जा सकते हैं।

शोध से शुरू हुआ नवाचार का सफर

नीरजा सक्सेना ने एमएससी क्लॉथिंग एंड टेक्सटाइल की पढ़ाई के दौरान फाइबर और रेशों पर शोध करने का निर्णय लिया। अपनी गाइड डॉ. सीमा मिश्रा के मार्गदर्शन में उन्होंने जलकुंभी को शोध का विषय चुना। अध्ययन के दौरान यह पता चला कि जलकुंभी के तनों और रेशों से कई उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इसके बाद उन्होंने "प्रकृति पुकारे फेडरेशन" की स्थापना कर इस दिशा में काम शुरू किया।

पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार का अवसर

नीरजा का कहना है कि इस पहल का मुख्य उद्देश्य जलकुंभी के कारण होने वाले जल प्रदूषण को कम करना, पर्यावरण अनुकूल टेक्सटाइल उत्पाद विकसित करना और ग्रामीण महिलाओं व युवाओं को रोजगार से जोड़ना है। इस नवाचार को यदि बड़े स्तर पर बढ़ावा मिले तो जलकुंभी जैसी समस्या का समाधान भी निकल सकता है और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित हो सकते हैं। जिला प्रशासन की ओर से भी इस पहल को सहयोग मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

रेशों और लुगदी से बन रहे उपयोगी उत्पाद

नीरजा बताती हैं कि जलकुंभी के रेशों और लुगदी से बायोडिग्रेडेबल पेपर, फाइल कवर, डायरी, पेन स्टैंड और विभिन्न डेकोरेटिव आइटम तैयार किए जा रहे हैं। इसके रेशों का उपयोग साड़ी और अन्य हैंडलूम उत्पाद बनाने में भी किया जा रहा है। इसके अलावा जलकुंभी की पत्तियों से जैविक खाद तैयार करने की दिशा में भी काम चल रहा है।