
केंद्रीय कर्मचारियों ने सरकार से जल्द नए वेतन आयोग को लागू करने की मांग की है। (फोटो सोर्स : AI)
8th Pay Commission में पेंशनरों ने Pension Commutation की समय सीमा 15 साल से घटाकर 12 साल करने की मांग की है। कर्मचारी संगठनों ने अपनी डिमांड में इसे सबसे ऊपर रखा है। क्योंकि यह लड़ाई आज 39 साल से चली आ रही है। सुप्रीम कोर्ट तक मान चुका है कि पेंशन कम्युटेशन को 15 साल से घटाकर 12 साल करने का पेंशनर्स का तर्क तार्किक है लेकिन उसने इसे नीतिगत फैसला मानकर सरकार की मंशा पर छोड़ दिया, जिसका खामियाजा आज तक पेंशनर्स भुगत रहे हैं।
ऑल इंडिया अकाउंट्स कमेटी के महामंत्री एचएस तिवारी ने बताया कि कम्युटेशन पेंशन के मायने हैं रिकवरी। यह उस अमाउंट की होती है, जो कर्मचारी को रिटायरमेंट पर एकमुश्त मिलती है और बाकी पर पेंशन तय हो जाती है। उसके बाद सरकार 40 फीसदी रिकवरी के लिए काट लेती है। सरकारी पेंशनभोगियों के लिए पेंशन कम्युटेशन यानी पेंशन का अग्रिम हिस्सा लेना एक बड़ा सहारा होता है, लेकिन इसका दूसरा पहलू यह है कि पेंशन का एक हिस्सा हर महीने कटता रहता है। सेंट्रल सिविल सर्विसेज (Commutation of Pension) Rules, 1981 के रूल 10A के मुताबिक यह कटी हुई रकम 15 साल बाद बहाल होती है। यही नियम दशकों से विवाद और मुकदमों का कारण बना हुआ है।
1986 में सुप्रीम कोर्ट ने कॉमन कॉज बनाम यूनियन ऑफ इंडिया केस में पहली बार पेंशन बहाली का रास्ता खोला। कोर्ट ने माना कि सरकार 12 साल के भीतर ही पेंशन का अग्रिम हिस्सा (कम्यूटेशन) वसूल कर लेती है। लेकिन 'रिस्क फैक्टर' को देखते हुए उसने यह मियाद 15 साल तय की है। इससे पहले पेंशन का कटा हिस्सा कभी बहाल ही नहीं होता था।
2019 में फोरम ऑफ रिटायर्ड IPS ऑफिसर्स ने दिल्ली हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट में 12 साल की बहाली की मांग की। पेंशनर्स ने दलील दी कि अब औसतन 10–11 साल में ही सरकार एडवांस रकम वसूल कर लेती है। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना कि तर्क तार्किक है, लेकिन इसे नीतिगत फैसला बताते हुए सरकार के विवेक पर छोड़ दिया। नतीजा यह हुआ कि नियम अब भी 15 साल का ही लागू है।
विभिन्न पेंशनर संगठन और NC-JCM (नेशनल काउंसिल ऑफ ज्वॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी) लगातार मांग कर रहे हैं कि 8वें वेतन आयोग के एजेंडे में इस मुद्दे को प्राथमिकता दी जाए। संगठनों का कहना है कि 15 साल की मियाद बुजुर्गों के साथ अन्याय है, क्योंकि वास्तविक वसूली बहुत पहले हो जाती है।
सरकार अब तक अपने रुख पर अड़ी हुई है। उसका कहना है कि 15 साल की मियाद विशेषज्ञों की सिफारिशों और 'रिस्क फैक्टर' को ध्यान में रखकर तय की गई थी। 6वें और 7वें वेतन आयोग ने भी इसमें कोई बदलाव नहीं सुझाया।
Published on:
18 Aug 2025 11:40 am
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