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Poisonous Foods : बासी खाना, दूषित पानी… 20 मिनट में डबल हो जाते हैं ‘मौत वाले कीड़े’, एक्सपर्ट्स ने किया सावधान!

Poisonous Foods : इंदौर में दूषित पानी से अब तक 17 लोगों की मौत, 3 जनवरी को गांधीनगर, गुजरात में भी दूषित पानी पीने से 100 लोग बीमार पड़े। बासी खाने से भी मरने वाले लोगों की खबर आ रही है। आइए,

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भारत

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Ravi Gupta

Jan 06, 2026

Poisonous Foods, basi khana jahar hota hai, ganda pani pine se bimari, Experts warn to avoid these daily habits,

प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo - Gemini AI and Patrika

Poisonous Foods : इंदौर में दूषित पानी से अब तक 17 लोगों की मौत और एक हजार से अधिक बीमार हैं। 3 जनवरी को गांधीनगर, गुजरात में भी दूषित पानी पीने से 100 लोग बीमार पड़े। इतना ही नहीं पिछले कुछ दिनों में बासी खाना खाने से मौत, चिकन-पालक खाने से एक परिवार के 3 सदस्य मरे… ऐसी कई खबरें सामने आई हैं। इन खबरों ने कहीं ना कहीं हमारे अंदर डर भर दिया है! बासी खाना, पानी, आलू या शकरकंद को रात भर उबाल कर रखना आदि बातें कब हमारे लिए जानलेवा हो जाती हैं। इसके बारे में एक्सपर्ट्स से जानेंगे।

Expert Tips : दूषित पानी और बासी भोजन पर एक्सपर्ट्स की राय

दूषित पानी और बासी भोजन को लेकर पत्रिका के रवि कुमार गुप्ता की बातचीत इनसे हुई है- डॉ. अर्जुन राज (आयुर्वेदिक), दिब्या प्रकाश (डाइटिशियन), सुनंदा भोला (शोधार्थी), डॉ. हिमांशु गुप्ता (सीनियर फिजिशियन)

वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट की पोल खोल रहा 'इंदौर'

नदी और डैम वॉटर पर रिसर्च करने वाली सुनंदा कुमारी भोला कहती हैं कि वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट अगर सही से होता तो शायद इंदौर जैसी घटना नहीं होती। अब तक सामने आई जानकारी से ये पता चल रहा है कि गंदा पानी (मल-मूत्र) पीने के पानी से मिला तब जाकर ये दर्दनाक घटना घटी।

वहीं, एनवायरमेंटल परफॉर्मेंस इंडेक्स की रिपोर्ट (वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट) में भारत का रैंक 94 (खराब) है। इस हिसाब से वेस्ट वॉटर ट्रीटमेंट को लेकर हमें सुधार करने की जरुरत है।

सुनंदा कहती हैं कि नल का पानी सीधे तौर पर इस्तेमाल करने से बचना चाहिए। पानी को उबालकर पिएं। क्योंकि, गंदे पानी में कई प्रकार के केमिकल्स, बैक्टीरिया आदि होते हैं। सीवेज वाटर में कई प्रकार की हानिकारक चीजें होती हैं:

  • बैक्टीरिया: ई. कोलाई (E. coli), साल्मोनेला, विब्रियो कॉलेरी।
  • वायरस: हेपेटाइटिस A और E, और रोटावायरस ।
  • परजीवी (Protozoa): जियार्डिया और अमीबा।

जहरीले रसायन (Chemicals) घरों और छोटे कारखानों से निकला पानी सीवेज में मिलने के कारण इसमें कई केमिकल होते हैं, जैसे:

  • भारी धातुएं (Heavy Metals): सीसा (Lead), पारा (Mercury), और कैडमियम।
  • नाइट्रेट और फास्फेट: ये खेती और डिटर्जेंट से आते हैं। पानी में इनकी अधिकता से ऑक्सीजन खत्म हो जाती है, जिससे मछलियां मर जाती हैं।
  • डिटर्जेंट और साबुन: इनमें मौजूद रसायन त्वचा के लिए हानिकारक होते हैं और पानी को जहरीला बनाते हैं।

ये इंसानों की जान लेने के लिए काफी हैं। इसके अलावा पानी में माइक्रोप्लास्टिक भी मिलने लगे हैं। ये भी हमारी सेहत के लिए हानिकारक हैं। इसलिए, खुद की सुरक्षा के लिए पानी को सावधानी से इस्तेमाल करें। जरा भी दुर्गंध होने पर या गंदा दिखने पर यूज करने से बचें। साथ ही जिम्मेदारी नागरिक की तरह संबंधित विभाग को सूचित करें।

गंदा पानी किडनी किलर : डॉ. हिमांशु गुप्ता

डॉ. हिमांशु गुप्ता (सीनियर फिजिशियन) कहते हैं, गंदा पानी कई खतरनाक बीमारी का कारण है। इतना ही नहीं गंदा पानी पीने से किडनी फेलियर के चांसेज अधिक होते हैं। क्योंकि, सीसा (Lead), पारा (Mercury), और कैडमियम गंदे पानी में होते हैंं। ये शरीर के अंगों, विशेषकर किडनी और लिवर को नुकसान पहुंचाते हैं।

ई. कोलाई, साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया मिलते हैं जो टाइफाइड को जन्म देते हैं। साथ ही विब्रियो कॉलेरी बैक्टीरिया हैजा का कारण बनता है। वायरस हेपेटाइटिस A और E ये पीलिया का कारण बनते हैं और रोटावायरस बच्चों में गंभीर दस्त का कारण बनते हैं। इसके अलावा परजीवी जियार्डिया और अमीबा, जो आंतों में संक्रमण और मरोड़ पैदा करते हैं। इतना ही नहीं, गंभीर रूप से हैजा, टायफाइड आदि का खतरा बढ़ जाता है। इस कारण जान भी चली जाती है।

बासी खाना क्यों खतरनाक?

डॉ. अर्जुन राज ने बताया, आयुर्वेद में बासी खाना जहर के समान बताया गया है। इतना ही नहीं, हर समय के खाने को तुरंत बनाने के बाद ही खाने को कहा जाता है। बासी चावल (Stale Rice) से 'फ्राइड राइस सिंड्रोम' का खतरा रहता है। चावल को पकाने के बाद अगर लंबे समय तक रूम टेम्परेचर पर छोड़ दिया जाए, तो इसमें Bacillus cereus नामक बैक्टीरिया पनपने लगता है।

डाइटिशियन दिब्या प्रकाश कहती हैं कि हम लोग सोचते हैं कि खाना गर्म करने से ये बैक्टिरिया मर जाएंगे। पर ऐसा नहीं होता है। ये गर्म होने पर विषाक्त चीजें छोड़ते हैं। इन्हें खाने से बचना चाहिए।

क्या करना सही : चावल पकने के 1-2 घंटे के भीतर ही फ्रिज में रख देना चाहिए।

अंडा-चिकन या अन्य मांस को बासी ना खाएं

बासी चिकन या अन्य मांस साल्मोनेला इन्फेक्शन का खतरा बढ़ाने काम करते हैं। पका हुआ चिकन और अंडा अगर सही से स्टोर न किया जाए, तो इनमें बहुत जल्दी बैक्टीरिया पैदा होते हैं। इनमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है, और प्रोटीन वाली चीजें बहुत जल्दी खराब होकर नाइट्रोसेमाइन (Nitrosamines) जैसे हानिकारक तत्व पैदा कर सकती हैं। अगर आप इनको अच्छी तरह साफ करके या पकाकर नहीं खाते हैं तो साल्मोनेला इन्फेक्शन फैल सकता है।

क्या करना सही : चिकन या अन्य मांस को पकने के बाद खा लेना चाहिए। 1-2 घंटे के भीतर ही फ्रिज में रख देना चाहिए।

आलू-शकरकंद को रात भर उबालकल ना रखें

डॉ. अर्जुन कहते हैं कि आलू और शकरकंद को उबालकर रात भर बाहर (रूम टेम्परेचर पर) छोड़ना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। जबकि, हम इस बात को हल्के में लेते हैं।

आलू जमीन के नीचे उगते हैं, इसलिए उनमें अक्सर क्लोस्ट्रीडियम बोटुलिनम (Clostridium Botulinum) नामक बैक्टीरिया होते हैं। जब आलू उबालते हैं, तो गर्मी से बैक्टीरिया तो मर जाते हैं, लेकिन उनके 'स्पोर्स' जीवित रह सकते हैं। अगर उबले हुए आलू को खुल हवा में रखा जाए तो इससे बॉटुलिनम टॉक्सिन पैदा होते हैं। यह इतने घातक जहर हैं जो नर्वस सिस्टम को डैमेज कर देते हैं।

साथ ही आलू और शकरकंद दोनों ही हाई स्टार्ट वाले फूड हैं। उबलने के बाद इनका स्टार्च 'जिलेटिनाइज्ड' हो जाता है, जो बैक्टीरिया के लिए सबसे पसंदीदा भोजन है। रूम टेम्परेचर (5°C से 60°C के बीच) को "डेंजर जोन" कहा जाता है। इसमें बैक्टीरिया हर 20 मिनट में दोगुने हो जाते हैं। अगर हमने रात भर रूम के तापमान पर छोड़ा तो इनकी संख्या इतनी बढ़ जाती है कि ये फूड पॉइजनिंग का कारण बनते हैं।

कैसे रखना सही- दिब्या ने बताया कि उबलने के बाद इन्हें 1-2 घंटे के भीतर ही फ्रिज में रख दें। इसके लिए एयरटाइट कंटेनर का यूज करें। साथ दोबारा गर्म करने से बचें।

बासी खाने की पहचान

  • बासी खाना चिपचिपा हो जाए
  • खाने का स्वाद और सुगंध बदल जाए
  • ऊपर फफूंद जैसा दिखे

एक्सपर्ट्स ने ये बताया कि अगर खाने के मामले में हाइजीन का ध्यान नहीं रखा जाए तो इससे कई तरह की बीमारियां हो सकती हैं। इसलिए, बासी खाना को छोड़ ताजा खाना खाएं। साथ ही पीने के पानी को लेकर भी सजग हों।