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Big Health Issue : 4 में से 1 भारतीय युवा पर ये खतरा! AIIMS-ICMR का दावा, यूथ को बीमार कर रहा बॉडी इमेज

Big Mental Health Issue Body Image Distress : एम्स और आईसीएमआर की बॉडी इमेज डिस्ट्रेस (Body Image Distress) शोध रिपोर्ट में युवाओं को लेकर चिंता जताई गई है। देश के युवा एक नई बीमारी की ओर बढ़ रहे हैं। आइए, मनोचिकित्सक डॉ. आदित्य सोनी से जानते हैं कि इससे कैसे बचना है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर | Photo - Gemini AI and Patrika

Big Mental Health Issue Body Image Distress:"यह बहुत बड़ा हेल्थ इश्यू है, जिससे भारतीय युवा लंबे समय से जूझ रहे हैं। लेकिन, इसको लेकर बात ही नहीं होती है। घातक इतना कि ये मामला बढ़ते-बढ़ते सुसाइड तक पहुंच जाता है", मनोचिकित्सक डॉ. आदित्य सोनी ने एम्स और आईसीएमआर की बॉडी इमेज डिस्ट्रेस (Body Image Distress) शोध रिपोर्ट पर ये कहा। एम्स और आईसीएमआर की ये रिपोर्ट (AIIMS ICMR Research) में ये बात सामने आई है कि 'बॉडी इमेज डिस्ट्रेस' अब भारतीय युवाओं में एक बड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में उभर रही है।

'बॉडी इमेज डिस्ट्रेस' से जूझ रहे भारतीय युवा

एम्स और आईसीएमआर के आंकड़े रिसर्च 'जर्नल ऑफ एजुकेशन एंड हेल्थ प्रमोशन' में प्रकाशित हैं। इस शोध के लिए 18 से 30 वर्ष की आयु के 1,071 युवाओं को शामिल किया गया था। मोटापे से ग्रस्त लगभग 49% युवाओं ने गंभीर बॉडी इमेज चिंता की बात स्वीकार की। साथ ही कम वजन वाले (Underweight) लगभग 47% युवा भी इस तनाव की चपेट में है। वहीं, सामान्य वजन वाले युवाओं में यह आंकड़ा 36% था।

रिसर्च में ये भी बताया गया है, कम वजन वाले युवाओं में बॉडी इमेज डिस्ट्रेस की संभावना सामान्य से दोगुनी और मोटापे से ग्रस्त युवाओं में तीन गुना अधिक होती है। बता दें, हर 4 में से एक युवा को लगता है कि उनको जज किया जा रहा है।

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मनोचिकित्सक डॉ. आदित्य सोनी जिन्होंने डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) के दौरान 'बॉडी इमेज डिस्ट्रेस' पर शोध किया। डॉ. सोनी ने बताया है कि इस तरह के स्ट्रेस के साथ कैसे डील किया जा सकता है।

Body Image Distress | 'बॉडी इमेज डिस्ट्रेस' क्या है?

डॉ. आदित्य सोनी ने कहा, बॉडी इमेज डिस्ट्रेस एक बड़ी मानसिक समस्या है। अपने शरीर की बनावट को लेकर अत्यधिक चिंता करना और फिर ड्रिप्रेशन में चले जाना, यही बॉडी इमेज डिस्ट्रेस। इससे अधिक पतले लोग या मोटे लोग ग्रसित होते हैं। या यूं कहें कि जो कथित समाज की सुंदरता वाली परिभाषा में फिट नहीं बैठते हैं, वो इस मानसिक बीमारी का शिकार हो जाते हैं।

बॉडी इमेज डिस्ट्रेस बढ़ाने वाले कारण

बॉडी इमेज डिस्ट्रेस का कारण एक नहीं कई हैं। आजकल सोशल मीडिया ने इसको और अधिक बढ़ावा देने का काम किया है। साथ ही विज्ञापन भी बड़े वजस में से एक है। जैसे- फिटनेस, सुंदरता को दिखाने के लिए बनावटी चीजों का उपयोग किया जाता है और हम आम लोग इसे ही रियलिटी मान लेते हैं।

इसी आधार सुंदरता और फिटनेस की परिभाषा तय की जाती है। जबकि, हर किसी का शरीर और बनावट एक-सा नहीं होता है। जो कोई भी इस बात को नहीं समझता है उसे बॉडी इमेज डिस्ट्रेस से जूझना पड़ता है। आखिरकार, हम इंसान हैं, अगर कोई हमारे शरीर, रंग या बनावट पर टिप्पणी करेगा तो कब तक खुद संभालेंगे। इसलिए, इस तरह के मामले बढ़ रहे हैं।

बॉडी इमेज डिस्ट्रेस के प्रभाव

  • चिंता और तनाव का बढ़ना
  • भूख कम लगना
  • आत्मविश्वास घटना
  • सुसाइडल विचार का आना
  • सोसाइटी से कट के रहना

Body Image Distress Examples | बॉडी इमेज डिस्ट्रेस पर लोगों की राय

अनुभव 1- एक महिला ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि मैं बचपन से इससे जूझ रही हूं। लोगों को लगता है कि मेरा वजन अधिक है जबकि, मुझे नहीं लगता। मेरे करीबी, दोस्त या अन्य से अक्सर वजन कम करने को लेकर ज्ञान मिलता है। इस कारण मैं खुद को डिमोटिवेटेड महसूस करती हूं। लोगों से मिलने का मन नहीं करता है। एक बार जो मेरे साथ इस तरह बात कर लेते हैं उसके साथ रिश्ता खत्म कर लेती हूं। ऐसा नहीं कि मुझे इससे फर्क नहीं पड़ता, पर मैं डील करने के लिए वैसे लोगों से दूरी बना लेती हूं।

अनुभव 2- एक पुरुष ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि मैं पूरी तरह फिट हूं। पर मेरी तोंद निकली है। इसके लिए अक्सर मेरे दोस्त और कलीग कमेंट करते हैं। खासकर, फोटो लेते समय मुझे बोला जाता है- "भाई बैलून (तोंद) पिचका ले…।" मेरी तरह कई पुरुष हैं जिनको तोंद को लेकर कमेंट किया जाता है। हालांकि, बुरा लगता है पर फिर मैं खुद को समझाकर डिमोटिवेट नहीं करता हूं।

अनुभव 3- इसी तरह एक लड़के ने बताया कि मैं पतला हूं। मतलब कि सामान्य से अधिक पतला दिखता हूं पर कमजोर नहीं। लोग मुझे सूखटू जैसे उपनाम से बुलाते हैं।

शरीर की बनावट और वजन का विज्ञान समझें

डॉ. आदित्य कहते हैं, शरीर की बनावट और वजन का विज्ञान समझना जरूरी है। आप अपनी BMI चेक कर लें। फिटनेस जांच करा लें। अगर सबकुछ फिट है तो लोगों की बकवास से परेशान होने की आवश्यकता नहीं है। हां, अगर आप मोटे हैं तो भी बीमारी का खतरा है और अधिक पतले हैं तो भी। इसलिए, खुद की फिटनेस पर काम करें।

फिटनेस ट्रेनर का कहना

सेलेब फिटनेस ट्रेनर राकेश उडियार का कहना है कि जिम जाना, एक्सरसाइज करना, योग करना ये सिर्फ शरीर को फिट नहीं रखते बल्कि मानसिक रूप से भी मजबूती देने का काम करते हैं। इसलिए, हमें नियमित रूप से वर्कआउट करना चाहिए। इस बात से डॉ. आदित्य भी सहमत हैं।

जागरूकता जरूरी है- डॉ. आदित्य

इसके अलावा डॉ. सोनी कहते हैं कि समाज में इसको लेकर जागरूकता जरूरी है। ऐसा जरूरी नहीं है कि कोई आपके अनुरूप ठीक नहीं दिख रहा तो उसका मजाक उड़ाएं। बल्कि, वाकई कोई शारीरिक समस्या से जूझ रहा है तो उसको सपोर्ट करें।

एम्स के डॉक्टर की सलाह

एम्स के मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर पीयूष रंजन ने कहा, "वजन प्रबंधन (Weight Management) का मतलब सिर्फ वजन कम करना नहीं है। अक्सर युवा भावनात्मक समस्याओं के कारण लाइफस्टाइल प्रोग्राम बीच में ही छोड़ देते हैं। इसलिए, पोषण देखभाल के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक स्क्रीनिंग भी अनिवार्य होनी चाहिए।"


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