
बिहार में डिफेंस कॉरिडोर को मंजूरी
Bihar Defence Corridor News : बंदूक बनाने की कारीगरी के नाम पर देश में मुंगेर (Gun Factory in Munger Bihar) को काफी शोहरत हासिल है। हालांकि सख्त लाइसेंसिंग नियमों और अवैध हथियार निर्माण में वृद्धि के कारण कभी प्रसिद्ध रहे मुंगेर के बंदूक कारखानों ने पिछले कुछ समय में अपनी चमक खो दी थी। बिहार राज्य सरकार के कैबिनेट के फैसले के बाद अब गन फैक्टरी को नई संजीवनी मिलने वाली है। यहां तरह-तरह के हथियारों, बुलेटप्रूफ जैकेट, विस्फोटक, हेलमेट, बॉडी आर्मर और नाइट विजन उपकरणों सहित रक्षा उपकरणों का उत्पादन होगा।
बिहार के उद्योग विभाग ने बीते साल जून में बिहार में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर बनाने का निर्णय लिया था। बिहार के तत्कालीन उद्योग मंत्री नीतीश मिश्रा ने तब बताया था कि ऑर्डिनेंस फैक्ट्री कॉरिडोर से जुड़ा प्रस्ताव केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) के पास स्वीकृति के लिए भेजा गया है।
बिहार में विधानसभा चुनाव के बाद 25 नवंबर 2025 को हुई पहली बैठक में राज्य सरकार की पहली ही कैबिनेट बैठक में नीतीश कुमार सरकार ने राज्य में एक डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर और एक सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क स्थापित करने के लिए एक समिति के गठन को मंजूरी दे दी थी। हालांकि, बिहार के उपमुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने मीडिया को यह बताया कि बंदूक कारखानों को पुनर्जीवित करने की योजना को बिहार मंत्रिमंडल ने मंजूरी दे दी है। इस मंजूरी के तहत डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। इस योजना के तहत सेमीकंडक्टर विनिर्माण पार्क, वैश्विक क्षमता केंद्र, मेगा टेक सिटी और फिनटेक सिटी शामिल किए गए हैं। उन्होंने बताया कि मुंगेर तोप कारखानों को नए रक्षा गलियारे के तहत पुनर्जीवित और उन्नत किया जाएगा।
सम्राट चौधरी के जानकारी देने के बाद बंदूक कारखाने के कारीगरों और संचालकों में खुशी की लहर दौड़ गई है। यह उम्मीद जताई जा रही है कि इस व्यवसाय से लगभग 1 लाख लोगों को रोजगार मिल सकता है। डिफेंस कॉरिडोर मुंगेर, बांका, जमुई,कैमूर और अरवल तक फैला होगा। इसके लिए संभावित स्थला के रूप में भागलपुर, मुजफ्फरपुर, शेखपुरा और सारण को भी संभावित स्थल के रूप में चुना गया है।
250 years old Gun Factory in Munger: बिहार के मुंगेर जिले में ईस्ट इंडिया कंपनी के राज के समय से बंदूक बनाने के साक्ष्य मिलते हैं। मुंगेर में गन फैक्ट्री की स्थापना 1762 में ही हो गई थी। यहां कुल 37 गन फैक्टिरयों में हथियार बनाए जाते हैं।
बिहार जदयू के प्रदेश महासचिव और फाइजर एंड कंपनी गन फैक्टरी के मालिक सौरभ निधि (Pfizer & co gun factory Munger) ने पत्रिका से बताया कि बिहार सरकार ने यहां डिफेंस कोरिडोर बनाने का फैसला किया है। ऐसा कहा जा रहा है कि इस फैसले से मुंगेर की गन फैक्ट्री को संजीवनी मिलेगी। बहुत सारे लोग जो बंदूक बनाने का हुनर जानते हैं, लेकिन काम नहीं होने की वजह से बेरोजगारी की मार झेल रहे थे अब उन्हें भी रोजगार मिल जाएगा। यह भविष्य में संभव हो सकता है। वर्तमान हालात तो यह है कि अभी पूरे मुंगेर में 36 गन फैक्ट्री में 61 लोग काम करते हैं, जिसमें से अकेले मेरे गन फैक्ट्री में 46 लोग काम कर रहे हैं। मतलब बाकी के 35 फैक्टरी में सिर्फ 10 लोग काम कर रहे हैं। ज्यादातर फैक्टरी में ताले लग चुके हैं।
उन्होंने कहा कि राजगीर में आयुध फैक्टरी हजारों एकड़ की जमीन पर बना। निर्माण में 500 करोड़ से ज्यादा खर्च हो गए लेकिन वहां अभी उत्पादन शुरू नहीं हो सका है। केंद्र सरकार उसे शुरू करवा दे तो बिहार के लिए बहुत अच्छी बात होगी।
मुंगेर में बंदूक बनाने का इतिहास लगभग 250 वर्ष पुराना है। यह बताया जाता है कि नवाब मीर कासिम में सबसे पहले यहां कट्टा तैयार करवाया था। वह अंग्रेजों से आजिज आ चुके थे और कट्टा तैयार करवाने के बाद बिहार के बक्सर में उन्होंने उनके खिलाफ लड़ाई छेड़ दी। मीर और अंग्रेजों के बीच दो दिनों 22 और 23 अक्टूबर 1764 तक लड़ाई चली थी। स्थानीय इतिहास के जानकार कहते हैं कि बंगाल के नवाब मीर कासिम ने अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए देसी कट्टा बनवाया था। यह कट्टा मुंगेर के कारीगरों ने तैयार किया था।
बंगाल के नवाब मीर कासिम (Mir Qasim) का साम्राज्य मुंगेर तक फैला हुआ था। वहां इस बात की तस्दीक करता हुआ किला भी है जिसे मीर कासिम का किला के नाम से जाना जाता है। मीर कासिम ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के समर्थन से नवाब बनाए गए थे और इसके बदले उन्हें लगभग 29 लाख रुपये और लिए उन्हें बर्दवान, मिदनापुर, चटगांव उपहार में देने पड़े थे। यह सब मीर कासिम ने अपने ससुर मीर जाफर को हटवाकर खुद को गद्दी पर बिठाने के लिए किया था। यह कारोबार फलता-फूलता चला गया और कभी 1500 परिवारों की आजीविका बंदूक कारखानों पर निर्भर हो गई थी।
बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (BIADA) की 8 एकड़ जमीन पर 37 निजी बंदूक कारखाने स्थित हैं। वर्ष 2001 में बंदूक कारखानों ने 2-3 करोड़ रुपये का उत्पाद शुल्क चुकाया था। हालांकि 2016 में भारत की हथियार लाइसेंसिंग नीति में बदलाव के बाद हथियारों की मांग में काफी कमी दर्ज की गई। नई लाइसेंसिंग नीति के तहत (New Arms act 2016) एक नागरिक दो ही लाइसेंस वाली बंदूकें रख सकता है। इस नीति से पूर्व तीन लाइसेंस वाली बंदूकें रखने का नियम था। जाहिर सी बात है कि इस पॉलिसी के तहत बंदूकों की मांग और उसके चलते उत्पादन में काफी कमी आती चली गई। नतीजा यह हुआ कि बंदूक कारखानों में काम कम होते चले गए और बंदूक बनाने वाले हुनरमंद हाथ अब रोजगार पाने के लिए भवन निर्माण में जुट गए या ऑटो चालक का बन गए।
भारत का रक्षा क्षेत्र (India's Defence Sector Growing Rapidly) तेजी से ग्रोथ कर रहा है। ऐसे में बिहार के लिए डिफेंस कॉरिडोर परियोजना काफी मायने रखता है। वर्ष 2024-25 में भारत रक्षा निर्यात 23,622 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। यह 2013-14 के मुकाबले 34 गुना ज्यादा है। रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry) का लक्ष्य रक्षा उत्पादन कारोबार को 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाना है। जाहिर है कि बिहार को इस बाजार में हिस्सेदारी मिल जाएगी तो उसके राजस्व में काफी बढ़ोतरी हो सकती है और इससे राज्य के दूसरे क्षेत्रों के विकास को भी गति मिल सकती है।
देश में दक्षिण में रक्षा गलियारा डिफेंस कॉरिडोर 2019 में बना था। इसमें 3,123 करोड़ रुपये निवेश किए गए थे। यह चेन्नई, होसुर, कोयंबटूर, सलेम और तिरुचिलापल्ली तक फैला हुआ है। वहीं उत्तर प्रदेश में डिफेंस कॉरिडोर (UP Defence Corridor) 2018 में शुरू किया गया था। इसमें 3732 करोड़ रुपये की लागत आई थी। यूपी डिफेंस कॉरिडोर में छह नोड्स हैं- अलीगढ़, आगरा, कानपुर, लखनऊ, चित्रकूट और झांसी।
Updated on:
10 Jan 2026 09:18 am
Published on:
10 Jan 2026 09:00 am
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