10 मार्च 2026,

मंगलवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

10 साल पूरे… बैतूल से लंदन तक ‘बेटी के नाम घर की पहचान’, एक सकारात्मक पहल की कहानी

MP News: अनिल नारायण यादव ने बेटा-बेटी के बीच भेदभाव की गहरी खाई को खत्म करने के लिए अपनी बेटी के जन्म दिन पर शुरू किया 'बेटी के नाम घर की पहचान' अभियान। 8 नवंबर 2015 को शुरु हुए इस अभियान को 10 साल पूरे हो गए हैं। महिलाओं के खिलाफ अपराधों की ऊंची दर वाले मध्य प्रदेश में यह पहल एक उम्मीद की किरण है। जानिए मध्यप्रदेश में बेटियों के सम्मान की एक सकारात्मक पहल की कहानी...।

3 min read
Google source verification
Beti ke nam ghar ki pahchan

MP News 'बेटी के नाम घर की पहचान' (फोटो सोर्स : पत्रिका)

MP News: घर के बाहर बेटी के नाम की एक नेम प्लेट लगाने से क्या बदल जाएगा…? क्या समाज में उनके खिलाफ हो रहे अपराध एक पल में खत्म हो जाएंगे? या फिर उन्हें उनके वो सारे अधिकार मिल जाएंगे जिनकी वो अधिकार हैं ? या फिर बेटियों को बोझ समझने वाली सोच का हमेशा के लिए अंत हो जाएगा..? ऐसे ही न जाने अनगिनत सवाल खड़े किए गए जब मध्यप्रदेश के बैतूल जिले के एक शख्स ने बेटियों के पहचान के लिए कुछ करने की ठानी। जिले के अनिल नारायण यादव ने बेटा-बेटी के बीच भेदभाव की गहरी खाई को खत्म करने के लिए अपनी बेटी के जन्म दिन पर शुरू किया बेटी के नाम घर की पहचान। 8 नवंबर 2015 को शुरु हुए इस अभियान को 10 साल पूरे हो गए हैं।

image

पूरी खबर पढ़ने के लिए लॉगिन करें।