
जयपुर। राजस्थान में अरावली की हरी-भरी वादियां अब सिर्फ प्राकृतिक सौंदर्य का प्रतीक ही नहीं, बल्कि पौष्टिकता और जैव विविधता का भी खजाना बनती जा रही हैं। स्थानीय किसानों की मानें तो यहां की कई प्रजातियों की जैविक घास न केवल मवेशियों के लिए उत्तम चारा साबित हो रही हैं, बल्कि मिट्टी की सेहत और पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
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