
1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के दौर में, जब देश पर विदेशी हुकूमत का जाल कसता जा रहा था, एक योद्धा ऐसा था जिसने हर मुश्किल में नई राह बनाई। तात्या टोपे, जिनका नाम आज भी शौर्य और बलिदान की गाथा का पर्याय है, ने उस दौर में अपनी रणनीति, साहस और अटल संकल्प से अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती दी। बार-बार हार का सामना करने के बावजूद उन्होंने न हिम्मत खोई, न मनोबल टूटने दिया। हर परिस्थिति में नई उम्मीद जगाते हुए, उन्होंने गुरिल्ला युद्ध से लेकर सेना संगठन तक हर भूमिका को बखूबी निभाया। आज की स्वतंत्रता संग्राम की कहानी में तात्या टोपे के बलिदान की गाथा।
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