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Venezuela Crisis के बीच क्यों याद आए इंद्र कुमार गुजराल? अमेरिका ने इन देशों में भी कराया तख्तापलट, राष्ट्रपति को फांसी पर लटकाया

Venezuela News: अमेरिका द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी पर केंद्र सरकार की चुप्पी की काफी आलोचना हो रही है। आलोचक अमेरिका के 1989 के पनामा हमले पर तत्कालीन विदेश मंत्री इंद्र कुमार गुजराल की टिप्पणी को याद कर रहे हैं।

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US attacked on Venezuela

अमेरिका अबतक कई देशों में तख्तापलट करवा चुका है। (AI Image)

Venezuela Madura News : अमेरिका ने शनिवार को सैन्य अभियान चलाकर वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (US arrests Nicolas Maduro) और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोर्स को गिरफ्तार कर लिया। अमेरिका ने उनपर नारको टेररिज्म और ड्रग्स की तस्करी जैसे आरोप लगाकर मुकदमा चलाने का निर्णय लिया है। हालांकि अमेरिका यह भी साफ-साफ कह रहा है कि उसे वेनेजुएला का तेल भंडार (America wants Venezuela oil) चाहिए। हालांकि अमेरिका द्वारा पहली बार इस तरह की घटना को अंजाम नहीं दिया गया है।

अमेरिका के इस कदम पर भारत सरकार की चुप्पी को लेकर देश के राजनीतिक विश्लेषक भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि नरेंद्र मोदी की मजबूत और स्थिर सरकार की अमेरिका के इस तानाशाही रवैये पर चुप्पी बनाए रखना, उनके साम्राज्यवादी रवैये को समर्थन देने जैसा है। आइए जानते हैं कि अमेरिका ने कब-कब किन देश के मामलों में हस्तक्षेप किया है।

पनामा के शासक को भी अमेरिका ने किया था गिरफ्तार

अमेरिका ने वर्ष 1989 में लैटिन अमेरिकी देश पनामा पर हमला बोला और वहां के शासक मैनुएल नोरीएगा को गिरफ्तार (US Arrested Manuel Noriega in 1989) किया था। वेनेजुएला के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर अमेरिकी सरकार का दूसरे देशों में हस्तक्षेप की चर्चा तो शुरू हो ही गई है। इसके साथ ही सोशल मीडिया पर भारत सरकार के अमेरिका के इस कदम पर चुप्पी को लेकर भी मोदी सरकार की निंदा हो रही है।

वेनेजुएला पर लंबे समय से अमेरिका लगाता रहा है ये आरोप

अमेरिका, वेनेजुएला के राष्ट्रपति मादुरो पर लंबे समय से ड्रग तस्करी और आतंकवादी संगठनों से संबंध रखने का आरोप लगाता रहा है। अमेरिका ने वर्ष 2020 में मादुरो पर भ्रष्टाचार, ड्रग तस्करी और अन्य गंभीर आरोपों में अदालत में मुकदमा भी दर्ज कराया था। इसके साथ ही मादुरो पर 5 करोड़ डॉलर के इनाम की घोषणा की थी।

अमेरिका ने 20 हजार सैनिकों के साथ किया था पनामा पर हमला

वर्ष 1989 में 21 दिसंबर को संसद के शीतकालीन सत्र में माकपा नेता और राज्यसभा सदस्य एम ए. बेबी और बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रह्मण्यम् स्वामी ने विश्वनाथ सिंह सरकार से यह मांग की थी कि वह अमेरिका द्वारा पनामा पर 20 हजार सैनिकों से हमला किए जाने को लेकर बयान जारी करे।

'आप किसी कमजोर व्यक्ति को और गलत दिशा में देख रहे हैं'

तत्कालीन विदेश मंत्री इंद्र कुमार गुजराल ने सुब्रह्मण्यम स्वामी को टोकते हुए कहा था कि मेरे सम्मानित मित्र मैं आपको इस बात के लिए सुनिश्चित करना चाहता हूं कि अगर आप किसी कमजोर व्यक्ति को देखते हुए यह टिप्पणी कर रहे हैं तो आप गलत दिशा में देख रहे हैं। हम इस बारे में आज शाम 5:30 बजे टिप्पणी करेंगे। गुजराल ने उस दिन शाम को पनामा पर अमेरिकी हमले को लेकर बेहद तल्ख टिप्पणी की थी।

'केंद्र की स्थिर सरकार की चुप्पी समझ से परे है'

वरिष्ठ पत्रकार और साहित्यकार विष्णु नागर मोदी सरकार पर कटाक्ष करते हुए सोशल मीडिया पर टिप्पणी करते हुए कहते हैं- 'विश्वनाथ प्रताप सिंह की अनिश्चित भविष्य वाली सरकार थी और इंद्र कुमार गुजराल उसके विदेश मंत्री थे। वह सरकार पूरे 11 महीने भी नहीं चल सकी थी मगर फिर भी उस सरकार में दम था। रीढ़ की हड्डी थी। 1989 में पनामा के राष्ट्रपति मेन्युएल नोरिएगा को भी इसी तरह गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया था, जिस तरह अभी वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के साथ किया गया है। तब विदेश मंत्री गुजराल ने संसद में अमेरिकी हस्तक्षेप की खुलकर निंदा की थी। अब ग्यारह साल से अधिक समय से चल रही स्थिर सरकार है मगर वक्तव्य में अमेरिका का नाम लेने का भी साहस नहीं! निंदा करना तो बहुत दूर की बात है।'

उन्होंने लिखा कि एक देश के राष्ट्रपति और उनकी पत्नी को पकड़ कर ले जाया जाता है। अमेरिकी राष्ट्रपति साफ़- साफ़ कहने में गुरेज भी नहीं कर रहा है कि हमें तो वेनेजुएला के तेल के भंंडार चाहिए और हमारा विदेश मंत्रालय मिमिया रहा है। हमारी सरकार कह रही है कि हम वेनेजुएला के लोगों के हितों के लिए चिंतित हैं। हम क्षेत्र में शांति चाहते हैं। यह भारत जैसे देश की सरकार का वक्तव्य है, जिसने कभी गुटनिरपेक्ष बिरादरी बनाई थी और उसका नेतृत्व किया था।

वहीं सामाजिक कार्यकर्ता तुषार कांत ने इस मुद्दे पर मोदी सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि यह सरकार ट्रंप चला रहा है इसलिए ख़ुद अपनी भर्तस्ना कैसे?

अमेरिका ने कब कब गिराई सरकार

- 1953 में ईरान में प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसादेग की सरकार तख्तापलट कराने में अमेरिका का हाथ रहा।

- 1954 में ग्वाटेमाला में चुनी गई लोकतांत्रिक सरकार के राष्ट्रपति जैकोबो अर्बेन्ज गुजमैन के नेतृत्व वाली सरकार को गिरवा दिया था।

- चिली में 1973 में राष्ट्रपति सल्वाडोर अलेंदे की लोकतांत्रिक सरकार को ऑगस्टो पिनोशे नाम के सैन्य जनरल के नेतृत्व में हुए सैन्य अभियानों के जरिए गिराया गया था।

- अमेरिकी सैनिकों ने इराक के तत्कालीन राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को 13 दिसंबर 2003 को गिरफ्तार किया था। सद्दाम सरकार पर रासायनिक और परमाणु हथियार रखने का आरोप लगाया गया था। तीन साल मुकदमा चलाने के बाद सद्दाम हुैसन को फांसी दे दी गई थी।

डोनाल्ड ट्रंप की नजर कोलंबिया, क्यूबा और ग्रीनलैंड पर भी

डोनाल्ड ट्रंप का हौसला काफी बढ़ा चुका है। अब उसकी नजर कोलंबिया तथा क्यूबा पर है। डेनमार्क के स्वायत्त क्षेत्र ग्रीनलैंड पर है।


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