
1990 के दशक में लालू यादव बिहार के कद्दावर नेता बनकर उभरे थे। (फोटो : एआई)
1995 का साल…बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आए और उसी के साथ बिहार की पॉलिटिक्स ने नए फॉर्मेट को जन्म दिया। चुनाव में अगड़ी जातियों के साथ पिछड़ी जातियों का प्रतिनिधित्व अचानक उभरने लगा। इलेक्शन में लालू यादव एक ऐसे राजनीतिक चरित्र के रूप में उभरे, जिन्होंने प्रदेश की जातीय राजनीति को नए आयाम दिए। उनकी रणनीति ने बिहार की राजनीतिक धारा को पूरी तरह से पलट दिया था। लेकिन इस बदलाव की सबसे रोचक गाथा लालू यादव की पत्नी राबड़ी देवी के व्यक्तिगत जीवन से जुड़ी है, जो इस राजनीतिक परिप्रेक्ष्य में ‘ईह’ से ‘साहेब’ बनने की यात्रा की कहानी है।
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