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5 साल में पूरी गीता कंठस्थ, 8 साल में 4000 सूत्र याद, अब बना रहे हैं टेक्नोलॉजी के प्रोजेक्ट, पढ़िए वृषवर्धन शर्मा की कहानी

9 साल के वृषवर्धन शर्मा ने छोटी उम्र में भगवद्गीता के 700 श्लोक और पाणिनि की अष्टाध्यायी के करीब 4000 सूत्र याद किए। लेकिन उनकी कहानी यहीं खत्म नहीं होती। उन्होंने खुद प्रोग्रामिंग सीखकर गीता का ऐसा ऐप भी बनाया जो बिना इंटरनेट के चलता है। आखिर कैसे इस बच्चे ने संस्कृत और तकनीक को एक साथ जोड़ा, आइए जानते हैं।
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Adarsh Thakur

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Sep 26, 2026

Vrishvardhan Sharma Story

सांकेतिक इमेजः ChatGPT

बेंगलुरु के 9 साल के वृषवर्धन शर्मा इन दिनों अपनी असाधारण स्मरण शक्ति और तकनीकी प्रतिभा के कारण चर्चा में हैं। उन्होंने महज 5 साल की उम्र में पूरी भगवद्गीता के 700 श्लोक याद कर लिए थे। इसके बाद 8 साल की उम्र तक उन्होंने पाणिनि की अष्टाध्यायी के करीब 4000 सूत्र और अमरकोश भी कंठस्थ कर लिया। खास बात यह है कि संस्कृत के इन ग्रंथों को याद करने के साथ उन्होंने तकनीक का इस्तेमाल भी सीखा और भगवद्गीता पर आधारित अपना ऑफलाइन ऐप तैयार किया।

5 साल की उम्र में याद की पूरी गीता

वृषवर्धन ने स्वयं अध्ययन के जरिए 5 साल की उम्र में भगवद्गीता के सभी 700 श्लोक याद किए। इसके बाद उन्होंने नियमित रूप से गीता पाठ जारी रखा। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह हर सुबह 6 अध्यायों का पाठ करते हैं और श्लोकों के व्याकरणिक पक्ष को भी समझने की कोशिश करते हैं। उन्होंने पूरी गीता को 11 भारतीय लिपियों में हाथ से लिखने का प्रोजेक्ट भी किया है।

8 साल की उम्र में याद किए 4000 सूत्र

वृषवर्धन की सबसे उल्लेखनीय उपलब्धियों में पाणिनि की अष्टाध्यायी का अध्ययन शामिल है। अष्टाध्यायी संस्कृत व्याकरण की एक महत्वपूर्ण प्राचीन रचना है, जिसमें करीब 4000 सूत्र हैं।

मार्च 2026 में कांचीपुरम में हुए 63वें अखिल भारतीय शास्त्रोत्सव में उन्होंने अष्टाध्यायी कंठपाठ वर्ग में पहला स्थान हासिल किया। रिपोर्ट के अनुसार इस प्रतियोगिता में उनके सामने 18 से 25 साल की उम्र के प्रतिभागी भी थे। इससे पहले वह 2024 में अयोध्या और 2025 में हरिद्वार में राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में रजत पदक हासिल कर चुके हैं।

संस्कृत के साथ सीखी प्रोग्रामिंग

वृषवर्धन की कहानी केवल संस्कृत तक सीमित नहीं है। उन्होंने Python और C जैसी प्रोग्रामिंग भाषाएं भी स्वयं सीखीं। इसके बाद उन्होंने उन ग्रंथों के लिए डिजिटल साधन बनाने शुरू किए जिन्हें वह खुद पढ़ते और याद करते थे।

उनका प्रमुख प्रोजेक्ट GitaVardhan (गीता-वर्धन) है। आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार इस ऐप में पूरी भगवद्गीता 13 भारतीय भाषाओं में उपलब्ध है। इसमें हर श्लोक का ऑडियो पाठ वृषवर्धन की अपनी आवाज में है। ऐप में आदि शंकराचार्य और रामानुजाचार्य की टीकाएं तथा संस्कृत के श्लोकों का अंग्रेजी व्याकरण विश्लेषण भी दिया गया है।

इंटरनेट के बिना भी चलता है ऐप

GitaVardhan की खासियत यह है कि इसे इस्तेमाल करने के लिए इंटरनेट कनेक्शन की जरूरत नहीं है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार ऐप में विज्ञापन, ट्रैकर या सब्सक्रिप्शन नहीं है और इसे मुफ्त में इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें गीता के श्लोक याद करने के लिए अलग अभ्यास मोड भी दिया गया है।

वृषवर्धन ने केवल ऐप तक खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने छोटे ऑफलाइन गीता रीडर डिवाइस भी बनाए हैं। इन उपकरणों में ESP32 माइक्रोकंट्रोलर, माइक्रोफोन, एम्पलीफायर और डिस्प्ले जैसे हार्डवेयर का इस्तेमाल किया गया है। इनके अलग-अलग संस्करण ई इंक स्क्रीन और टचस्क्रीन के साथ बनाए गए हैं।

संस्कृत और आधुनिक तकनीक को जोड़ा

वृषवर्धन की कहानी का खास पहलू यह है कि उन्होंने प्राचीन ग्रंथों के अध्ययन को आधुनिक तकनीक से जोड़ने की कोशिश की। उनके आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार उन्होंने कई ऐप और डिवाइस बनाए हैं। इनमें भारतीय भाषाओं को सीखने से जुड़े प्रोजेक्ट भी शामिल हैं।

उनकी उपलब्धियों को विभिन्न मंचों पर पहचान भी मिली है। उन्हें राष्ट्रीय स्तर की संस्कृत प्रतियोगिताओं में पुरस्कार मिले हैं और संस्कृत से जुड़े कार्यक्रमों में भी शामिल किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने अपनी पढ़ाई और तकनीकी प्रोजेक्ट दोनों को साथ आगे बढ़ाया है।