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दुनिया के सर्फिंग स्वर्ग पर खतरा: जलवायु परिवर्तन की चपेट में मशहूर ‘सर्फिंग स्पॉट’, 89 फीसदी स्थलों पर गंभीर संकट

पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन का दंश झेल रही है। अब फेमस 'सर्फिंग स्पॉट' भी जलवायु परिवर्तन की चपेट में हैं। समुद्र का बढ़ता जलस्तर, तटीय कटाव और समुद्र तटों की प्राकृतिक बनावट में बदलाव दुनिया के कई प्रमुख सर्फिंग स्थलों के अस्तित्व के लिए खतरा बन रहे हैं।
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भारत

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Vinay Shakya

•

Oct 10, 2026

Climate change impact on surfing spots

सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)

जलवायु परिवर्तन का दंश इस साल दुनिया खूब झेल रही है। मूसलाधार बारिश, हिमस्खलन और तूफान जैसी प्राकृतिक आपदाओं ने लोगों की मुश्किलों को बढ़ाया है। इसका असर अब दुनिया के उन समुद्री तटों पर भी पड़ने लगा है, जो अपनी शानदार लहरों के कारण सर्फिंग शौकीनों के बीच मशहूर हैं।

खतरें में प्रमुख सर्फिंग स्थलों का अस्तित्व

एक नए वैज्ञानिक अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि समुद्र का बढ़ता जलस्तर, तटीय कटाव और समुद्र तटों की प्राकृतिक बनावट में बदलाव दुनिया के कई प्रमुख सर्फिंग स्थलों के अस्तित्व के लिए खतरा बन रहे हैं। यह अध्ययन वैज्ञानिक पत्रिका 'क्लाइमेटिक चेंज' में प्रकाशित हुआ है।

वैज्ञानिकों ने 8 देशों के 57 प्रमुख सर्फिंग स्थलों की स्टडी की। ये सभी स्थल 'विश्व सर्फिंग रिजर्व नेटवर्क' में शामिल हैं। अध्ययन में पाया गया कि इन स्थलों की सुरक्षा और भविष्य की स्थिरता पर जलवायु परिवर्तन के साथ-साथ तटीय क्षेत्रों में मानवीय हस्तक्षेप का भी असर पड़ रहा है।

89 फीसदी सर्फिंग स्थलों पर अधिक खतरा

शोध के अनुसार, 89 प्रतिशत सर्फिंग स्थलों के सामने तटों की प्राकृतिक मजबूती और जलवायु संबंधी बदलावों से निपटने की क्षमता के लिहाज से मध्यम या उच्च जोखिम है। वहीं, 79 प्रतिशत स्थलों पर समुद्र का जलस्तर बढ़ने से मध्यम या उच्च स्तर का खतरा है। समुद्र तल की बनावट से जुड़ी संवेदनशीलता के मामले में भी 75 प्रतिशत स्थलों को मध्यम या उच्च जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया है।

इसमें लगभग 200 स्थानीय विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। शोधकर्ताओं ने सर्फिंग स्थलों की संवेदनशीलता का आकलन करने के लिए एक विशेष उपकरण का इस्तेमाल किया, जिसके जरिए समुद्र तल, ज्वार-भाटा, रेत और तलछट के प्रवाह तथा तटीय सुरक्षा जैसे पहलुओं का मूल्यांकन किया गया।

सर्फिंग के लिए उपयुक्त लहरें केवल समुद्र की ऊंचाई या हवा की गति पर निर्भर नहीं करतीं। समुद्र तल का आकार, तट पर मौजूद चट्टानें, रेत का वितरण, समुद्री धाराएं और लहरों की दिशा मिलकर किसी स्थान की विशिष्ट लहरें तैयार करते हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण इन परिस्थितियों में बदलाव आने से उन लहरों का स्वरूप भी बदल सकता है, जिनके लिए कोई समुद्री तट दुनिया भर में प्रसिद्ध है।

खतरे में दुनिया के कई सर्फिंग स्थल

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ब्रिटेन के क्रॉयड, ऑस्ट्रेलिया के नूसा और अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित सैंटा क्रूज जैसे प्रमुख सर्फिंग स्थलों पर भी खतरा मंडरा रहा है। इन स्थानों की पहचान केवल खेल के केंद्रों के रूप में नहीं, बल्कि स्थानीय संस्कृति, पर्यटन और रोजगार के महत्वपूर्ण आधार के रूप में भी है।

तटीय क्षेत्रों में समुद्र का बढ़ता जलस्तर और कटाव लंबे समय से चिंता का विषय रहे हैं। लेकिन समुद्र तटों पर दीवारें, सड़कें और दूसरी संरचनाएं बनाने से कई स्थानों की प्राकृतिक अनुकूलन क्षमता और कमजोर हो सकती है। समुद्र तटों तक रेत पहुंचाने वाली नदियों पर बांध बनने और तटीय भूभाग को कंक्रीट से ढकने के कारण भी रेत की प्राकृतिक आपूर्ति बाधित होती है।

कैलिफोर्निया का सैंटा क्रूज इसका एक उदाहरण है। यहां सर्फिंग से जुड़ी गतिविधियां स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इस शहर में सर्फिंग से सालाना लगभग 20 करोड़ डॉलर की आर्थिक गतिविधियां जुड़ी हैं। यदि समुद्र तटों और लहरों का स्वरूप बिगड़ता है, तो इसका असर पर्यटकों की संख्या, स्थानीय कारोबार और रोजगार पर पड़ सकता है।

शोधकर्ताओं का मानना है कि प्राकृतिक तट अपेक्षाकृत बेहतर तरीके से जलवायु संबंधी बदलावों का सामना कर सकते हैं। इसके विपरीत, जहां समुद्र तटों को कृत्रिम संरचनाओं से घेर दिया गया है, वहां तटीय कटाव और समुद्र के बढ़ते स्तर के प्रभाव अधिक गंभीर हो सकते हैं। अध्ययन में स्थानीय सर्फिंग समुदायों के अनुभवों को भी महत्वपूर्ण माना गया है। वर्षों से समुद्र में उतरने वाले सर्फर लहरों के व्यवहार, रेत की स्थिति और तटीय बदलावों को करीब से देखते रहे हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, उनके अनुभवों को वैज्ञानिक आंकड़ों के साथ जोड़कर जोखिमों का बेहतर आकलन किया जा सकता है।

सर्फिंग स्थलों को बचाने के उपाय

कुछ क्षेत्रों में सर्फिंग स्थलों की सुरक्षा के लिए कानूनी उपाय भी किए गए हैं। ऑस्ट्रेलिया के गोल्ड कोस्ट, न्यूजीलैंड और पेरू में सर्फिंग क्षेत्रों को संरक्षित करने के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए गए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि ऐसे उपायों को व्यापक तटीय नियोजन और जलवायु अनुकूलन रणनीतियों से जोड़ने की जरूरत है।

अध्ययन का निष्कर्ष है कि दुनिया के प्रसिद्ध सर्फिंग स्थलों को बचाने के लिए केवल समुद्र तटों पर निर्माण करके सुरक्षा देने की रणनीति पर्याप्त नहीं होगी। प्राकृतिक तटीय प्रक्रियाओं को बनाए रखना, समुद्र के बढ़ते स्तर के जोखिम का आकलन करना और स्थानीय समुदायों को संरक्षण योजनाओं में शामिल करना जरूरी है।