
Crop Insurance PMFBY : कैसे मिलता है फसल का योजना का लाभ, PC- Chatgpt
किसान की फसल बारिश, ओलावृष्टि, बाढ़, सूखा, तूफान या कीट-पतंगों से बर्बाद हो जाए तो सबसे बड़ा सवाल होता है, नुकसान की भरपाई कौन करेगा और किसान को पैसा कैसे मिलेगा?
यहां सबसे पहले एक जरूरी फर्क समझना होगा। फसल खराब होने पर किसान को मिलने वाली मदद मुख्य रूप से दो रास्तों से आ सकती है। फसल बीमा का दावा और सरकार की आपदा राहत। दोनों के नियम अलग हैं।
फसल बीमा में किसान पहले से बीमा करवाता है और नुकसान होने पर पॉलिसी के नियमों के मुताबिक दावा मिलता है। दूसरी तरफ प्राकृतिक आपदा की स्थिति में राज्य सरकार SDRF जैसे राहत कोष से निर्धारित मानकों के तहत सहायता दे सकती है। SDRF बाढ़, सूखा, ओलावृष्टि, चक्रवात, कीट हमला, पाला और कई अन्य अधिसूचित आपदाओं में तत्काल राहत के लिए इस्तेमाल होता है।
भारत में प्रमुख फसल बीमा योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना यानी PMFBY है। इसका उद्देश्य प्राकृतिक जोखिमों के कारण फसल खराब होने पर किसान की आय को सहारा देना है। इसमें सूखा, बाढ़, जलभराव, भूस्खलन, ओलावृष्टि, तूफान, चक्रवात, प्राकृतिक आग, बिजली गिरना, कीट और रोग जैसे जोखिम शामिल हो सकते हैं। योजना में बुवाई से लेकर कटाई के बाद तक कुछ परिस्थितियों में नुकसान का कवरेज दिया जाता है।
लेकिन हर फसल और हर नुकसान अपने-आप बीमा के दायरे में नहीं आता। राज्य को किसी फसल और क्षेत्र को योजना के तहत अधिसूचित करना होता है और उसी के अनुसार कवरेज तय होता है।
PMFBY में किसान के हिस्से का प्रीमियम सीमित रखा गया है।
| फसल/मौसम | किसान का अधिकतम प्रीमियम |
|---|---|
| खरीफ खाद्यान्न और तिलहन | बीमित राशि का 2% |
| रबी खाद्यान्न और तिलहन | बीमित राशि का 1.5% |
| वार्षिक वाणिज्यिक/बागवानी फसल | बीमित राशि का 5% |
किसान का प्रीमियम संबंधित बीमित राशि पर तय होता है। वास्तविक बीमित राशि राज्य और अधिसूचित फसल के लिए निर्धारित Scale of Finance आदि के आधार पर तय होती है। बाकी प्रीमियम में सरकार की सब्सिडी होती है।
आसान उदाहरण
सबसे जरूरी है कि किसान नुकसान की सूचना समय पर दे। PMFBY के तहत स्थानीय आपदा और कटाई के बाद होने वाले निर्धारित नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देनी होती है। सूचना बीमा कंपनी, बैंक, स्थानीय कृषि विभाग/जिला अधिकारियों या निर्धारित माध्यम से दी जा सकती है। PMFBY की वेबसाइट पर फसल नुकसान की सूचना और शिकायत के लिए 14447 हेल्पलाइन भी उपलब्ध है।
बीमा पॉलिसी/नामांकन की जानकारी
बैंक खाता
फसल और बोए गए क्षेत्र की जानकारी
खेत/सर्वे नंबर
नुकसान की तारीख
नुकसान की तस्वीरें और वीडियो
संबंधित बैंक/बीमा कंपनी/कृषि विभाग को दी गई सूचना का रिकॉर्ड
समय पर सूचना देना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि स्थानीय स्तर पर नुकसान का निरीक्षण और आकलन किया जाता है।
यह इस बात पर निर्भर करता है कि नुकसान व्यापक क्षेत्र में हुआ है या किसी एक खेत में।
बड़े क्षेत्र में फसल खराब : अगर किसी अधिसूचित क्षेत्र में व्यापक नुकसान हुआ है तो PMFBY में फसल की उपज का आकलन Crop Cutting Experiments यानी CCE जैसी प्रक्रिया से किया जाता है। वास्तविक उपज की तुलना उस क्षेत्र की निर्धारित Threshold Yield से की जाती है। उपज में कमी के आधार पर बीमा दावा तय किया जाता है।
स्थानीय आपदा : अगर ओलावृष्टि, जलभराव या भूस्खलन जैसी घटना से किसी किसान के खेत को स्थानीय स्तर पर नुकसान हुआ है तो व्यक्तिगत खेत का सर्वे किया जा सकता है। राज्य कृषि विभाग और बीमा कंपनी की टीम संयुक्त रूप से नुकसान का आकलन कर सकती है।
कटाई के बाद नुकसान : कटाई के बाद खेत में सुखाने के लिए रखी फसल भी कुछ परिस्थितियों में बीमा के दायरे में आती है। PMFBY के तहत निर्धारित फसलों में कटाई के बाद अधिकतम 14 दिनों तक खेत में ‘कट एंड स्प्रेड’ या छोटे बंडल के रूप में सुखाने के दौरान चक्रवाती बारिश, चक्रवात या बेमौसम बारिश से हुए नुकसान को कवर किया जा सकता है।
नहीं। यही सबसे महत्वपूर्ण बात है। बीमा तभी मिलेगा जब-
उदाहरण के लिए PMFBY में युद्ध, परमाणु जोखिम, दंगा, चोरी और कुछ अन्य निर्धारित परिस्थितियां बीमा कवरेज से बाहर हैं।
कुछ परिस्थितियों में हां। यह फसल बीमा से अलग व्यवस्था है। प्राकृतिक आपदा के दौरान राज्य सरकार SDRF से निर्धारित मानकों के अनुसार तत्काल राहत दे सकती है। केंद्र सरकार गंभीर आपदा की स्थिति में NDRF के जरिए राज्य को अतिरिक्त सहायता दे सकती है।
लेकिन इसे फसल बीमा का विकल्प नहीं समझना चाहिए। सरकार की आपदा राहत में सहायता की राशि और पात्रता केंद्र के निर्धारित मानकों तथा राज्य की प्रक्रिया के अनुसार तय होती है। इसलिए किसी भी किसान को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि फसल का पूरा बाजार मूल्य सरकार वापस देगी।
कम प्रीमियम में बड़ा जोखिम कवर : किसान को निर्धारित अधिकतम दरों के अनुसार अपेक्षाकृत कम प्रीमियम देना होता है, जबकि बीमा राशि काफी अधिक हो सकती है।
प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षा : सूखा, बाढ़, ओलावृष्टि, तूफान, कीट और रोग जैसे जोखिमों से होने वाले नुकसान के खिलाफ सुरक्षा मिलती है।
कटाई के बाद भी कुछ सुरक्षा : निर्धारित परिस्थितियों में कटाई के बाद खेत में सुखाई जा रही फसल को भी सीमित अवधि के लिए कवरेज मिलता है।
किसान की आय को स्थिर रखने में मदद : फसल खराब होने पर पूरा आर्थिक झटका किसान को अकेले नहीं उठाना पड़ता। PMFBY का मूल उद्देश्य भी फसल नुकसान से प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता देकर उनकी आय को स्थिर करने में मदद करना है। सबसे जरूरी बात: बीमा और सरकारी मुआवजा एक नहीं हैं।
| स्थिति | मदद का रास्ता |
|---|---|
| किसान ने PMFBY लिया और बीमित जोखिम से फसल खराब हुई | फसल बीमा दावा |
| बड़े क्षेत्र में अधिसूचित प्राकृतिक आपदा | PMFBY के तहत उपज आधारित दावा, नियमों के अनुसार |
| ओलावृष्टि/जलभराव जैसी स्थानीय आपदा | व्यक्तिगत नुकसान का आकलन, पात्रता के अनुसार |
| कटाई के बाद खेत में सुखाई जा रही फसल को निर्धारित आपदा से नुकसान | PMFBY में सीमित कवरेज, नियमों के अनुसार |
| किसान का बीमा नहीं है और प्राकृतिक आपदा घोषित/पात्र है | SDRF/NDRF आधारित राहत, निर्धारित मानकों के अनुसार |
फसल बर्बाद होने के बाद सबसे पहली गलती देर करना हो सकती है। अगर किसान PMFBY के तहत बीमित है और नुकसान स्थानीय आपदा या निर्धारित कटाई-बाद नुकसान की श्रेणी में आता है तो 72 घंटे के भीतर सूचना देना बेहद महत्वपूर्ण है। इसके बाद नुकसान का आकलन, बीमा की पात्रता और दावा राशि नियमों के अनुसार तय होती है।
यानी फसल खराब होने पर सरकार से मिलने वाली रकम कोई एक तय 'मुआवजा राशि' नहीं है। किसान को कितना पैसा मिलेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि कौन-सी फसल थी, कितनी जमीन बीमित थी, नुकसान किस वजह से हुआ, क्षेत्र अधिसूचित था या नहीं और नुकसान का आकलन कितना हुआ।
इसलिए किसान के लिए सबसे सुरक्षित तरीका है। फसल की शुरुआत में सही बीमा कराना और नुकसान होते ही समय पर सूचना देना।
Updated on:
23 Aug 2026 03:49 pm
Published on:
23 Aug 2026 03:49 pm
