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ड्रोन और मिसाइलें शांत; अब ईरान-अमेरिका में चल रहा ‘साइलेंट वार’

अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव की वजह से पूरे मिडिल ईस्ट की स्थिति चिंताजनक है। ड्रोन और मिसाइल हमलों के बाद अमेरिका-ईरान के बीच 'साइलेंट वार' शुरू हो गया है।
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भारत

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Vinay Shakya

Aug 23, 2026

Iran and America war

सांकेतिक इमेज (सोर्स-Chatgpt)

अमेरिका-ईरान के बीच 28 फरवरी 2026 को शुरू हुई सैन्य कार्रवाई भले ही थम गई हो, लेकिन एक 'साइलेंट वार' अब भी जारी है। इस जंग में ड्रोन-मिसाइल की जगह इकोनामी और साइबर स्पेस मुख्य निशाना बन गए हैं। अमेरिका ने ईरान की समुद्री नाकाबंदी की है और सख्त आर्थिक प्रतिबंध लगा रहा है। दूसरी ओर ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को इस टकराव का चोकप्वाइंट बनाया है और साइबर स्पेस में समानांतर मोर्चा खोल रखा है।

युद्ध विराम चाहता है ईरान


ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बीते शुक्रवार को तेहरान में डॉक्टरों के एक कार्यक्रम में कहा कि अब युद्ध को समाप्त करना बेहतर है, क्योंकि ईरान ताकत और सम्मान की स्थिति में है। उन्होंने आगे कहा कि पूरी दुनिया ईरानी की जीत को मान्यता दे रही है। ईरानी समाचार एजेंसी ISNA के हवाले से यह बयान सामने आया।

पेजेश्कियन ने आरोप लगाया कि अमेरिका ने नियमों के विपरीत ईरान के स्कूलों, अस्पतालों और बुनियादी ढांचे पर हमला किया। उन्होंने चेतावनी दी है कि सेना और कमांडर आखिरी सांस तक देश की रक्षा के लिए तैयार हैं। यह बयान ऐसे समय आया जब जून 2026 में इस्लामाबाद में हुए 60-दिवसीय युद्धविराम समझौते की अवधि खत्म हो रही है और अमेरिका ने नए सख्त प्रतिबंधों का ऐलान किया है।

होर्मुज से निकलेंगे इराक के तेल टैंकर


IRNA की रिपोर्ट के अनुसार, बगदाद के लगातार अनुरोध पर ईरान ने कई इराकी तेल टैंकरों को होर्मुज जलमार्ग से गुजरने की विशेष अनुमति दे दी है। यह अनुमति ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाकर कालीबाफ की हालिया इराक यात्रा के दौरान बगदाद की मुख्य मांगों में शामिल थी।

इराकी राष्ट्रपति निजार अमेदी ने बगदाद डायलॉग सम्मेलन में कहा कि हाल के दिनों में ईरान ने इराकी तेल ले जाने वाले जहाजों का रास्ता आसान किया है, हालांकि पूरा मासला अब भी जटिल बना हुआ है। युद्ध शुरू होने से पहले इराक रोजाना करीब 40 लाख बैरल तेल का उत्पादन करता था, और होर्मुज बंद होने से सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में इराक शामिल रहा है।

ईरान-अमेरिका कैसे लड़ रहे साइलेंट वार?


28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के हमलों के साथ ही साइबर मोर्चा भी खुल गया। इजरायल ने ईरान की एक लोकप्रिय प्रार्थना एप और सरकारी प्रसारण चैनलों की प्रणाली में सेंध लगाई, जबकि IRNA, ISNA सहित कई प्रमुख समाचार वेबसाइटें हैक या ठप कर दी गईं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हैक की गई प्रार्थना एप के जरिए सैनिकों से हथियार डालने की अपील वाले संदेश भेजे गए। इसके बाद ईरान में देशव्यापी इंटरनेट कनेक्टिविटी लगभग ठप हो गई।

अमेरिकी जल प्रणालियों पर हमले


26-27 जुलाई 2026 को मिनेसोटा राज्य की 30 से अधिक नगरीय जल प्रणालियों पर समन्वित साइबर हमला हुआ, जिसकी पुष्टि प्लायमथ, साउथ सेंट पॉल सहित कई शहरों ने की। FBI, CISA और EPA की संयुक्त सलाह के अनुसार, हमलावरों ने प्रोग्रामेबल लॉजिक कंट्रोलर्स (PLC) को निशाना बनाकर पासवर्ड बदले और ऑपरेटरों को लॉक आउट किया। जांच एजेंसियों ने इसे प्रारंभिक तौर पर ईरान से जुड़े समूह से जोड़ा है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर किसी एक पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस दावे को खारिज करते हुए मिनेसोटा प्रशासन की खामी बताया। अगस्त की शुरुआत तक यह हमले करीब 12 अमेरिकी राज्यों तक फैल चुके थे।

सैन्यकर्मियों की लोकेशन ट्रैकिंग

ईरान ने युद्ध शुरू होने से पहले और शुरुआती दिनों में मोबाइल नेटवर्क के पुराने SS7 सिग्नलिंग प्रोटोकॉल की कमजोरियों का फायदा उठाकर इराक, बहरीन और खाड़ी के अन्य देशों में तैनात अमेरिकी सैन्यकर्मियों की लोकेशन पता लगाने की कोशिश की। शोध संगठन मोबाइल सर्विलांस मॉनिटर के अनुसार, यह गतिविधि विज्ञापन-तकनीक के जरिए फोन ट्रैकिंग के साथ भी जुड़ी थी।

ईरान की पुरानी साइबर रणनीति


अमेरिकी न्याय विभाग ने 19 अगस्त 2026 को एक नए अभियोग में तेहरान स्थित मबना इंस्टीट्यूट से जुड़े 17 ईरानी नागरिकों पर आरोप तय किए। विभाग के अनुसार 2013 से चल रहे इस अभियान में IRGC के लिए काम करते हुए 144 अमेरिकी विश्वविद्यालयों, 178 विदेशी विश्वविद्यालयों, करीब 42 अमेरिकी कंपनियों और 5 सरकारी एजेंसियों को निशाना बनाया गया, जिसमें करीब 31.5 टेराबाइट डेटा चुराया गया।

क्या AI से बढ़ेंगे साइबर हमले?


साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस ने हमलों की रफ्तार और पैमाना दोनों बढ़ा दिए हैं। जिससे सैन्य ढांचे, सरकारी संस्थानों और नागरिक सुविधाओं पर दबाव और बढ़ सकता है।