
वैज्ञानिकों को डायनासोर की करोड़ों साल पुरानी चाल के निशान मिले हैं। ( विजुअल: AI)
करीब 15 करोड़ साल पहले धरती पर घूमने वाले एक विशालकाय लंबी गर्दन वाले डायनासोर की चाल के ऐसे निशान मिले हैं, जो वैज्ञानिकों के लिए हैरान करने वाले हैं। द यूनिवर्सिटी ऑफ क्वींसलैंड की डायनासोर लैब के डॉ. एंथनी रोमिलियो के नेतृत्व वाली रिसर्च टीम ने अमेरिका के कोलोराडो में मिले सॉरोपॉड के 130 से ज्यादा जीवाश्म पदचिह्नों का बारीकी से अध्ययन किया। टीम में सैन डिएगो नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम के डॉ. पॉल सी. मर्फी समेत कई वैज्ञानिक शामिल थे।
रिसर्च में यह तथ्य सामने आया कि यह विशाल डायनासोर करीब 95.5 मीटर लंबे रास्ते पर चलते हुए लगभग पूरा चक्कर काट कर फिर अपनी मूल दिशा की ओर लौट गया था। पदचिह्नों में चाल की असमानता भी मिली, जिससे उसके लंगड़ा कर चलने या शरीर के एक तरफ झुकने की संभावना सामने आई है। यह अध्ययन जियोमैटिक्स में प्रकाशित हुआ है। शोध का शीर्षक "ट्रैक बाय ट्रैक: वेस्ट गोल्ड हिल डायनासोर ट्रैकसाइट पर सॉरोपॉड टर्निंग और लैटरलाइज्ड गैट का खुलासा" है। अध्ययन के प्रमुख लेखक डॉ. एंथोनी रोमिलियो और डॉ. सह-लेखक हैं। पॉल सी. मर्फी सहित अन्य बिल्डर शामिल हैं।
रिसर्च के अनुसार यह मामला अमेरिका के कोलोराडो में Ouray के पास स्थित West Gold Hill Dinosaur Tracksite का है। यहां चट्टानों में संरक्षित पदचिह्नों का एक लंबा और घुमावदार रास्ता मिला है। इसकी खास बात यह है कि डायनासोर सीधे रास्ते पर आगे बढ़ने के बजाय एक बड़े लूप में घूमता हुआ दिखाई देता है।
रिसर्च टीम ने करीब 95.5 मीटर लंबे इस ट्रैकवे का डिजिटल विश्लेषण किया। पहले इस स्थल पर 134 पदचिह्न दर्ज किए गए थे, लेकिन नए अध्ययन में 131 पदचिह्नों की पहचान स्पष्ट रूप से की गई। इन निशानों से पता चलता है कि डायनासोर ने चलते-चलते करीब 340 डिग्री का एंटी-क्लॉकवाइज मोड़ लिया। यानी उसने लगभग पूरा चक्कर काट लिया था।
वैज्ञानिकों के लिए यह इसलिए खास है क्योंकि इतने लंबे और लगातार सुरक्षित सॉरोपॉड ट्रैकवे बहुत कम मिलते हैं। इससे उन्हें सिर्फ यह पता नहीं चलता कि डायनासोर कहां गया, बल्कि यह भी समझने का मौका मिलता है कि वह चलते समय अपने शरीर और पैरों को कैसे संतुलित करता था।
डॉ. एंथनी रोमिलियो के मुताबिक, पदचिह्न यह तो साफ तौर पर दिखाते हैं कि डायनासोर एक दिशा में आगे बढ़ा, फिर घूमा और अंत में लगभग उसी दिशा में लौट आया। लेकिन उसने ऐसा क्यों किया, इसका पक्का जवाब फिलहाल वैज्ञानिकों के पास नहीं है। हो सकता है कि रास्ते में कोई बाधा रही हो। संभव है कि वह किसी खास जगह की ओर मुड़ा हो।
यह भी हो सकता है कि उसके व्यवहार से जुड़ी कोई ऐसी वजह रही हो, जिसे करोड़ों साल बाद सिर्फ पैरों के निशानों से समझना मुश्किल है। फिर भी यह ट्रैकवे वैज्ञानिकों को एक दुर्लभ मौका देता है। वे देख सकते हैं कि इतने विशाल शरीर वाला सॉरोपॉड अचानक और लगातार दिशा बदलते समय अपने कदमों को कैसे समायोजित करता था।
इस रिसर्च में सबसे अहम भूमिका ड्रोन फोटोग्राफी की रही। ट्रैकसाइट काफी बड़ा है और जमीन से इसके हर पदचिह्न को एक साथ देखना मुश्किल था। इसलिए रिसर्च टीम ने पूरे क्षेत्र की ड्रोन से हाई-रिजॉल्युशन तस्वीरें लीं। इन तस्वीरों को जोड़कर पूरे ट्रैकवे का 3D डिजिटल मॉडल तैयार किया गया। इसके बाद वैज्ञानिकों ने पदचिह्नों का मिलीमीटर स्तर तक डिजिटल विश्लेषण किया।
इस तकनीक ने वैज्ञानिकों को डायनासोर के हर कदम को क्रम से देखने का मौका दिया। यानि जहां पहले अलग-अलग हिस्सों के पदचिह्न देखकर अनुमान लगाया जाता था, वहीं अब पूरे रास्ते को एक साथ देखा जा सकता है।
रिसर्च का सबसे दिलचस्प हिस्सा डायनासोर की चाल से जुड़ा है। वैज्ञानिकों ने उसके बाएं और दाएं कदमों की लंबाई में लगातार अंतर पाया। कुछ मापों में दोनों दिशाओं के कदमों के बीच करीब 10 सेंटीमीटर का फर्क सामने आया।
रिसर्च के अनुसार डायनासोर के बांये से दांये और दांये से बांये पड़ने वाले कदमों की औसत लंबाई भी अलग थी। अध्ययन में बांये से दांये पेस की औसत लंबाई करीब 0.944 मीटर, जबकि दांये से बांये करीब 0.858 मीटर दर्ज हुई। कदमों की लंबाई में भी इसी तरह अंतर देखा गया। यही असमानता वैज्ञानिकों का ध्यान खींच रही है।
यहीं से रिसर्च सबसे ज्यादा रोचक हो जाती है। डायनासोर के पैरों के निशानों में मिली असमानता यह संकेत दे सकती है कि डायनासोर की चाल सामान्य नहीं थी। संभव है कि वह किसी पैर पर थोड़ा कम भार डाल रहा हो या शरीर को एक तरफ झुकाकर चल रहा हो। वैज्ञानिक इसे सीधे तौर पर लंगड़ाना नहीं कह रहे हैं।
उनका कहना है कि यह अंतर लंगड़ाने की वजह से हो सकता है, लेकिन यह भी संभव है कि डायनासोर चलते समय स्वाभाविक रूप से शरीर के एक हिस्से की ओर ज्यादा झुकता रहा हो। यानि पदचिह्नों से संकेत तो मिलता है, लेकिन करोड़ों साल पुराने जानवर की चाल को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालना अभी संभव नहीं है।
रिसर्च में सिर्फ कदमों की लंबाई ही नहीं, बल्कि बाएं और दाएं पैरों के बीच की दूरी में भी बदलाव मिला। कुछ हिस्सों में डायनासोर के पैरों के निशान काफी करीब थे, जबकि कुछ हिस्सों में वे ज्यादा दूर-दूर दिखाई दिए। यह बदलाव बताता है कि चलते समय उसके पैरों की स्थिति हमेशा एक जैसी नहीं थी।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, अगर केवल ट्रैकवे के छोटे हिस्से का अध्ययन किया जाए तो डायनासोर की चाल के बारे में गलत तस्वीर बन सकती है। पूरे रास्ते के पदचिह्नों को साथ देखने पर ही उसके चलने के तरीके में मौजूद छोटे लेकिन लगातार बदलाव सामने आते हैं।
आमतौर पर डायनासोर के जीवाश्म पदचिह्नों से वैज्ञानिक उसकी चाल, कदमों की लंबाई और चलने की दिशा जैसी जानकारी हासिल करते हैं। लेकिन यह अध्ययन दिखाता है कि लंबे और लगातार ट्रैकवे इससे कहीं ज्यादा जानकारी दे सकते हैं। एक-एक पदचिह्न को क्रम से देखने पर शरीर के संतुलन, दिशा बदलने, कदमों की असमानता और चलने के पैटर्न में बदलाव जैसे संकेत भी मिल सकते हैं।
इस रिसर्च का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में डायनासोर के लंबे पदचिह्नों के कई ट्रैकवे मौजूद हैं। आधुनिक ड्रोन मैपिंग और 3D तकनीक से उनका दोबारा अध्ययन किया जाए तो वैज्ञानिकों को प्राचीन डायनासोर के व्यवहार से जुड़ी नई जानकारियां मिल सकती हैं।
करीब 15 करोड़ साल पहले का यह ट्रैकवे आज वैज्ञानिकों के लिए एक तरह का प्राकृतिक टाइम कैप्सूल बन गया है। डायनासोर का शरीर भले ही लंबे समय पहले खत्म हो गया, लेकिन उसके कदमों ने उसकी चाल का एक हिस्सा चट्टानों में सुरक्षित छोड़ दिया। अब ड्रोन, 3D मॉडलिंग और डिजिटल विश्लेषण जैसी आधुनिक तकनीक इन निशानों को पढ़ने में वैज्ञानिकों की मदद कर रही है।
सबसे बड़ा सवाल अभी भी यही है कि आखिर वह विशाल सॉरोपॉड इतना लंबा चक्कर लगाकर वापस अपनी दिशा में क्यों आया था। इसका जवाब शायद हमेशा रहस्य ही रहे, लेकिन उसके पदचिह्नों ने यह जरूर बता दिया है कि 15 करोड़ साल पहले एक विशाल डायनासोर कैसे चलता था और उसकी चाल में कुछ असामान्य जरूर था।
Updated on:
11 Aug 2026 08:26 pm
Published on:
11 Aug 2026 08:00 pm
