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डायरेक्ट V/S रेगुलर म्यूचुअल फंड, निवेश की दुनिया समझें और जानिए कौन सा आपके लिए सही है?

Investment Tips: पहली बार निवेश करने जा रहे हैं, लेकिन कन्फ्यूज्ड हैं, तो यहां जानिए आखिर निवेश का सही सलेक्शन क्यों जरूरी? डायरेक्ट और रेगुलर म्युचुअल फंड में छिपी है एक ऐसी मिस्ट्री जो या तो आपको बम्पर कमाई देगी या फिर आपकी मेहनत की कमाई को डुबो देगी, जानिए आखिर कैसे चुनें सही निवेश?
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भारत

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Sanjana Kumar

Aug 26, 2026

Investment tips direct vs mutual fund

Investment tips direct vs mutual fund: AI creative

Investment Tips: ली बार निवेश करने जा रहे हैं, लेकिन कन्फ्यूज्ड हैं, तो यहां जानिए आखिर निवेश का सही सलेक्शन क्यों जरूरी? डायरेक्ट और रेगुलर म्युचुअल फंड में छिपी है एक ऐसी मिस्ट्री जो या तो आपको बम्पर कमाई देगी या फिर आपकी मेहनत की कमाई को डुबो देगी, जानिए आखिर कैसे चुनें सही निवेश?

निवेश की दुनिया में अक्सर यह सवाल उठता है कि डायरेक्ट म्यूचुअल फंड बेहतर है या रेगुलर? दोनों एक ही स्कीम के हिस्से होते हैं, लेकिन खर्च और सुविधा में अंतर होने से आपके निवेश पर असर पड़ता है। आइए सरल भाषा में समझते हैं कि आपके लिए कौन सा विकल्प उपयुक्त हो सकता है।

डायरेक्ट और रेगुलर प्लान में क्या अंतर है

दोनों प्लान एक ही फंड, एक ही मैनेजर और एक ही पोर्टफोलियो से जुड़े होते हैं, लेकिन खर्च (एक्सपेंस रेशियो) में अंतर होता है। डायरेक्ट प्लान में कोई ब्रोकर या एजेंट नहीं होता, इसलिए इसमें कमीशन नहीं जुड़ता और खर्च कम होता है। रेगुलर प्लान में यह कमीशन शामिल होता है, जिससे खर्च बढ़ जाता है। डायरेक्ट प्लान की एनएवी (नेट एसेट वैल्यू) रेगुलर की तुलना में थोड़ी अधिक होती है, क्योंकि खर्च कम होने से रिटर्न में सुधार होता है।

लंबी अवधि में खर्च का असर

शुरुआत में 0.5%–1% का खर्च का अंतर मामूली लगता है, लेकिन समय के साथ यह अंतर लाखों रुपये में बदल सकता है। उदाहरण के लिए, 10,000 रुपए मासिक एसआईपी पर 12% ग्रॉस रिटर्न मानते हुए-

  • यदि डायरेक्ट प्लान का खर्च 0.5% और रेगुलर का 1.5% हो, तो 20 साल बाद डायरेक्ट में लगभग 91.6 लाख और रेगुलर में 76.3 लाख हो सकते हैं। यानी लगभग 15 लाख का अंतर।
  • इसी तरह, 25 साल में 1.2% खर्च का अंतर 32.8 लाख तक पहुंच सकता है।
  • एक अन्य उदाहरण में, डायरेक्ट (1%) और रेगुलर (2%) के बीच 30 साल में 44.9 लाख का अंतर दिखाया गया है।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि लंबी अवधि में खर्च का छोटा अंतर भी आपके फंड की वृद्धि में बड़ा असर डाल सकता है।

कौन सा विकल्प आपके लिए बेहतर?

यह आपकी जरूरतों और स्थिति पर डिपेंड करता है

डायरेक्ट प्लान आपके लिए उपयुक्त है यदि:

  • आप निवेश के बारे में स्वयं निर्णय लेने में सक्षम हैं।
  • आप ऑनलाइन प्लेटफॉर्म या एएमसी की वेबसाइट से निवेश कर सकते हैं।
  • आप खर्च कम करके अधिक रिटर्न पाना चाहते हैं।

रेगुलर प्लान आपके लिए बेहतर हो सकता है यदि

  • आप नए निवेशक हैं और मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
  • आप किसी वितरक, बैंक या सलाहकार की मदद लेना चाहते हैं।
  • आपको निवेश प्रक्रिया में सहायता और सलाह चाहिए।

निवेशक को किन बातों का ध्यान रखना जरूरी

  • अपने स्टेटमेंट या सीएएस (कंसोलिडेटेड अकाउंट स्टेटमेंट) में स्कीम का पूरा नाम देखें- 'Direct' लिखा है या नहीं, यह बताता है कि आप कौन सा प्लान होल्ड कर रहे हैं।
  • यदि आप रेगुलर से डायरेक्ट में स्विच करना चाहते हैं, तो टैक्स और एग्जिट लोड पर ध्यान दें। बड़े निवेश के लिए इसे धीरे-धीरे करना बेहतर हो सकता है।
  • डायरेक्ट प्लान में निवेश करने के लिए एएमसी की वेबसाइट, एमएफयू या स्टॉक एक्सचेंज प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं।

इसे ऐसे समझें

पहलूडायरेक्ट प्लानरेगुलर प्लान
खर्च (एक्सपेंस रेशियो)कम (कोई कमीशन नहीं)अधिक (वितरक कमीशन शामिल)
रिटर्न क्षमताअधिक (कंपाउंडिंग का लाभ)कम (खर्च रिटर्न घटाता है)
खरीदने का तरीकासीधे एएमसी या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म सेबैंक, वितरक या सलाहकार के माध्यम से
किसके लिए बेहतर?अनुभवी, स्वयं निवेश करने वाले निवेशकनए या मार्गदर्शन चाहने वाले निवेशक

यदि आप निवेश के बारे में समझ रखते हैं और खर्च कम करके लंबी अवधि में अधिक रिटर्न चाहते हैं, तो डायरेक्ट प्लान आपके लिए बेहतर हो सकता है। वहीं, यदि आप नए हैं या मार्गदर्शन चाहते हैं, तो रेगुलर प्लान सुविधाजनक विकल्प हो सकता है। लेकिन याद रखें—लंबी अवधि में खर्च का छोटा अंतर भी आपके फंड को लाखों रुपये तक प्रभावित कर सकता है। इसलिए अपनी जरूरत, समय और समझ के अनुसार सही विकल्प चुनें।

तो निवेश से पहले अपने वर्तमान निवेश की योजना और खर्च की समीक्षा करें और यदि संभव हो तो धीरे-धीरे डायरेक्ट प्लान में स्विच करने पर विचार करें। लेकिन टैक्स और एग्जिट लोड को ध्यान में रखते हुए।