
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
दुनिया की जनसांख्यिकी में एक ऐतिहासिक बदलाव सामने आया है। अमरीकी जनगणना ब्यूरो की नई रिपोर्ट "एन एजिंग वर्ल्ड: 2025" के मुताबिक, मानव इतिहास में पहली बार दुनिया में 65 साल या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों की संख्या 5 साल तक के बच्चों से ज्यादा हो गई है। यह रिपोर्ट अमरीका के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग के सहयोग से तैयार की गई और अगस्त 2026 के अंत में जारी हुई, जिसका सार जनगणना ब्यूरो ने 3 सितंबर 2026 को सार्वजनिक किया।
अमरीकी जनगणना ब्यूरो की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में दुनिया की कुल आबादी में 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी 10.5% (करीब 85.2 करोड़ लोग) तक पहुंच गई, जो पांच साल तक के बच्चों की हिस्सेदारी से ज्यादा है। जनगणना ब्यूरो के डेमोग्राफरों के मुताबिक, उम्र के इन दो समूहों के बीच यह "क्रॉसिंग" इंसानी इतिहास में पहली बार हुई है।
आने वाले वर्षों में यह अंतर और तेजी से बढ़ने वाला है। विशेषज्ञों के मुताबिक इसकी दो बड़ी वजह हैं। पहली वजह है कि दुनिया भर में घटती जन्म दर और दूसरी वजह है लोगों की बढ़ती औसत उम्र। बीसवीं सदी के मध्य में जन्मी सबसे बड़ी पीढ़ी (1960 से 1995 के बीच जन्मे लोग) अब बुढ़ापे की ओर बढ़ रही है और पहले से ज्यादा लंबी उम्र जी रही है, जिससे बुजुर्गों की तादाद तेजी से बढ़ रही है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2023 तक दुनिया की करीब 71% आबादी ऐसे देशों में रह रही थी, जहां प्रति महिला औसतन जन्म दर 2.1 या उससे कम थी। यानी आबादी को लंबे समय तक स्थिर बनाए रखने के लिए जरूरी न्यूनतम स्तर से भी कम। एक दशक पहले यह आंकड़ा करीब 45% था।
अमरीकी जनगणना ब्यूरो ने आगाह किया है कि लगातार कम जन्म दर एक "फर्टिलिटी ट्रैप" यानी प्रजनन-जाल की स्थिति पैदा कर सकती है, क्योंकि भविष्य में मां-बाप बनने वालों की संख्या खुद ही घटती चली जाएगी। भारत, चीन, बांग्लादेश और वियतनाम समेत दुनिया के कई सबसे ज्यादा आबादी वाले देशों में भी जन्म दर अब इसी बदलाव-स्तर के आसपास या उससे नीचे पहुंच चुकी है।
रिपोर्ट के अनुमान के मुताबिक, 2060 तक दुनिया की कुल आबादी मौजूदा 8.13 अरब से बढ़कर करीब 10.23 अरब हो जाएगी। इसी दौरान 65 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों की संख्या 85.2 करोड़ से बढ़कर करीब 2 अरब तक पहुंच सकती है। यानी करीब 135% की बढ़ोत्तरी, जो दुनिया की कुल आबादी वृद्धि का आधे से ज्यादा हिस्सा होगी। इसका मतलब है कि 2060 तक दुनिया में हर 5 में से करीब एक व्यक्ति बुजुर्ग होगा, जबकि आज यह अनुपात करीब दस में एक है।
बुजुर्ग आबादी के मामले में जापान दुनिया में सबसे आगे है। वहां करीब 30% आबादी 65 साल या उससे अधिक उम्र की है, जिससे वह दुनिया का सबसे "सुपर-एज्ड" समाज बन चुका है। दूसरी तरफ चीन की आबादी लगातार चौथे साल सिकुड़ी है। चीन के राष्ट्रीय सांख्यिकी ब्यूरो के जनवरी 2026 में जारी आंकड़ों के मुताबिक, 2025 में वहां सिर्फ 79.2 लाख बच्चे पैदा हुए, जिससे जन्म दर घटकर प्रति हजार आबादी पर 5.63 पर आ गई है।
यह 1949 में आंकड़े रखे जाने की शुरुआत के बाद से अब तक का सबसे निचला स्तर है। इसी दौरान चीन की कुल आबादी करीब 33.9 लाख घटकर 1.405 अरब रह गई, जो लगातार चौथे साल की गिरावट है।
अमरीका फिलहाल दुनिया के 227 देशों में 48वां सबसे बुजुर्ग देश है, जहां की करीब 18.9% आबादी 65 वर्ष या उससे अधिक उम्र की है। जनगणना ब्यूरो के मुताबिक 2060 तक यह हिस्सेदारी बढ़कर 23.4% हो सकती है, लेकिन अन्य देशों की तेज रफ्तार के चलते अमरीका की वैश्विक रैंकिंग तब तक गिरकर 110वें स्थान पर आ सकती है।
अफ्रीका अब भी दुनिया का सबसे युवा महाद्वीप बना हुआ है, लेकिन वहां भी बुजुर्गों की संख्या तेजी से बढ़ने का अनुमान है। रिपोर्ट के अनुसार, अफ्रीका में 65 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों की संख्या 2025 के करीब 6 करोड़ से बढ़कर 2060 तक 24.9 करोड़ तक पहुंच सकती है। यानी चार गुना से भी ज्यादा बढ़ोत्तरी, जिससे वह यूरोप की अनुमानित 21.4 करोड़ की बुजुर्ग आबादी को भी पीछे छोड़ सकता है। इसके उलट, एशिया में यह संख्या 2025 के 48.7 करोड़ से बढ़कर 2060 तक करीब 1.24 अरब हो सकती है, जो दुनिया भर में बुजुर्ग आबादी की कुल बढ़ोत्तरी का करीब दो-तिहाई हिस्सा होगी।
विशेषज्ञों की चिंता है कि बुजुर्गों की तेजी से बढ़ती आबादी और घटती कामकाजी उम्र की आबादी के चलते दुनिया भर के देशों में पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा तंत्र पर भारी दबाव पड़ सकता है। यूरोप, जो पहले से ही दुनिया का सबसे बुजुर्ग महाद्वीप है, वहां 65 साल या उससे अधिक उम्र के लोगों की हिस्सेदारी मौजूदा करीब 21% से बढ़कर 2060 तक लगभग 31% तक पहुंचने का अनुमान है।
Updated on:
07 Sept 2026 07:28 pm
Published on:
07 Sept 2026 07:28 pm
