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ब्रेन हेल्थ इन ओल्ड एज: उम्र के साथ याददाश्त को रखें चुस्त; जानिए बुजुर्गों के लिए एक्टिव ब्रेन के असरदार उपाय

बढ़ती उम्र में दिमाग को तेज और सक्रिय कैसे रखें? जानिए WHO की नई गाइडलाइन्स, मानसिक व्यायाम और सही लाइफस्टाइल के जरिए डिमेंशिया और याददाश्त की कमजोरी से बचने के आसान उपाय।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 24, 2026

Age

60 के बाद भी सुपर एक्टिव रहेगा दिमाग (AI)

उम्र का बढ़ना एक स्वाभाविक जैविक प्रक्रिया है, लेकिन बढ़ती उम्र के साथ याददाश्त का कमजोर होना या मानसिक क्षमताओं का घटना अनिवार्य नहीं है। आज के समय में बुजुर्गों के मानसिक स्वास्थ्य और 'कॉग्निटिव हेल्थ' (संज्ञानात्मक स्वास्थ्य) पर वैश्विक स्तर पर गहन विमर्श हो रहा है। तेज और सक्रिय दिमाग केवल पुरानी बातों को याद रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के स्वाभिमान, निर्णय लेने की क्षमता, दैनिक आत्मनिर्भरता और समग्र जीवन की गुणवत्ता का मूल आधार है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की हालिया रिपोर्ट और दिशानिर्देश इस बात की पुष्टि करते हैं कि मस्तिष्क की दुर्बलता, अल्जाइमर और डिमेंशिया (मनोभ्रंश) के लगभग 40 प्रतिशत मामलों को जीवनशैली में सकारात्मक बदलाव लाकर रोका या टाला जा सकता है। इसका सीधा अर्थ है कि हमारी दैनिक आदतें, खानपान, सामाजिक दायरा और शारीरिक सक्रियता हमारे मस्तिष्क की उम्र तय करने में सबसे बड़ी भूमिका निभाते हैं।

मस्तिष्क का विज्ञान: न्यूरोप्लास्टिसिटी और बीडीएनएफ (BDNF)

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से हमारा मस्तिष्क जीवन भर नई कोशिकाएं बनाने और नए न्यूरल कनेक्शन स्थापित करने की क्षमता रखता है, जिसे 'न्यूरोप्लास्टिसिटी' कहा जाता है। जब बुजुर्ग शारीरिक या मानसिक रूप से सक्रिय रहते हैं, तो मस्तिष्क में ब्रेन-डिराइव्ड न्यूरोट्रॉफिक फैक्टर (BDNF) नामक एक विशेष प्रोटीन का स्राव बढ़ता है।

यह प्रोटीन मस्तिष्क के न्यूरॉन्स को न केवल स्वस्थ रखता है, बल्कि क्षतिग्रस्त कोशिकाओं की मरम्मत और नए संपर्कों के निर्माण में भी मदद करता है। इसके विपरीत, लंबे समय तक निष्क्रिय रहने से मस्तिष्क के हिप्पोकैम्पस (याददाश्त का केंद्र) का आकार घटने लगता है, जिससे भूलने की समस्या शुरू होती है।

शारीरिक गतिविधि: दिमाग की सेहत का सबसे मजबूत आधार

डब्ल्यूएचओ (WHO) और भारत के प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों के दिशानिर्देशों के अनुसार, शारीरिक रूप से सक्रिय रहना मस्तिष्क के लिए सबसे प्रभावी टॉनिक है।

  • एरोबिक व्यायाम का नियम: बुजुर्गों को प्रति सप्ताह कम से कम 150 मिनट की मध्यम एरोबिक गतिविधि करनी चाहिए। इसे रोजाना 20 से 30 मिनट के तेज टहलने (Brisk Walk) के रूप में विभाजित किया जा सकता है।
  • रक्त संचार और ऑक्सीजन: जब शरीर गति में होता है, तो मस्तिष्क की ओर रक्त और ऑक्सीजन का प्रवाह तेजी से बढ़ता है, जो विषाक्त पदार्थों (टॉक्सिन्स) को बाहर निकालने में मदद करता है।
  • हल्की स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और योग: तैराकी, हल्का योग, प्राणायाम और कुर्सी पर बैठकर किए जाने वाले स्ट्रेचिंग व्यायाम शारीरिक संतुलन बनाए रखने के साथ-साथ तनाव के हार्मोन (कोर्टिसोल) को कम करते हैं।

मानसिक चुनौतियां: 'कॉग्निटिव ट्रेनिंग' से दिमाग को रखें चुस्त

जिस तरह मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए वजन उठाना पड़ता है, उसी तरह मस्तिष्क की मांसपेशियों को मजबूत रखने के लिए उसे नई चुनौतियां देनी जरूरी हैं।

  • पहेलियां और शब्दजाल: सुडोकू, वर्ग पहेली (Crosswords), शतरंज और ताश के रणनीतिक खेल मस्तिष्क के लॉजिकल और प्रॉब्लम-सॉल्विंग हिस्से को जगाए रखते हैं।
  • निरंतर सीखना: किसी नई भाषा के बुनियादी शब्द सीखना, कोई वाद्य यंत्र बजाने की कोशिश करना, या कंप्यूटर व स्मार्टफोन के नए फीचर्स को समझना दिमाग में नए न्यूरल पाथवे बनाता है।
  • पढ़ना और लिखना: नियमित रूप से अखबार, साहित्य पढ़ना और डायरी लिखना याददाश्त और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को बढ़ाता है।

सामाजिक जुड़ाव: अकेलापन है दिमाग का सबसे बड़ा दुश्मन

अमेरिकन एसोसिएशन ऑफ रिटायर्ड पर्सन्स (AARP) और विभिन्न वैश्विक अध्ययनों के अनुसार, सामाजिक अलगाव और अकेलापन बुजुर्गों में डिमेंशिया के जोखिम को लगभग 50 प्रतिशत तक बढ़ा देता है।

जब कोई व्यक्ति लंबे समय तक किसी से बातचीत नहीं करता, तो मस्तिष्क के सामाजिक और भावनात्मक केंद्र सुस्त पड़ जाते हैं। इसलिए

  • पारिवारिक संवाद: परिवार के सदस्यों, बच्चों और पोते-पोतियों के साथ नियमित बातचीत करें और अपने अनुभव साझा करें।
  • सामुदायिक गतिविधियां: पार्क में वरिष्ठ नागरिक समूहों, क्लबों, धार्मिक आयोजनों या समाज सेवा के कार्यक्रमों में सक्रिय भाग लें।
  • इंटरएक्टिव संवाद: फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से पुराने मित्रों और रिश्तेदारों के संपर्क में रहें।

पुरानी बीमारियों का प्रबंधन: दिल और दिमाग का गहरा नाता

'जो दिल के लिए अच्छा है, वह दिमाग के लिए भी अच्छा है' यह चिकित्सा विज्ञान का एक स्थापित नियम है। उच्च रक्तचाप (Hypertension), टाइप-2 डायबिटीज, और बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल मस्तिष्क की सूक्ष्म रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाते हैं।

जब मस्तिष्क को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता, तो 'वैस्कुलर डिमेंशिया' का खतरा बढ़ जाता है। इसलिए बुजुर्गों के लिए आवश्यक है कि वे:

  • रक्तचाप और ब्लड शुगर को नियंत्रित सीमाओं के भीतर रखें।
  • नमक, अत्यधिक चीनी और ट्रांस-फैट से युक्त प्रोसेस्ड भोजन से परहेज करें।
  • हरी पत्तेदार सब्जियां, अखरोट, बादाम, अलसी और मौसमी फलों से भरपूर संतुलित आहार लें।

नए उभरते जोखिम: वायु प्रदूषण और सुनने की क्षमता

हालिया वैज्ञानिक अनुसंधानों ने दो प्रमुख कारकों को मस्तिष्क स्वास्थ्य से सीधे जोड़ा है:

  • वायु प्रदूषण: हवा में मौजूद पीएम 2.5 जैसे सूक्ष्म कण सांस के जरिए रक्तप्रवाह में मिलकर मस्तिष्क में सूजन (न्यूरो-इन्फ्लेमेशन) पैदा करते हैं। अत्यधिक प्रदूषण वाले दिनों में बुजुर्गों को घर के अंदर रहना चाहिए या मॉर्निंग वॉक के समय में बदलाव करना चाहिए।
  • हियरिंग लॉस (सुनने में कमी): सुनने की क्षमता घटने पर बुजुर्ग अनजाने में बातचीत से कटने लगते हैं, जिससे सामाजिक अलगाव बढ़ता है और दिमाग को मिलने वाले इनपुट्स कम हो जाते हैं। नियमित रूप से कान की जांच कराना और आवश्यकता पड़ने पर 'हियरिंग एड' का उपयोग करना दिमाग को सक्रिय रखने के लिए अनिवार्य है।

सप्लीमेंट्स का भ्रम: स्वयं दवा लेने से बचें

बाजार में याददाश्त बढ़ाने के नाम पर बिकने वाले विभिन्न ब्रेन टॉनिक, मल्टीविटामिन, विटामिन बी-कॉम्प्लेक्स, विटामिन ई या ओमेगा-3 सप्लीमेंट्स के प्रति WHO ने स्पष्ट चेतावनी दी है। जब तक किसी प्रमाणित रक्त परीक्षण में शरीर के अंदर किसी खास विटामिन की कमी न पाई जाए और डॉक्टर उसकी सलाह न दें, तब तक किसी भी सप्लीमेंट का सेवन नहीं करना चाहिए। अनावश्यक सप्लीमेंट्स लिवर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव डालते हैं।

भारत में जांच और मूल्यांकन के साधन

भारत में बुजुर्गों की मानसिक स्थिति की सटीक जांच के लिए अब कई प्रामाणिक टूल्स उपलब्ध हैं। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने भारतीय संस्कृति और भाषाओं के अनुकूल ICMR-NCTB (न्यूरोकोग्नेटिव टूलबॉक्स) तैयार किया है। इसके अलावा, Addenbrooke’s Cognitive Examination (ACE) और NIMHANS न्यूरोसाइकोलॉजिकल बैटरी के माध्यम से माइल्ड कॉग्निटिव इम्पेयरमेंट (MCI) की शुरुआती अवस्था में ही पहचान की जा सकती है।

मस्तिष्क स्वास्थ्य प्रबंधन: तुलनात्मक अवलोकन

प्रमुख घटकआवश्यक गतिविधिमस्तिष्क पर सकारात्मक प्रभाव
शारीरिक व्यायाम150 मिनट/सप्ताह वॉक, योग या हल्की स्ट्रेचिंगबीडीएनएफ प्रोटीन में वृद्धि, बेहतर रक्त संचार
मानसिक व्यायामपहेलियां, किताबें पढ़ना, नई भाषा सीखनान्यूरल प्लास्टिसिटी और याददाश्त में मजबूती
सामाजिक दायरामित्रों से मिलना, पारिवारिक संवाद, क्लब्सअकेलापन दूर, डिमेंशिया का 50% तक कम जोखिम
क्रॉनिक डिजीज कंट्रोलबीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांचवैस्कुलर डिमेंशिया और स्ट्रोक से सुरक्षा
संवेदी सुरक्षाकान की जांच, प्रदूषण से बचावमानसिक अलगाव और न्यूरो-इन्फ्लेमेशन की रोकथाम
आहार और सप्लीमेंटप्राकृतिक पोषक तत्व, डॉक्टर की सलाह पर ही दवाअनावश्यक दुष्प्रभावों और टॉक्सिसिटी से बचाव

कब समझें कि डॉक्टर को दिखाने का समय आ गया है?

सामान्य भूलने की बीमारी (जैसे चाबी रखकर भूल जाना) और गंभीर संज्ञानात्मक गिरावट में अंतर होता है। यदि निम्नलिखित लक्षण लगातार दिखाई दें, तो तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट या साइकेट्रिस्ट से संपर्क करना चाहिए।

  • जाने-पहचाने रास्तों पर दिशा भूल जाना।
  • रोजमर्रा के सामान्य कार्यों (जैसे चाय बनाना या टीवी का रिमोट चलाना) में भारी उलझन होना।
  • बातचीत के दौरान सामान्य शब्दों को याद न कर पाना या बात बीच में ही भूल जाना।
  • तारीख, महीने, साल या समय का कोई अंदाजा न रहना।
  • स्वभाव में अत्यधिक चिड़चिड़ापन, अविश्वास, डिप्रेशन या अचानक गुस्सा आना।
  • बढ़ती उम्र में मस्तिष्क को सेहतमंद रखना किसी एक दिन का काम नहीं, बल्कि एक निरंतर चलने वाली जीवनशैली है। नियमित शारीरिक हलचल, नई चीजों को सीखने की उत्सुकता, अपनों का साथ और संतुलित स्वास्थ्य प्रबंधन इन चारों के समन्वय से जीवन के अंतिम पड़ाव तक मानसिक स्पष्टता और आत्मनिर्भरता को बनाए रखा जा सकता है।

(डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या, आहार परिवर्तन या दवा शुरू करने से पहले अपने चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।)