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भारत का सबसे बड़ा और सबसे छोटा एक्सप्रेस-वे क्यों बनाया गया? जानिए इनके पीछे की जरूरत

Longest Expressway in India : भारत का सबसे बड़ा दिल्ली–मुंबई और सबसे छोटा दुर्ग बाईपास एक्सप्रेस-वे क्यों बनाया गया? जानिए इनकी लंबाई, निर्माण के पीछे का कारण और देश के विकास में इनके महत्व की पूरी कहानी।
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Longest Expressway in India

Longest Expressway in India : कहां है देश का सबसे छोटा एक्सप्रेस-वे।

भारत में एक्सप्रेस-वे सिर्फ तेज रफ्तार सड़कें नहीं हैं, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार, उद्योग और क्षेत्रीय विकास को गति देने का माध्यम भी हैं। यही वजह है कि एक ओर 1,386 किलोमीटर लंबा दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे बनाया जा रहा है, तो दूसरी ओर केवल 18 किलोमीटर लंबा दुर्ग बाईपास एक्सप्रेस-वे भी अपने क्षेत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि दोनों परियोजनाओं की लंबाई में बहुत बड़ा अंतर है, लेकिन दोनों को बनाने की वजह एक ही है। यात्रा आसान करना, समय बचाना और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ाना।

देश का सबसे बड़ा एक्सप्रेस-वे: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे

  • लंबाई: 1,386 किलोमीटर
  • राज्य: दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र
  • निर्माण एजेंसी: NHAI
  • अनुमानित लागत: 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक
  • पूरा होने पर यह भारत का सबसे लंबा एक्सप्रेस-वे होगा।

दिल्ली और मुंबई भारत के दो सबसे बड़े आर्थिक केंद्र हैं। एक देश की राजनीतिक राजधानी है तो दूसरा वित्तीय राजधानी। दोनों शहरों के बीच हर दिन लाखों टन माल और हजारों वाहन आवाजाही करते हैं। लंबे समय तक यह पूरा दबाव मुख्य रूप से दिल्ली-मुंबई हाईवे (NH-48) पर रहा, जिसके कारण कई हिस्सों में जाम, देरी और लॉजिस्टिक्स लागत बढ़ने लगी।

इसी समस्या को देखते हुए एक ऐसे हाई-स्पीड कॉरिडोर की जरूरत महसूस हुई जो दोनों शहरों के बीच दूरी और समय को कम कर सके। दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे उसी जरूरत का परिणाम है।

इससे क्या बदलाव आएगा?

  • दिल्ली से मुंबई की यात्रा का समय लगभग आधा हो सकता है।
  • ट्रकों और मालवाहक वाहनों की आवाजाही तेज होगी।
  • ईंधन की खपत और परिवहन लागत कम होगी।
  • राजस्थान और मध्य प्रदेश के कई पिछड़े इलाकों को नई कनेक्टिविटी मिलेगी।
  • एक्सप्रेस-वे के किनारे औद्योगिक पार्क, वेयरहाउस और लॉजिस्टिक्स हब विकसित हो सकते हैं।

विशेषज्ञ मानते हैं कि यह परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण नहीं, बल्कि एक आर्थिक कॉरिडोर के रूप में काम करेगी। जिस तरह गोल्डन क्वाड्रिलेटरल ने देश के कई हिस्सों में विकास को गति दी थी, उसी तरह दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे भी नए निवेश और रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है।

देश का सबसे छोटा एक्सप्रेस-वे: दुर्ग बाईपास एक्सप्रेस-वे

  • लंबाई: लगभग 18 किलोमीटर
  • स्थान: दुर्ग-भिलाई-रायपुर क्षेत्र, छत्तीसगढ़
  • उद्देश्य: शहरी ट्रैफिक को कम करना और औद्योगिक परिवहन को सुगम बनाना

लंबाई भले ही केवल 18 किलोमीटर हो, लेकिन इसकी जरूरत किसी बड़े एक्सप्रेस-वे से कम नहीं थी। छत्तीसगढ़ का दुर्ग-भिलाई-रायपुर क्षेत्र राज्य का सबसे महत्वपूर्ण औद्योगिक और शहरी क्षेत्र माना जाता है। यहां भिलाई स्टील प्लांट सहित कई बड़े उद्योग मौजूद हैं।

समस्या यह थी कि लंबी दूरी के ट्रक और मालवाहक वाहन शहरों के भीतर से गुजरते थे। इससे जाम, प्रदूषण और दुर्घटनाओं की समस्या बढ़ती जा रही थी। स्थानीय लोगों और उद्योगों दोनों को इसका नुकसान उठाना पड़ रहा था।

इसी वजह से दुर्ग बाईपास एक्सप्रेस-वे का निर्माण किया गया, ताकि बाहरी यातायात को शहर के भीतर प्रवेश किए बिना आगे भेजा जा सके।

इससे क्या फायदा हुआ?

  • दुर्ग और भिलाई में ट्रैफिक का दबाव कम हुआ।
  • भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्ग मिला।
  • माल परिवहन की गति बढ़ी।
  • दुर्घटनाओं और प्रदूषण में कमी आई।
  • उद्योगों की सप्लाई चेन बेहतर हुई।

यह परियोजना दिखाती है कि किसी सड़क की उपयोगिता केवल उसकी लंबाई से नहीं, बल्कि उससे मिलने वाले लाभ से तय होती है।

तुलनादिल्ली–मुंबईदुर्ग बाईपास
लंबाई1,386 किमी18 किमी
फोकसदेशव्यापी कनेक्टिविटीस्थानीय ट्रैफिक राहत
असर6 राज्यों परएक औद्योगिक क्षेत्र पर
मुख्य लाभव्यापार और लॉजिस्टिक्सजाम और प्रदूषण में कमी

बड़ा कौन, महत्वपूर्ण कौन?

अक्सर लोग मानते हैं कि जो परियोजना सबसे बड़ी हो, वही सबसे महत्वपूर्ण भी होगी। लेकिन इंफ्रास्ट्रक्चर की दुनिया में हर परियोजना का महत्व उसकी जरूरत के हिसाब से तय होता है।

दिल्ली–मुंबई एक्सप्रेस-वे का मकसद देश की आर्थिक धुरी को मजबूत करना है। यह लाखों लोगों, उद्योगों और व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित करेगा। वहीं दुर्ग बाईपास एक्सप्रेस-वे का उद्देश्य एक औद्योगिक क्षेत्र को जाम और अव्यवस्थित यातायात से राहत देना है।