10 अगस्त 2026,

सोमवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

रिवर्स माइग्रेशन: क्या आज के दौर में शहर छोड़कर गांव लौटना नया ट्रेंड बन गया? जानें इसके पीछे की वजह

आपने कभी सोचा है कि बड़े शहरों से गांव में लौटने वाले युवा नई संभावनाओं को देखते हुए खेती में हाथ आजमा रहे हैं? अब शहरों की चमक छोड़कर, ये युवा अपने गांवों में न सिर्फ रह रहे हैं, बल्कि वहां की अर्थव्यवस्था को भी नई दिशा दे रहे हैं। क्या आज के दौर में शहर छोड़कर गांव लौटना नया ट्रेंड बन गया? आइए जानते हैं…
3 min read
Google source verification

भारत

image

Vinay Shakya

Aug 10, 2026

Reverse migration

सांकेतिक इमेज (सोर्स- ChatGpt)

आधुनिक दौर में कुछ लोग शहरों की चमक छोड़कर अपने गांव में वापस लौट रहे हैं। कमाई के लिए दूसरे शहरों में गए लोगों का गांव वापस लौटना एक ट्रेंड बनता जा रहा है। खास बात है कि दूसरे शहरों से वापस लौटने वालों में युवा पीढ़ी भी शामिल है। बहुत से युवा, शहरों की चमक छोड़कर अपने गांव वापस लौटे हैं और खेती, पशुपालन एवं स्वरोजगार के अन्य कार्यों में हाथ आजमा रहे हैं। ऐसे युवा शांति से जीवन गुजार रहे हैं और कमाई भी कर रहे हैं। यह बदलाव केवल एक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और जीवनशैली में एक नई उम्मीद की किरण है।

रिवर्स माइग्रेशन का नया चेहरा

बिहार के मधुबनी जिले के मरन गांव में लॉकडाउन के दौरान जब कई युवा शहरों से लौटे, तो यह वापसी केवल मजबूरी नहीं रही, बल्कि एक नई शुरुआत बन गई। लॉकडाउन में लौटे 87 मजदूरों में से लगभग 40 प्रतिशत वहीं रुक गए और खेती-बाड़ी व उससे जुड़ी गतिविधियों में जुट गए। अब वे दो फसलें उगा रहे हैं, सब्जियां उगा रहे हैं और घर की जरूरतों के साथ-साथ अतिरिक्त आमदनी भी कर रहे हैं।

उत्तराखंड में भी पलायन का रुझान बदल रहा है। राज्य माइग्रेशन कमीशन की रिपोर्ट के अनुसार, 6,282 युवा अपने गांव लौटे हैं, जिनमें से 43 प्रतिशत की उम्र 25 से 35 वर्ष के बीच है। इनमें से अधिकांश ने खेती, पशुपालन, पर्यटन और स्वरोजगार को अपनाया है। पश्चिमी उत्तराखंड में होमस्टे, खेती और इंटरनेट जैसी नई संभावनाओं ने गांवों में लौटने और रुकने की इच्छा को फिर से जगाया है।

लौटने की वजह: मजबूरी से अवसर तक

पूर्वी भारत के बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में हुए अध्ययन में पाया गया कि कई प्रवासी युवा जीवन के एक नए चरण- शादी और परिवार की शुरुआत के साथ गांव में बसने की इच्छा रखते हैं। वे यह नहीं चाहते कि पलायन ही अगली पीढ़ी की मुख्य आजीविका बने। दूसरी ओर, तमिलनाडु के कुछ क्षेत्रों में जोहो के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने ग्रामीण भारत में छिपी प्रतिभा और नवाचार की क्षमता को उजागर करते हुए लोगों से गांव लौटने की अपील की है।

सरकारी पहलें और संस्थागत बदलाव

वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम (VVP) के तहत अरुणाचल प्रदेश के सीमावर्ती जिलों, जैसे- कुरुंग कुमे, डिबांग वैली और शी-योमी में लोग लौट रहे हैं। हालांकि, इस कार्यक्रम के प्रभाव का कोई औपचारिक मूल्यांकन अभी तक नहीं किया गया है। इसके अलावा, रिलायंस फाउंडेशन और ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन की एक अध्ययन रिपोर्ट बताती है कि 3,000 गांवों में सामुदायिक नेतृत्व वाले विकास मॉडल ने आत्मनिर्भर गांवों की दिशा में महत्वपूर्ण बदलाव लाया है।

सरकार की आर्थिक रिपोर्ट (इकोनॉमिक सर्वे 2025–26) में भी यह बात उभरकर आई है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना आवश्यक है, ताकि शहरों पर पलायन का दबाव कम हो सके। इसमें कौशल विकास, ग्रामीण स्वरोजगार और स्थानीय संस्थानों को मजबूत करने पर जोर दिया गया है।

क्या यह बदलाव स्थायी होगा?

विशेषज्ञ और शोध बताते हैं कि पलायन के पीछे मुख्य कारण बेहतर आय, शिक्षा और नौकरी की तलाश है। वहीं, वापस लौटने वाले युवाओं में परिवार, स्वतंत्रता और गांव से जुड़ाव जैसे कारण भी प्रमुख हैं। पंजाब में हुए अध्ययन में यह सुझाव दिया गया है कि कृषि और ग्रामीण गैर-कृषि क्षेत्रों को मजबूत करने की आवश्यकता है, ताकि युवा गांव में ही रोजगार पा सकें।

क्या यह गांवों के लिए नई शुरुआत है?

रिवर्स माइग्रेशन केवल एक प्रवृत्ति नहीं, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बदलाव की दिशा है। जब युवा गांव लौटते हैं, तो खेती, होमस्टे, स्वरोजगार और स्थानीय हस्तकला जैसे विकल्प उभरते हैं। यह गांवों में नई ऊर्जा, आत्मनिर्भरता और सामाजिक जुड़ाव लाता है। जब गांव लौटने वाले युवा गांव की मिट्टी से फिर से जुड़ते हैं, तो यह केवल एक व्यक्तिगत बदलाव नहीं, बल्कि पूरे इलाके की सोच और संभावनाओं में बदलाव की शुरुआत होती है।

बदलाव को कैसे आगे बढ़ा सकते हैं?

  • गांव में लौटे युवाओं की पहचान करना और उन्हें खेती, हस्तकला या पर्यटन जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण व बाजार से जोड़ना।
  • पंचायत स्तर पर स्वरोजगार योजनाओं और कौशल विकास केंद्रों को सक्रिय करना।
  • गांव में इंटरनेट, होमस्टे और स्थानीय उत्पादों के लिए डिजिटल मार्केटिंग को बढ़ावा देना।