
Integrated Farming System : क्या है एकीकृत खेती का मॉडल, PC- Gemini
खेती के साथ पशुपालन को जोड़कर आय बढ़ाने का तरीका आज छोटे और सीमित जमीन वाले किसानों के लिए एक व्यवहारिक और लाभदायक विकल्प बन चुका है। यह न केवल खेती की अस्थिरता को कम करता है, बल्कि संसाधनों का चक्रवात उपयोग कर लागत घटाने और मुनाफा बढ़ाने में भी मदद करता है।
एकीकृत खेती (Integrated Farming System – IFS) में फसल, बागवानी, पशुपालन, मुर्गीपालन, गोबर से वर्मी कम्पोस्ट, बायोगैस आदि को एक साथ जोड़ा जाता है। इससे खेत का हर हिस्सा उपयोगी बनता है—फसल अवशेष पशुओं को चारा बनते हैं, पशुओं का गोबर खाद और बायोगैस स्रोत बनता है, और इससे बाहरी इनपुट की जरूरत कम होती है।
उदाहरण के तौर पर, एक मॉडल में 1 हेक्टेयर में फसल, बागवानी, डेयरी (2 गाय-बछड़े), 12 बकरियां, 150 मुर्गियां, वर्मी कम्पोस्ट, किचन गार्डन और बाउंड्री प्लांटिंग शामिल थी। इस मॉडल ने कुल 6.89 लाख रुपये का सकल लाभ और 3.17 लाख रुपये का शुद्ध लाभ दिया, साथ ही 475 मानव-दिन रोजगार भी उत्पन्न किया।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) और अन्य शोधों के अनुसार, एकीकृत मॉडल पारंपरिक खेती की तुलना में 2–4 गुना अधिक शुद्ध आय दे सकते हैं, प्रति हेक्टेयर 250–450 अतिरिक्त मानव-दिन रोजगार पैदा कर सकते हैं, और 30–60% पोषक तत्व खेत में ही पुनर्चक्रित कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड में ICAR-IGFRI, झांसी द्वारा विकसित LIFS मॉडल (खाद्य, सब्जी, फल, चारा, पशु, अन्य घटक) ने प्रति हेक्टेयर 35.91 टन गेहूं समतुल्य उत्पादन, 3.52 लाख रुपये का शुद्ध लाभ और 633 मानव-दिन रोजगार उत्पन्न किया। यह पारंपरिक प्रणाली से क्रमशः 278%, 226.6%, और 336.6% अधिक था।
मिजोरम में ICAR–NEH केंद्र द्वारा एक किसान महिला, श्रीमती एफ. लालचुआनावमी ने 2018–19 में IFS अपनाया। इसमें पॉलीहाउस में एंथुरियम, ड्रैगन फ्रूट, केले, सूअर पालन, मौसमी सब्जियां और जल संचयन तालाब शामिल थे। 2018 में कुल आय 1.10 लाख रुपये थी, जो 2023 तक बढ़कर 5.38 लाख रुपये हो गई। B अनुपात 1.37 से बढ़कर 2.92 हो गया। उत्पादन लगभग चार गुना बढ़ा, फसल विविधता दोगुनी हुई, और रोजगार 1,400 मानव-दिन प्रति वर्ष तक पहुंचा।
गोवा में बिचोलिम के मैथ्यू वल्लिकप्पन दंपति ने ICAR-CCARI की तकनीकी मदद से 1.8 हेक्टेयर में मछली, सूअर, मुर्गी, फल, सब्जी, वर्मी कम्पोस्ट और बायोगैस को मिलाकर एक IFS मॉडल बनाया। इस मॉडल ने 29 लाख रुपये की लागत पर 75.4 लाख रुपये का सकल लाभ और 46.4 लाख रुपये का शुद्ध लाभ दिया, B अनुपात 2.6 रहा। इससे आय दोगुनी हो गई।
केंद्र सरकार ने वित्त वर्ष 2026–27 के बजट में पशुपालन और डेयरी विभाग को 6,153.46 करोड़ रुपये आवंटित किए, जो पिछले वर्ष से 16% अधिक है। यह दिखाता है कि पशुपालन और उससे जुड़े क्षेत्र ग्रामीण आय में स्थिरता लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
सबसे पहले, अपनी जमीन और संसाधनों के अनुसार एक छोटा IFS मॉडल चुनें—जैसे फसल + मुर्गी + बकरियां + वर्मी कम्पोस्ट। पशुओं का गोबर खाद और बायोगैस के लिए उपयोग करें। किचन गार्डन और बाउंड्री प्लांटिंग से पोषण और आय दोनों बढ़ती है।
यदि संभव हो, ICAR या राज्य कृषि विश्वविद्यालय से तकनीकी मार्गदर्शन लें। स्थानीय कृषि विस्तार सेवाओं, FPO या SHG से जुड़कर बाजार और प्रशिक्षण तक पहुंच बढ़ाएं।
IFS मॉडल में शुरुआत में निवेश और प्रबंधन की जरूरत होती है। पशु स्वास्थ्य, चारा उपलब्धता और बाजार तक पहुंच सुनिश्चित करें। बड़े निवेश से पहले छोटे स्तर पर मॉडल ट्रायल करें।
IFS अपनाने से किसान की आय में स्थिरता आती है, लागत घटती है और रोजगार बढ़ता है। अब अगला कदम है—अपने क्षेत्र में उपलब्ध तकनीकी सहायता और बाजारों से जुड़कर इस मॉडल को अपनाना और विस्तार करना।
खेती और पशुपालन का यह समन्वय न केवल आर्थिक लाभ देता है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन भी बनाए रखता है। किसानों के लिए यह एक स्थायी और लाभकारी विकल्प है, जो उन्हें आत्मनिर्भर बनने में मदद करता है।
Updated on:
27 Aug 2026 03:31 pm
Published on:
27 Aug 2026 03:31 pm
