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क्या भारत का भूजल खत्म हो रहा है? हर साल कितना भूजल निकाला जाता है, कौन से इलाके रेड जोन में हैं और आगे क्या होगा?

Groundwater Crisis in India : क्या भारत का भूजल सचमुच खत्म हो रहा है? जानिए देश में हर साल कितना पानी निकाला जाता है, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में क्या हालात हैं और कौन-से इलाके रेड ज़ोन में पहुंच चुके हैं।
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Water Crisis

Water Crisis : देश के कौन से इलाके रेड जोन में आ रहे हैं?

भारत दुनिया का सबसे बड़ा भूजल उपयोगकर्ता माना जाता है। देश की खेती, पीने के पानी की व्यवस्था और बड़ी आबादी की दैनिक जरूरतें भूजल पर निर्भर हैं। लेकिन पिछले कुछ दशकों में ट्यूबवेल और बोरवेल के बढ़ते इस्तेमाल ने भूजल भंडार पर भारी दबाव डाला है। यही वजह है कि अब यह सवाल गंभीरता से पूछा जा रहा है। क्या भारत का भूजल खत्म हो रहा है?

इसका जवाब सीधा 'हां' या 'नहीं' में नहीं है। राष्ट्रीय स्तर पर भारत के पास अभी भी पर्याप्त भूजल संसाधन हैं, लेकिन कई राज्यों और जिलों में स्थिति चिंताजनक हो चुकी है। कुछ इलाकों में जितना पानी जमीन से निकाला जा रहा है, उससे कम पानी वापस रिचार्ज हो रहा है। ऐसे क्षेत्रों को ही आम बोलचाल में 'रेड ज़ोन' या 'ओवर-एक्सप्लॉइटेड' क्षेत्र कहा जाता है।

भारत हर साल कितना भूजल निकालता है?

केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) और जल शक्ति मंत्रालय की 2025 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में हर साल लगभग 247 अरब घन मीटर (BCM) भूजल निकाला जाता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा कृषि क्षेत्र का है।

भूजल का उपयोग कहां होता है?

  • कृषि: 87%
  • घरेलू उपयोग: 11%
  • उद्योग: 2%

यानी भारत में निकाले जाने वाले हर 100 लीटर भूजल में से लगभग 87 लीटर खेती में इस्तेमाल हो जाता है।

हालांकि अच्छी बात यह है कि देश का कुल भूजल दोहन स्तर अभी लगभग 60% है। इसका मतलब है कि राष्ट्रीय स्तर पर जितना भूजल उपयोग योग्य है, उसका करीब 60 प्रतिशत ही निकाला जा रहा है। लेकिन औसत आंकड़ा कई गंभीर स्थानीय संकटों को छिपा देता है।

कौन से इलाके रेड जोन में पहुंच चुके हैं?

CGWB भूजल स्थिति के आधार पर ब्लॉक, तहसील और मंडलों को चार श्रेणियों में बांटता है:

  • सुरक्षित (Safe)
  • अर्ध-गंभीर (Semi-Critical)
  • गंभीर (Critical)
  • अति-दोहित (Over-Exploited)

अति-दोहित यानी जहां भूजल निकासी 100% से अधिक हो चुकी है। ऐसे क्षेत्रों को ही आमतौर पर रेड ज़ोन माना जाता है।

2025 की स्थिति

  • कुल आकलन इकाइयां: 6762
  • ओवर-एक्सप्लॉइटेड: 730
  • क्रिटिकल: 201
  • सेमी-क्रिटिकल: 758
  • सुरक्षित: 4946

सबसे ज्यादा संकट किन राज्यों में?

  • पंजाब
  • हरियाणा
  • राजस्थान
  • दिल्ली के कुछ हिस्से
  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश
  • तमिलनाडु और कर्नाटक के कुछ जिले

इन राज्यों में कई ब्लॉकों में भूजल दोहन प्राकृतिक रिचार्ज से काफी अधिक हो चुका है।

सबसे खराब स्थिति कहां है?

पंजाब में भूजल निकासी दर 156% तक पहुंच चुकी है, यानी जितना पानी प्राकृतिक रूप से वापस भरता है, उससे डेढ़ गुना अधिक निकाला जा रहा है। राजस्थान में यह आंकड़ा 147% और हरियाणा में 136% के आसपास है।

राजस्थान की स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है। 2024-25 के आकलन के अनुसार राज्य की लगभग 70% भूजल इकाइयां ओवर-एक्सप्लॉइटेड श्रेणी में हैं। कई जिलों में रिकॉर्ड बारिश के बावजूद भूजल संकट बना हुआ है।

भूजल क्यों घट रहा है?

खेती में अत्यधिक उपयोग : धान, गन्ना और अन्य ज्यादा पानी वाली फसलों की खेती उन क्षेत्रों में भी की जा रही है जहां पानी की उपलब्धता सीमित है।

बोरवेल संस्कृति : पिछले 30 वर्षों में लाखों नए बोरवेल खोदे गए हैं। कई इलाकों में भूजल निकासी पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है।

शहरीकरण : कंक्रीट बढ़ने से वर्षा जल जमीन में कम समा पाता है, जिससे रिचार्ज घटता है।

जलवायु परिवर्तन : अनियमित मानसून और लंबे सूखे दौर भूजल पुनर्भरण को प्रभावित कर रहे हैं।

अगर यही रफ्तार रही तो क्या होगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि संकट एक साथ नहीं आएगा, बल्कि धीरे-धीरे दिखाई देगा।

  • बोरवेल और गहरे खोदने पड़ेंगे
  • सिंचाई की लागत बढ़ेगी
  • छोटे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे
  • गांवों में पेयजल संकट बढ़ेगा
  • टैंकरों पर निर्भरता बढ़ सकती है
  • फ्लोराइड और खारे पानी जैसी गुणवत्ता समस्याएं बढ़ेंगी
  • कुछ इलाकों में खेती आर्थिक रूप से मुश्किल हो सकती है

राजस्थान और हरियाणा के कई क्षेत्रों में इसके शुरुआती संकेत पहले से दिखाई दे रहे हैं।

क्या कोई अच्छी खबर भी है?

हां। 2024 के राष्ट्रीय आकलन में पाया गया कि 2017 की तुलना में देश में कुल भूजल रिचार्ज बढ़ा है और ओवर-एक्सप्लॉइटेड इकाइयों का प्रतिशत कुछ कम हुआ है। जल संरक्षण संरचनाओं, तालाबों और वर्षा जल संचयन का इसमें योगदान माना गया है।

भारत का भूजल अभी खत्म नहीं हो रहा है, लेकिन देश के कई हिस्से गंभीर संकट की ओर बढ़ रहे हैं। राष्ट्रीय स्तर का औसत आंकड़ा राहत देता है, लेकिन पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और कई अन्य क्षेत्रों में भूजल का दोहन प्राकृतिक रिचार्ज से कहीं अधिक हो चुका है। यदि खेती के तौर-तरीकों, वर्षा जल संचयन और भूजल प्रबंधन में बड़े बदलाव नहीं किए गए, तो आने वाले वर्षों में पानी की समस्या सिर्फ पर्यावरणीय नहीं बल्कि आर्थिक और सामाजिक संकट भी बन सकती है।