
किसान की कमाई केवल फसल बेचने तक सीमित नहीं रहे तो कृषि को ज्यादा लाभदायक कारोबार में बदला जा सकता है। आटा, मसाला, तेल, दाल प्रसंस्करण, फल-सब्जी पैकिंग, ग्रेडिंग, खाद्य उत्पाद निर्माण या दूसरी कृषि आधारित गतिविधियां शुरू करके किसान खेत की उपज में मूल्य जोड़ सकता है। ऐसे कृषि आधारित उद्यमों को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम से जुड़ी योजनाओं का लाभ मिल सकता है।
हालांकि यह समझना जरूरी है कि सिर्फ खेत में फसल उगाना अपने-आप MSME गतिविधि नहीं बन जाता। MSME योजनाओं की उपयोगिता मुख्य रूप से तब बढ़ती है जब खेती से आगे प्रसंस्करण, निर्माण या सेवा आधारित व्यवसाय शुरू किया जाए।
मान लीजिए किसान हल्दी उगाता है। वह केवल कच्ची हल्दी मंडी में बेचने के बजाय उसकी सफाई, सुखाई, पिसाई और पैकिंग की इकाई शुरू करता है। इसी तरह गेहूं से आटा, सरसों से तेल, फल से जैम या सब्जियों की ग्रेडिंग-पैकिंग का व्यवसाय शुरू किया जा सकता है।
इस तरह की मूल्यवर्धन गतिविधियां उत्पादन को कृषि आधारित उद्यम में बदल सकती हैं। इससे किसान को केवल मंडी भाव पर निर्भर रहने के बजाय तैयार उत्पाद की कीमत मिलने की संभावना बनती है।
MSME मंत्रालय का प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) नए सूक्ष्म उद्यम स्थापित करने के लिए ऋण से जुड़ी सब्सिडी योजना है।
नई विनिर्माण इकाई के लिए परियोजना लागत की अधिकतम सीमा ₹50 लाख और सेवा क्षेत्र के लिए ₹20 लाख है। सामान्य श्रेणी में परियोजना लागत पर 15% से 25% और विशेष श्रेणी में 25% से 35% तक मार्जिन मनी सब्सिडी का प्रावधान है।
PMEGP मुख्य रूप से गैर-कृषि सूक्ष्म उद्यमों के लिए है। फसल की सीधी खेती योजना के तहत नहीं आती, लेकिन कृषि उपज में मूल्यवर्धन और खेत से जुड़ी कुछ गैर-कृषि गतिविधियां पात्र हो सकती हैं।
अगर किसान कृषि-प्रसंस्करण की सूक्ष्म या लघु इकाई स्थापित करता है तो बैंक ऋण में CGTMSE की ऋण गारंटी व्यवस्था उपयोगी हो सकती है।
मौजूदा व्यवस्था में पात्र सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए ₹10 करोड़ तक की ऋण सुविधा गारंटी के दायरे में आ सकती है। इसमें परियोजना की व्यवहार्यता के आधार पर बिना संपार्श्विक या तीसरे पक्ष की गारंटी वाले ऋण को कवर किया जा सकता है।
यह ध्यान रखना जरूरी है कि CGTMSE किसान या उद्यमी को सीधे ऋण नहीं देता। ऋण बैंक या दूसरी पात्र ऋणदाता संस्था देती है और CGTMSE बैंक को गारंटी कवर उपलब्ध कराता है। प्राथमिक कृषि गतिविधियां इसके दायरे में नहीं हैं, लेकिन पात्र विनिर्माण और सेवा आधारित कृषि उद्यम इसका लाभ ले सकते हैं।
कृषि आधारित पात्र व्यवसाय शुरू करने के बाद उद्यम पंजीकरण कराया जा सकता है। पंजीकरण पूरी तरह ऑनलाइन, कागजरहित और निशुल्क है। इसके लिए किसी निजी एजेंट को पैसा देने की जरूरत नहीं है। पंजीकरण पूरा होने पर स्थायी उद्यम पंजीकरण संख्या और क्यूआर कोड वाला प्रमाणपत्र मिलता है।
1 अप्रैल 2025 से सूक्ष्म उद्यम की सीमा मशीनरी या उपकरण में ₹2.5 करोड़ तक निवेश और ₹10 करोड़ तक सालाना कारोबार है। छोटे उद्यम के लिए यह सीमा क्रमशः ₹25 करोड़ और ₹100 करोड़ है।
MSME का लाभ लेने के लिए सबसे पहले यह तय करना बेहतर है कि खेत की उपज से किस तरह का व्यवसाय बनाया जा सकता है। उदाहरण के तौर पर—
इसके बाद परियोजना लागत, संभावित बिक्री, बैंक ऋण और उपलब्ध सरकारी योजना का हिसाब लगाना चाहिए।
हर कृषि गतिविधि MSME सहायता के लिए पात्र नहीं होती। योजना का चुनाव कारोबार की प्रकृति के अनुसार होना चाहिए। कृषि यंत्रों पर अनुदान या खेती की प्रत्यक्ष सब्सिडी आमतौर पर कृषि मंत्रालय और राज्य कृषि विभाग की योजनाओं से मिलती है, इन्हें MSME मंत्रालय की योजना नहीं समझना चाहिए।
Updated on:
14 Sept 2026 10:31 am
Published on:
13 Sept 2026 02:58 pm
