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नागालैंड के भोजनोत्सवों की अनूठी दावत, एक्सोने, गल्हो से लेकर राजा मिर्च से तैयार व्यजंनों के बारे में जानिए

नागालैंड के भोजनोत्सवों में छुपा है स्वाद, परंपरा और एकता का अनोखा संगम। जानिए हॉर्नबिल से लेकर जनजातीय खानपान, एक्सोने और स्थानीय व्यंजनों के बारे में ।
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भारत

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Chitra Badoliya

Aug 18, 2026

Nagaland

नागालैंड के भोजनोत्सव (AI)

पूर्वोत्तर भारत की खूबसूरत पहाड़ियों में बसा नागालैंड अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अनूठी परंपराओं और विशिष्ट खानपान के लिए प्रसिद्ध है। यहां भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि जीवनशैली, पर्यावरण और जनजातीय पहचान का प्रतीक है। नागालैंड के पारंपरिक त्योहारों में भोजन एक केंद्रीय भूमिका निभाता है, जहां हर निवाले में प्रकृति से जुड़ाव और पीढ़ियों पुरानी रीतियों की सुगंध मिलती है।

सांस्कृतिक धरोहर और उत्सवों की भूमि

नागालैंड में 16 से अधिक प्रमुख जनजातियां निवास करती हैं, जिनमें आओ, अंगामी, लोथा, सुमी, कोन्याक और चाकेसांग जैसी प्रमुख जनजातियां शामिल हैं। हर जनजाति की अपनी अलग भाषा, वेशभूषा और खानपान की परंपरा है। राज्य के अधिकांश त्योहार कृषि चक्र, बुवाई और फसल कटाई से जुड़े हैं। इन अवसरों पर तैयार होने वाला पारंपरिक भोजन केवल दावत नहीं होता, बल्कि ईश्वर और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम होता है। सामुदायिक भोज में पूरे गांव के लोग एक साथ मिलकर पकाते और खाते हैं। इस दौरान बड़े बुजुर्ग नई पीढ़ी को भोजन पकाने की पारंपरिक विधियों, जड़ी-बूटियों की पहचान और संरक्षण के तरीकों से अवगत कराते हैं।

हॉर्नबिल फेस्टिवल: 'त्योहारों का त्योहार'

हर साल 1 से 10 दिसंबर के बीच कोहिमा के निकट स्थित किसामा हेरिटेज विलेज में हॉर्नबिल फेस्टिवल आयोजित किया जाता है। राज्य पर्यटन विभाग द्वारा वर्ष 2000 में शुरू किया गया यह उत्सव आज वैश्विक स्तर पर आकर्षण का केंद्र बन चुका है।

  • पारंपरिक मोरुंग (Morung): उत्सव स्थल पर सभी प्रमुख जनजातियों की पारंपरिक झोपड़ियां बनाई जाती हैं। आगंतुक यहां बैठकर सीधे स्थानीय लोगों के साथ उनके भोजन और संस्कृति का अनुभव करते हैं।
  • विशिष्ट व्यंजन: हॉर्नबिल के फूड कोर्ट में स्मोक्ड पोर्क (बांस के तने के साथ), एक्सोने (फर्मेंटेड सोयाबीन), नागा किंग चिली (भूत झोलकिया) की चटनी, केले के पत्तों में पकाए गए चिपचिपे चावल और फर्मेंटेड बांस शूट में बनी मछली विशेष रूप से परोसी जाती है।
  • पारंपरिक पेय: स्थानीय रूप से चावल से तैयार पेय जैसे 'ज़ुथो' (Zutho) और 'थूत्से' (Thutshe) मेहमानों को मिट्टी या बांस के पारंपरिक पात्रों में पेश किए जाते हैं।

नागा रसोई के मूल तत्व और स्वाद विज्ञान

नागालैंड के पारंपरिक भोजन में तेल और भारी मसालों का इस्तेमाल नहीं होता। स्वाद का मुख्य आधार प्राकृतिक फर्मेंटेशन, स्मोकिंग और जंगली जड़ी-बूटियां हैं।

  • एक्सोने (Axone / Akhuni): फर्मेंटेड सोयाबीन से तैयार यह पेस्ट नागा व्यंजनों की आत्मा माना जाता है। इसे सब्जियों, दाल और मांस के साथ मिलाकर गहरा और तीखा स्वाद दिया जाता है।
  • स्मोक्ड मीट: पहाड़ी इलाकों में भोजन को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए चूल्हे के ऊपर लकड़ी के धुएं में सुखाया जाता है। यह प्रक्रिया भोजन को एक खास 'स्मोकी' फ्लेवर देती है।
  • बांस शूट (Bamboo Shoot): ताजे और फर्मेंटेड बांस के कोमल हिस्से का उपयोग ग्रेवी और सूप को खट्टा और स्वादिष्ट बनाने में किया जाता है।
  • राजा मिर्च (Raja Mircha / Ghost Pepper): दुनिया की सबसे तीखी मिर्चियों में शामिल यह मिर्च चटनी और मांस के व्यंजनों में बहुत कम मात्रा में लेकिन तीखे स्वाद के लिए इस्तेमाल होती है।
  • गल्हो (Galho): यह चावल, हरी पत्तेदार सब्जियों और स्मोक्ड मीट या मछली से तैयार एक पौष्टिक खिचड़ी जैसा व्यंजन है, जो रोजमर्रा के भोजन के साथ-साथ बीमारी के समय भी खाया जाता है।

पर्यटन, आजीविका और सांस्कृतिक संरक्षण

भोजनोत्सवों ने नागालैंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति दी है।

  • होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन: उत्सवों के दौरान दूर-दराज से आने वाले पर्यटक स्थानीय घरों में ठहरते हैं, जिससे ग्रामीण परिवारों को सीधी आय मिलती है।
  • स्थानीय उत्पादों की मांग: फर्मेंटेड सोयाबीन, बांस की टोकरियां, स्मोक्ड उत्पाद, मिर्च के अचार और जैविक दालों की बिक्री से स्थानीय किसानों और स्वयं सहायता समूहों को बड़ा बाजार मिलता है।
  • पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण: आधुनिक जीवनशैली के प्रभाव के बीच भोजनोत्सव पारंपरिक कृषि पद्धतियों और जैविक खाद्य पदार्थों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

यात्रियों के लिए सुझाव

  • यात्रा का सही समय: नवंबर से फरवरी के बीच का समय सबसे अनुकूल है, जब मौसम सुहावना रहता है और प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव आयोजित होते हैं।
  • स्थानीय शिष्टाचार: जब भी आप किसी पारंपरिक मोरुंग या स्थानीय घर में भोजन करें, तो उनके आतिथ्य का सम्मान करें और स्थानीय नियमों का पालन करें।
  • खानपान का दायरा बढ़ाएं: नागालैंड का खानपान केवल मांसाहार तक सीमित नहीं है; यहां उबली हुई जैविक सब्जियां, जंगली साग और विभिन्न प्रकार के स्थानीय चावल भी शाकाहारी यात्रियों के लिए उपलब्ध रहते हैं।

नागालैंड के भोजनोत्सव केवल स्वाद का सफर नहीं हैं, बल्कि यह प्रकृति, समुदाय और इतिहास के साथ गहरे जुड़ाव की एक जीवंत दावत हैं।