
नागालैंड के भोजनोत्सव (AI)
पूर्वोत्तर भारत की खूबसूरत पहाड़ियों में बसा नागालैंड अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, अनूठी परंपराओं और विशिष्ट खानपान के लिए प्रसिद्ध है। यहां भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं, बल्कि जीवनशैली, पर्यावरण और जनजातीय पहचान का प्रतीक है। नागालैंड के पारंपरिक त्योहारों में भोजन एक केंद्रीय भूमिका निभाता है, जहां हर निवाले में प्रकृति से जुड़ाव और पीढ़ियों पुरानी रीतियों की सुगंध मिलती है।
नागालैंड में 16 से अधिक प्रमुख जनजातियां निवास करती हैं, जिनमें आओ, अंगामी, लोथा, सुमी, कोन्याक और चाकेसांग जैसी प्रमुख जनजातियां शामिल हैं। हर जनजाति की अपनी अलग भाषा, वेशभूषा और खानपान की परंपरा है। राज्य के अधिकांश त्योहार कृषि चक्र, बुवाई और फसल कटाई से जुड़े हैं। इन अवसरों पर तैयार होने वाला पारंपरिक भोजन केवल दावत नहीं होता, बल्कि ईश्वर और प्रकृति के प्रति आभार व्यक्त करने का माध्यम होता है। सामुदायिक भोज में पूरे गांव के लोग एक साथ मिलकर पकाते और खाते हैं। इस दौरान बड़े बुजुर्ग नई पीढ़ी को भोजन पकाने की पारंपरिक विधियों, जड़ी-बूटियों की पहचान और संरक्षण के तरीकों से अवगत कराते हैं।
हर साल 1 से 10 दिसंबर के बीच कोहिमा के निकट स्थित किसामा हेरिटेज विलेज में हॉर्नबिल फेस्टिवल आयोजित किया जाता है। राज्य पर्यटन विभाग द्वारा वर्ष 2000 में शुरू किया गया यह उत्सव आज वैश्विक स्तर पर आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
नागालैंड के पारंपरिक भोजन में तेल और भारी मसालों का इस्तेमाल नहीं होता। स्वाद का मुख्य आधार प्राकृतिक फर्मेंटेशन, स्मोकिंग और जंगली जड़ी-बूटियां हैं।
भोजनोत्सवों ने नागालैंड की स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति दी है।
नागालैंड के भोजनोत्सव केवल स्वाद का सफर नहीं हैं, बल्कि यह प्रकृति, समुदाय और इतिहास के साथ गहरे जुड़ाव की एक जीवंत दावत हैं।
Updated on:
18 Aug 2026 12:47 pm
Published on:
18 Aug 2026 12:46 pm
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