
सांकेतिक इमेज (फोटो सोर्स- Chatgpt)
इथियोपिया में चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती प्रतिस्पर्धा अब वैश्विक राजनीति का अहम हिस्सा बन चुकी है। इस बीच, भारत के लिए भी अवसर और चुनौतियां उभरकर सामने आ रही हैं। आइए समझते हैं कि इथियोपिया में चीन और अमेरिका के बीच किस प्रकार की प्रतिस्पर्धा चल रही है? चीन और US के बीच जारी प्रतिस्पर्धा विवाद का भारत पर क्या असर होगा?
इथियोपिया अफ्रीका का एक रणनीतिक केंद्र है। यह अफ्रीकी संघ का मुख्यालय है और क्षेत्रीय स्थिरता में इसकी भूमिका अहम है। चीन ने इस देश में भारी निवेश किया है, जिसमें बुनियादी ढांचे, रेल, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र शामिल हैं। अमेरिका ने इथियोपिया में मानवीय सहायता, स्वास्थ्य, शिक्षा और सुरक्षा सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया है। इस प्रतिस्पर्धा से इथियोपिया को लाभ मिला है और भारत के लिए भी नए द्वार खुल रहे हैं।
चीन ने इथियोपिया में बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास में बड़े पैमाने पर निवेश किया है। साल 2000 से 2016 तक चीन ने इथियोपिया को लगभग 13.3 अरब डॉलर का लोन दिया। इसमे सबसे अहम परियोजना एडिस अबाबा- जिबूती रेलवे है। इसकी लागत लगभग 4 अरब डॉलर थी और इसे चीन के एक्सिम बैंक ने वित्तपोषित किया। साल 2020 से 2025 के बीच चीन ने इथियोपिया में 740 निवेश परियोजनाओं को मंजूरी दी, जिनमें 582 निर्माण क्षेत्र में थीं। इन परियोजनाओं ने हजारों स्थायी और अस्थायी नौकरियां पैदा कीं। इन निवेशों से इथियोपिया को औद्योगीकरण, रोजगार और आर्थिक वृद्धि में मदद मिली है।
अमेरिका ने इथियोपिया में मानवीय सहायता और विकास कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित किया है। 2021 से 2023 तक अमेरिका ने लगभग 3 अरब डॉलर से अधिक की मानवीय सहायता प्रदान की है। इसके अलावा, अमेरिका स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में गैर-मानवीय सहायता भी दे रहा है, जिसमें 2023 में 335 मिलियन डॉलर से अधिक का योगदान शामिल है। इस प्रतिस्पर्धा का एक सकारात्मक पहलू यह है कि चीन की बढ़ती भूमिका ने अमेरिका को और अधिक सहायता देने के लिए प्रेरित किया है, जिससे इथियोपिया को दोनों ओर से फायदा हुआ है।
भारत की भूमिका अभी अपेक्षाकृत सीमित है, लेकिन इसमें विस्तार की गुंजाइश है। भारत ने इथियोपिया में शिक्षा, तकनीकी सहायता और कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाया है। उदाहरण के लिए, भारत ने इथियोपिया-जिबूती रेल मार्ग को पुनर्जीवित करने के लिए 300 मिलियन डॉलर का लाइन ऑफ क्रेडिट दिया था। 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इथियोपिया की यात्रा की। इस दौरान दोनों देशों ने शांति सैनिकों के प्रशिक्षण, शिक्षा और डेटा सेंटर की स्थापना पर समझौते किए। इसके साथ ही, भारत ने इथियोपिया को G20 कॉमन फ्रेमवर्क के तहत कर्ज प्रबंधन में मदद का वादा किया। यह कदम भारत की अफ्रीका में बढ़ती कूटनीतिक और आर्थिक उपस्थिति को दर्शाता है।
भारत के लिए यह समय अवसरों से भरा है। इथियोपिया में चीन और अमेरिका के बीच संतुलन बनाकर भारत अपनी भूमिका मजबूत कर सकता है। शिक्षा, तकनीकी सहायता, कृषि और डिजिटल क्षेत्र में भारत की विशेषज्ञता इथियोपिया के लिए उपयोगी हो सकती है। भारत को यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका सहयोग ऋण-निर्भरता न बढ़ाए, बल्कि स्थानीय क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक विकास को बढ़ावा दे। साथ ही, भारत अफ्रीकी देशों के साथ साझा विकास मॉडल पर जोर देकर अपनी छवि को सकारात्मक रूप से स्थापित कर सकता है।
भारत को इथियोपिया में अपनी रणनीति को विस्तार देना चाहिए। विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और डिजिटल क्षेत्र में भारत को ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इसके साथ ही, भारत को स्थानीय संस्थानों के साथ साझेदारी बढ़ानी चाहिए, ताकि परियोजनाएं स्थायी और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप हों। भारत को यह भी देखना चाहिए कि वह चीन और अमेरिका के बीच संतुलन बनाए रखते हुए, अफ्रीकी देशों के साथ समानता और सम्मान पर आधारित साझेदारी को आगे बढ़ाए।
चीन और अमेरिका के बीच इथियोपिया में चल रही प्रतिस्पर्धा ने इस देश को विकास और सहायता के नए अवसर दिए हैं। भारत के लिए यह समय है कि वह अपनी विशिष्ट ताकतों शिक्षा, तकनीकी सहयोग, कृषि और डिजिटलीकरण के माध्यम से इथियोपिया में एक भरोसेमंद साझेदार बनकर उभरे। इससे न केवल इथियोपिया को लाभ होगा, बल्कि भारत की वैश्विक छवि और रणनीतिक पहुंच भी मजबूत होगी।
Updated on:
13 Aug 2026 04:00 pm
Published on:
13 Aug 2026 04:00 pm
