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जई की खेती से पशुपालकों को मिलेगा पौष्टिक हरा चारा, कम लागत में अच्छी पैदावार

रबी सीजन में जई की खेती पशुपालकों के लिए हरे और पौष्टिक चारे का अच्छा विकल्प है। एक कटाई से लेकर बहु-कटाई तक इसकी खेती की जा सकती है। जानिए जई की बुवाई का सही समय, किस्म, कटाई और उत्पादन से जुड़ी जरूरी बातें।
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Avaneesh Kumar Mishra

Sep 14, 2026

जई की खेती भारत में मुख्य रूप से पशुओं के लिए हरे चारे के रूप में की जाती है। खासकर डेयरी किसानों के लिए यह सर्दियों में हरे चारे का महत्वपूर्ण स्रोत है। इसकी खेती अपेक्षाकृत आसान है और अच्छी सिंचाई व प्रबंधन मिलने पर पर्याप्त मात्रा में हरा चारा तैयार किया जा सकता है।

देश में चारे वाली जई की खेती करीब 0.25 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र में होने का अनुमान है। उत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, हरियाणा और मध्य प्रदेश इसके प्रमुख उत्पादक राज्यों में शामिल हैं।

जई की खेती क्यों है पशुपालकों के लिए फायदेमंद?

जई में हरे चारे के रूप में अच्छी पोषण गुणवत्ता पाई जाती है। इसे अकेले चारे के रूप में या दूसरे चारा फसलों के साथ भी उपयोग किया जा सकता है। डेयरी पशुओं को संतुलित आहार देने में हरे चारे की महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

इसकी एक खासियत यह है कि किसान एक कटाई या बहु-कटाई वाली किस्मों का चुनाव कर सकते हैं। इससे उपलब्ध जमीन, पानी और पशुओं की संख्या के अनुसार चारा उत्पादन की योजना बनाई जा सकती है।

कब करें जई की बुवाई?

जई रबी मौसम की फसल है। इसकी बुवाई का सही समय क्षेत्र की जलवायु और उपलब्ध सिंचाई पर निर्भर करता है। सामान्य तौर पर उत्तर भारत में इसकी बुवाई अक्टूबर से नवंबर के दौरान की जाती है।

बहुत देर से बुवाई करने पर फसल की बढ़वार और कुल हरे चारे की उपज प्रभावित हो सकती है। इसलिए किसान अपने क्षेत्र के कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र की स्थानीय सलाह के अनुसार बुवाई का समय तय करें।

खेत और मिट्टी कैसी हो?

जई की खेती के लिए उपजाऊ दोमट मिट्टी और अच्छी जल निकासी वाली जमीन उपयुक्त मानी जाती है। खेत में पानी का लंबे समय तक जमाव फसल की बढ़वार को प्रभावित कर सकता है।

बुवाई से पहले खेत की अच्छी जुताई करके मिट्टी को भुरभुरा बनाएं। खाद और उर्वरक की मात्रा मिट्टी की जांच तथा स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर तय करना बेहतर है।

एक कटाई या बहु-कटाई, कौन-सा तरीका बेहतर?

जई की खेती में किसान अपनी जरूरत के अनुसार कटाई का तरीका चुन सकते हैं। एक कटाई वाली जई में फसल को एक बार काटकर अधिक मात्रा में हरा चारा लिया जाता है। वहीं बहु-कटाई वाली जई में पहली कटाई अपेक्षाकृत जल्दी की जाती है और अनुकूल परिस्थितियों में बाद में भी कटाई की जा सकती है।

बहु-कटाई का फायदा यह है कि किसान लंबे समय तक हरे चारे की उपलब्धता बनाए रख सकता है। हालांकि, कटाई की संख्या और अंतराल किस्म, मौसम और फसल की बढ़वार पर निर्भर करते हैं।

जई की अच्छी फसल के लिए ये काम जरूरी

किसानों को इन बातों का ध्यान रखना चाहिए-

  • प्रमाणित और अच्छी गुणवत्ता वाला बीज इस्तेमाल करें।
  • अपने क्षेत्र के लिए अनुशंसित किस्म का चयन करें।
  • बुवाई समय पर करें।
  • खेत में पर्याप्त नमी बनाए रखें।
  • जलभराव से बचाव करें।
  • खरपतवार की समय पर रोकथाम करें।
  • खाद और उर्वरक मिट्टी की जरूरत के अनुसार दें।
  • कटाई बहुत देर से न करें, क्योंकि चारे की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।

राजौरी में वैज्ञानिक खेती से बढ़ी उपज

जई की उन्नत तकनीक का फायदा किसानों को मिल सकता है। जम्मू-कश्मीर के राजौरी में कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से 2021-22 से 2023-24 के दौरान किए गए अग्रिम पंक्ति प्रदर्शनों में बेहतर तकनीक अपनाने वाले खेतों में पारंपरिक पद्धति की तुलना में औसत उपज में 29.8 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

इन प्रदर्शनों में प्रति हेक्टेयर करीब ₹40,258 का अतिरिक्त लाभ दर्ज हुआ। बेहतर तकनीक वाले खेतों में लाभ-लागत अनुपात 2.84 रहा, जबकि किसानों की सामान्य पद्धति में यह 2.29 था।

जई की कटाई कब करें?

हरे चारे के लिए कटाई का समय बहुत महत्वपूर्ण है। बहुत जल्दी कटाई करने पर कुल चारे की मात्रा कम हो सकती है, जबकि बहुत देर से कटाई करने पर चारे की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है।

बहु-कटाई वाली जई में पहली कटाई सामान्यतः 40–45 दिन के आसपास की जा सकती है। इसके बाद फसल की बढ़वार और मौसम के अनुसार अगली कटाई का समय तय किया जाता है। स्थानीय किस्म की अनुशंसा के अनुसार कटाई करना बेहतर रहता है।

पशुपालक किसान पहले से बनाएं चारे की योजना

जिन किसानों के पास डेयरी पशु हैं, उनके लिए जई की खेती हरे चारे की जरूरत पूरी करने में मदद कर सकती है। बुवाई से पहले किसान को यह गणना कर लेनी चाहिए कि उसके पास कितने पशु हैं और रोजाना कितने हरे चारे की जरूरत होगी।

यदि पर्याप्त जमीन उपलब्ध है तो जई की खेती को दूसरी चारा फसलों के साथ मिलाकर पूरे रबी सीजन के लिए चारा प्रबंधन की योजना बनाई जा सकती है।

जई की खेती: जरूरी बातें एक नजर में

बिंदुजानकारी
मुख्य उद्देश्यपशुओं के लिए हरा चारा
फसल मौसमरबी
सामान्य बुवाईअक्टूबर–नवंबर
उपयुक्त मिट्टीउपजाऊ दोमट और अच्छी जल निकासी वाली
कटाई का तरीकाएक कटाई या बहु-कटाई
पहली कटाईबहु-कटाई में करीब 40–45 दिन
प्रमुख राज्यउत्तर प्रदेश, पंजाब, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश
जरूरी सावधानीसमय पर बुवाई, सिंचाई और कटाई
बीज चयनक्षेत्र के लिए अनुशंसित प्रमाणित किस्म

किसान इन गलतियों से बचें

जई की खेती में बिना जानकारी के अधिक बीज डालना, खेत में पानी जमा रहने देना या कटाई में बहुत देरी करना नुकसानदायक हो सकता है। इसी तरह केवल अधिक चारा उत्पादन के लक्ष्य में चारे की गुणवत्ता को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

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