
Offbeat Places in Tripura : जानें त्रिपुरा के अनजाने टूरिस्ट स्पॉट, PC- Gemini
त्रिपुरा के छोटे शहरों और अनजाने स्थलों की खोज में निकलना एक ऐसा अनुभव है, जो आपको भीड़-भाड़ से दूर, प्रकृति, संस्कृति और इतिहास के बीच ले जाता है। राजधानी अगरतला से थोड़ी दूरी पर बसी ये जगहें युवा, सोलो ट्रैवलर, परिवार और सीनियर यात्रियों के लिए एकदम उपयुक्त हैं, बजट में, शांत और असल स्थानीय जीवन से जुड़ने का मौका देती हैं।
दक्षिण त्रिपुरा में स्थित शांतिरबाजार को ‘शांति का बाजार’ कहा जाता है। यह एक छोटा, शांत कस्बा है, जो पारंपरिक त्रिपुरी जीवन और स्थानीय संस्कृति का अनुभव कराने के लिए आदर्श है। यहां भीड़ नहीं होती और आप स्थानीय जीवन की सादगी में खुद को खो सकते हैं। विदेशी यात्रियों को विशेष अनुमति (PAP/RAP) की जानकारी जरूर लेनी चाहिए, लेकिन भारतीयों के लिए आम तौर पर कोई अनुमति नहीं चाहिए होती।
खोवाई जिले की अठारामुरा पहाड़ियों में स्थित मोंटांग वैली को ‘Mountain of Peace’ के नाम से भी जाना जाता है। यह जगह अगरतला से लगभग 80 किमी दूर है और तैरते बादलों व शांत प्राकृतिक दृश्यों के लिए प्रसिद्ध है। यह धीरे-धीरे त्रिपुरा के पर्यटन मानचित्र पर उभरता हुआ स्थल बन रहा है।
कैलाशहर उपविभाग में स्थित उनाकोटी एक प्राचीन शिव स्थल है, जहां पहाड़ियों में हजारों की संख्या में देवी-देवताओं की मूर्तियां और शिलालेख खुदे हुए हैं। इसका नाम उस पौराणिक कथा से जुड़ा है, जिसमें कहा जाता है कि यहां 99,99,999 मूर्तियां थीं। यह स्थल अपनी रहस्यमयी और ऐतिहासिक छवि के लिए जाना जाता है।
गोमती नदी के किनारे स्थित चबिमुरा, जिसे देवतामुरा भी कहते हैं, 15वीं–16वीं सदी की चट्टान-उकेरी मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। इनमें दुर्गा, गणेश और कार्तिकेय की विशाल मूर्तियां शामिल हैं। नदी में नाव से यात्रा करते हुए इन मूर्तियों को देखना एक अद्भुत अनुभव है।
उत्तर त्रिपुरा में स्थित जाम्पुई हिल्स लगभग 3,000 फीट की ऊंचाई पर फैले हैं और इन्हें ‘ऑर्किड पैराडाइज ऑफ इंडिया’ भी कहा जाता है। यहां से मिजोरम और बांग्लादेश के दूर-दूर तक के दृश्य देखे जा सकते हैं। वांग्हमुन गांव में Eden Tourist Lodge जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध हैं और स्थानीय मिजो संस्कृति का अनुभव भी मिलता है।
धलाई जिले में स्थित डुम्बूर झील लगभग 41 वर्ग किमी में फैली है और इसमें 48 द्वीप हैं। यह गोमती नदी की उत्पत्ति स्थल भी है। यहां नाव की सैर और पक्षी दर्शन का आनंद लिया जा सकता है। बेलोनिया उपविभाग में स्थित पिलाक एक पुरातात्विक स्थल है, जहां 8वीं–12वीं सदी के बौद्ध और हिंदू अवशेष मिलते हैं। यहां की मूर्तियां और टेराकोटा पट्टिकाएं बंगाल, अरकान और स्थानीय शैली का मिश्रण दर्शाती हैं।
उत्तर त्रिपुरा में स्थित रोवा वन्यजीव अभयारण्य जैव विविधता से भरपूर है। यहां बंदर, पक्षी और सरीसृप मिलते हैं। शांत ट्रेकिंग और पक्षी दर्शन के लिए यह एक बेहतरीन विकल्प है। खोवाई जिले में स्थित बरामुरा ईको-पार्क भी प्रकृति प्रेमियों के लिए आदर्श है, जहां शांतिपूर्ण जंगल और पक्षियों की विविधता का आनंद लिया जा सकता है।
अगरतला से इन जगहों की दूरी और यात्रा समय अलग-अलग है। उदाहरण के लिए, जाम्पुई हिल्स लगभग 210–220 किमी दूर हैं और 6–7 घंटे का सफर है, इसलिए चार दिन के ट्रिप में इसे जोड़ना मुश्किल हो सकता है। वहीं चबिमुरा को चार दिन की यात्रा में शामिल करना अधिक व्यावहारिक विकल्प है। बजट यात्रियों के लिए साझा ऑटो, राज्य बसें और स्थानीय गेस्टहाउस (₹350–₹500 प्रति रात) उपलब्ध हैं। स्थानीय ढाबों में ₹60–₹120 में भोजन मिल जाता है। कुल मिलाकर चार दिन का ट्रिप ₹2,950–₹4,300 प्रति व्यक्ति (भूमि लागत) में संभव है।
मानसून (जून–सितंबर) में भारी बारिश और उच्च आर्द्रता के कारण कुछ रास्ते बंद हो सकते हैं। इसलिए अक्टूबर से मार्च का समय यात्रा के लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। विदेशी यात्रियों को विशेष अनुमति की जानकारी पहले से लेनी चाहिए, हालांकि त्रिपुरा में आमतौर पर ऐसा नहीं लगता।
त्रिपुरा के ये छोटे शहर और अनजाने स्थल सिर्फ पर्यटन नहीं, बल्कि एक अनुभव हैं—जहां आप प्रकृति, इतिहास और स्थानीय जीवन से जुड़ते हैं। चाहे आप शांत शांतिरबाजार में सांस्कृतिक जुड़ाव चाहते हों, मोंटांग वैली में बादलों के बीच खो जाना हो, या चबिमुरा की रहस्यमयी मूर्तियों को देखना हो—हर जगह कुछ नया और असल अनुभव देती है। अगली यात्रा में इन जगहों को शामिल करें और खुद देखें कि त्रिपुरा की असल खूबसूरती कहां छिपी है।
Updated on:
26 Aug 2026 04:45 pm
Published on:
26 Aug 2026 04:45 pm
