
स्वस्थ और संतुलित आहार: खुशहाल परिवार का आधार। (फोटो: AI.)
फाइबर पौधों से मिलने वाला ऐसा पोषक घटक है, जिसे शरीर पूरी तरह पचा नहीं पाता। यह आंतों के सामान्य कामकाज में मदद करता है और कब्ज से राहत दिलाने में उपयोगी हो सकता है। पर्याप्त फाइबर वाला संतुलित आहार हृदय स्वास्थ्य, रक्त शर्करा और शरीर के वजन को बेहतर तरीके से नियंत्रित करने में भी मदद कर सकता है। WHO के अनुसार, कार्बोहाइड्रेट का प्रमुख स्रोत साबुत अनाज, फल, सब्जियां और दालें जैसे प्राकृतिक खाद्य पदार्थ होने चाहिए। फाइबर के अच्छे स्रोतों में साबुत अनाज, दालें, फल, सब्जियां, नट्स और बीज शामिल हैं। हालांकि, केवल फाइबर की मात्रा बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है। पूरे आहार में पोषक तत्वों का संतुलन भी जरूरी है।
आईसीएमआर-एनआईएन की भारतीयों के लिए पोषक तत्व आवश्यकताएं, आरडीए और ईएआर 2020 रिपोर्ट में भारतीयों के लिए आयु और कार्य स्तर के आधार पर पोषण संबंधी वैज्ञानिक दिए गए हैं। एनआईएन की आधिकारिक वेबसाइट पर भी 2020 की आरडीए रिपोर्ट उपलब्ध है।
| आयु / स्थिति | दैनिक फाइबर (ग्राम/दिन) |
|---|---|
| बच्चे 1–3 वर्ष | 15 |
| बच्चे 4–6 वर्ष | 20 |
| बच्चे 7–9 वर्ष | 26 |
| लड़के 10–12 वर्ष | 33 |
| लड़कियां 10–12 वर्ष | 30 |
| लड़के 13–15 वर्ष | 43 |
| लड़कियां 13–15 वर्ष | 36 |
| लड़के 16–18 वर्ष | 50 |
| लड़कियां 16–18 वर्ष | 38 |
नोट: वयस्कों में फाइबर की जरूरत शारीरिक गतिविधि के स्तर के अनुसार बढ़ सकती है। ICMR-NIN के 2020 आंकड़ों में वयस्क पुरुषों के लिए 30, 40 और 50 ग्राम तथा महिलाओं के लिए 25, 30 और 40 ग्राम प्रतिदिन की मात्रा क्रमशः सेडेंटरी, मध्यम और भारी कार्य स्तर के लिए दी गई है।
WHO की 2023 की गाइडलाइन के अनुसार, 10 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों को रोजाना कम से कम 25 ग्राम प्राकृतिक आहार फाइबर लेने का लक्ष्य रखना चाहिए। 2–5 वर्ष के बच्चों के लिए कम से कम 15 ग्राम और 6–9 वर्ष के बच्चों के लिए कम से कम 21 ग्राम प्रतिदिन की सलाह दी गई है।
यहां ध्यान देने वाली बात है कि WHO और ICMR-NIN के आंकड़ों की आयु-श्रेणियां अलग-अलग हैं। इसलिए दोनों तालिकाओं को बिल्कुल समान मानना सही नहीं होगा। भारतीय पाठकों के लिए ICMR-NIN के आंकड़े उपयोगी संदर्भ देते हैं, जबकि WHO की सिफारिशें वैश्विक मार्गदर्शन के रूप में देखी जानी चाहिए।
बच्चों को फाइबर देने का सबसे आसान तरीका है कि रोजाना के भोजन में अलग-अलग प्राकृतिक खाद्य पदार्थ शामिल किए जाएं।
साबुत अनाज: गेहूं, जौ, ओट्स, बाजरा, ज्वार और ब्राउन राइस जैसे विकल्प भोजन में शामिल किए जा सकते हैं। WHO भी साबुत अनाज को कार्बोहाइड्रेट के बेहतर स्रोतों में शामिल करता है।
दालें और फलियां: मूंग, मसूर, चना, राजमा और अन्य दालें फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। इन्हें बच्चों की पसंद के अनुसार अलग-अलग व्यंजनों में शामिल किया जा सकता है।
फल: सेब, नाशपाती, अमरूद और अन्य साबुत फल उपयोगी विकल्प हैं। जहां संभव हो, फल को जूस के बजाय साबुत रूप में देना बेहतर है, क्योंकि इससे प्राकृतिक फाइबर मिलता है।
सब्जियां: गाजर, बीन्स, मटर, हरी पत्तेदार सब्जियां और दूसरी मौसमी सब्जियां रोजाना के भोजन का हिस्सा बन सकती हैं।
नट्स और बीज: बादाम, अलसी और चिया जैसे विकल्प सीमित मात्रा में दिए जा सकते हैं। छोटे बच्चों को नट्स देते समय उम्र के अनुसार उनकी सुरक्षित बनावट और खाने की क्षमता का ध्यान रखना चाहिए।
अगर बच्चे या बड़े के भोजन में फाइबर बहुत कम है, तो इसे एकदम से काफी बढ़ाने के बजाय धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है। अचानक अधिक फाइबर लेने से कुछ लोगों में गैस, पेट फूलना या असहजता हो सकती है।
फाइबर बढ़ाने के साथ पर्याप्त तरल पदार्थ लेना भी जरूरी है। हालांकि, पानी की जरूरत उम्र, मौसम, गतिविधि और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकती है।
सामान्य तौर पर फाइबर की जरूरत पूरी करने के लिए साबुत अनाज, दालें, फल और सब्जियों जैसे प्राकृतिक खाद्य स्रोतों को प्राथमिकता दी जा सकती है। सप्लीमेंट की जरूरत हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। कब्ज या किसी अन्य समस्या के कारण फाइबर सप्लीमेंट लेने की जरूरत हो तो डॉक्टर या पंजीकृत डाइटीशियन से सलाह लेना बेहतर है।
अगर कब्ज, पेट दर्द, लगातार गैस, पेट फूलना या मल त्याग से जुड़ी समस्या लंबे समय तक बनी रहती है, तो केवल फाइबर बढ़ाना समाधान नहीं है। ऐसे में चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
किसी पुरानी बीमारी, आंतों से जुड़ी समस्या या विशेष डाइट की जरूरत वाले व्यक्ति को फाइबर की मात्रा में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या पोषण विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए।
फाइबर से भरपूर आहार का संबंध कई स्वास्थ्य लाभों से पाया गया है। WHO की समीक्षा के अनुसार, अधिक फाइबर सेवन वयस्कों में हृदय रोग, स्ट्रोक, टाइप-2 डायबिटीज और कुछ अन्य गैर-संचारी रोगों के जोखिम से जुड़े बेहतर स्वास्थ्य परिणामों से संबंधित पाया गया है। हालांकि, इसे किसी एक बीमारी से बचाव की गारंटी के रूप में नहीं समझना चाहिए।
इसलिए 'फाइबर खाने से बीमारी का खतरा 30 प्रतिशत कम हो जाता है' जैसे निश्चित दावों से बचना बेहतर है। स्वास्थ्य पर असर पूरे खान-पान, शारीरिक गतिविधि, वजन, उम्र और अन्य व्यक्तिगत कारकों पर निर्भर करता है।
फाइबर बढ़ाने के लिए किसी महंगे खाद्य पदार्थ की जरूरत नहीं है। सफेद ब्रेड की जगह साबुत अनाज की रोटी, रिफाइंड स्नैक की जगह फल या नट्स और भोजन में नियमित रूप से दाल-सब्जियों को शामिल करना आसान शुरुआत हो सकती है।
बच्चों के लिए सबसे जरूरी बात यह है कि फाइबर को अलग से “डाइट” की तरह न दें, बल्कि रोज के सामान्य और संतुलित भोजन का हिस्सा बनाएं। खाने में विविधता रखें और बच्चों को अलग-अलग फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज खाने की आदत धीरे-धीरे विकसित करें।
(डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और पोषण संबंधित जानकारी के लिए है। यह डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। बच्चों, बुजुर्गों या किसी विशेष स्वास्थ्य स्थिति वाले व्यक्ति के आहार में बड़ा बदलाव करने से पहले डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ की लाह लें।)
Updated on:
27 Aug 2026 04:07 pm
Published on:
27 Aug 2026 04:06 pm
