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सुपरबग्स का खात्मा : वैज्ञानिकों ने ढूंढ निकाला बेकार एंटीबायोटिक दवाइयां फिर से ताकतवर बनाने का तरीका

Vancomycin:अमेरिकी वैज्ञानिकों ने बेकार हो चुकी वैनकोमाइसिन एंटीबायोटिक को एक नए 'pghi-4' अणु के साथ मिलाकर सुपरबग्स के खिलाफ फिर से असरदार बना दिया है। यह तकनीक बैक्टीरिया का सुरक्षा कवच तोड़ देती है, जिससे पुरानी दवाएं फिर से जानलेवा संक्रमणों को खत्म करने लगती हैं।
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भारत

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MI Zahir

Jul 22, 2026

Eliminating Superbugs News.

वैज्ञानिकों ने बेकार एंटीबायोटिक दवाइयां फिर से ताकतवर बनाने का तरीका ढूंढ निकाला। (फोटो: Google Gemini AI .)

Antibiotic Resistance : दुनिया भर के मरीजों और डॉक्टरों के लिए एक बहुत बड़ी खुशखबरी है। अमेरिका की कोल्ड स्प्रिंग हार्बर प्रयोगशाला (CSHL) और स्क्रिप्स रिसर्च के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा जादुई तरीका खोज निकाला है, जिससे जो एंटीबायोटिक दवाएं सुपरबग्स के सामने हार मान चुकी थीं, वे अब फिर से पूरी ताकत के साथ काम कर सकेंगी। इस रिसर्च को नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ, नेशनल कैंसर इंस्टीट्यूट, ऑस्ट्रेलियन रिसर्च काउंसिल, और न्यूयॉर्क स्टेट बायोडेफेंस फंड जैसे प्रमुख संस्थानों ने आर्थिक मदद दी है। आइए विस्तार से समझते हैं कि यह पूरी खोज क्या है, यह कैसे काम करती है और हमारे भविष्य के लिए यह इतनी महत्वपूर्ण क्यों है।

एंटीबायोटिक और सुपरबग्स की लड़ाई: आखिर समस्या क्या है?

इस नई खोज को समझने से पहले हमें यह समझना होगा कि एंटीबायोटिक प्रतिरोध (Antibiotic Resistance) क्या होता है। जब अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने पहली एंटीबायोटिक 'पेनिसिलिन' की खोज की थी, तो इसे एक चमत्कार माना गया था। इससे लाखों लोगों की जान बची। लेकिन प्रकृति का एक नियम है-हर जीव खुद को बचाने के लिए बदलाव करता है।

ड्रग सुपरबग पर दवा के शोध की जीत हो गई है। ( विजुअल: Google Gemini AI)

बैक्टीरिया चालाक और ताकतवर हो गए

आज के समय में जब हम बीमार पड़ते हैं, तो डॉक्टर हमें एंटीबायोटिक दवाएं देते हैं और हम कुछ ही दिनों में ठीक हो जाते हैं। लेकिन सोचिए, क्या हो अगर ये दवाएं काम करना ही बंद कर दें? चिकित्सा विज्ञान की दुनिया में यह कोई ख्याली डर नहीं है, बल्कि एक बहुत बड़ी और डरावनी सच्चाई बनती जा रही है। बैक्टीरिया (जीवाणु) समय के साथ इतने चालाक और ताकतवर हो गए हैं कि उन पर अब आम दवाओं का असर होना बंद हो गया है। ऐसे जिद्दी और खतरनाक बैक्टीरिया को विज्ञान की भाषा में 'सुपरबग्स' कहा जाता है।

बैक्टीरिया दवा के खिलाफ एक 'सुरक्षा कवच'

जब हम बहुत ज्यादा एंटीबायोटिक खाते हैं, या डॉक्टर के बताए अनुसार दवा का पूरा कोर्स नहीं करते हैं, तो हमारे शरीर में मौजूद कुछ बैक्टीरिया मरने से बच जाते हैं। ये बचे हुए बैक्टीरिया दवा के खिलाफ एक 'सुरक्षा कवच' बना लेते हैं। अगली बार जब आप वही दवा खाते हैं, तो उन पर कोई असर नहीं होता। अगर इसी तरह दवाएं बेअसर होती रहीं, तो भविष्य में एक छोटी सी चोट या सामान्य सा बुखार भी जानलेवा बन सकता है।

आम अस्पतालों की चुनौती : संक्रमण रोकना

कैंसर का इलाज, ऑर्गन ट्रांसप्लांट (अंग प्रत्यारोपण), और सिजेरियन डिलीवरी जैसी सामान्य सर्जरी भी बहुत खतरनाक हो जाएंगी, क्योंकि संक्रमण (इन्फेक्शन) रोकने के लिए कोई दवा काम नहीं करेगी।

वैज्ञानिकों ने वैनकोमाइसिन पर किस तरह ​कैसे किया प्रयोग, विजुअल ​से जानिए। ( फोटो : Google Gemini AI)

वैनकोमाइसिन (Vancomycin): एक भरोसेमंद दवा जो हारने लगी थी

चिकित्सा की दुनिया में वैनकोमाइसिन को एक बहुत ही शक्तिशाली और महत्वपूर्ण एंटीबायोटिक माना जाता है। इसे अक्सर डॉक्टरों का 'आखिरी हथियार' कहा जाता है। जब अन्य सभी दवाएं काम करना बंद कर देती हैं, तब गंभीर संक्रमणों के इलाज के लिए वैनकोमाइसिन का इस्तेमाल किया जाता है। मुख्य रूप से इसका उपयोग दो बहुत ही खतरनाक सुपरबग्स को मारने के लिए होता था:

MRSA (मेथिसिलिन-रेसिस्टेंट स्टैफिलोकोकस ऑरियस): यह त्वचा, खून और फेफड़ों में गंभीर संक्रमण फैलाता है।

C.diff (क्लोस्ट्रीडियम डिफिसाइल): यह आंतों में भयंकर सूजन और डायरिया पैदा करता है।

अस्पतालों और नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों की जान पर बन आई

हाल के सालों में एक बहुत बुरी खबर सामने आ रही थी। इन बैक्टीरिया ने वैनकोमाइसिन के खिलाफ भी अपनी ताकत बढ़ा ली थी। E. faecium नाम के एक जीवाणु ने तो इस दवा को पूरी तरह से बेअसर करना शुरू कर दिया था, जिससे अस्पतालों और नर्सिंग होम में भर्ती मरीजों की जान पर बन आई थी।

वैज्ञानिकों का नया फॉर्मूला: 'हेल्पर' अणु का कमाल

जब कोई दवा काम करना बंद कर देती है, तो आमतौर पर वैज्ञानिक एक बिल्कुल नई दवा बनाने की कोशिश करते हैं। लेकिन एक नई एंटीबायोटिक बनाने में 10 से 15 साल का समय लगता है और हजारों करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इसलिए, CSHL के प्रोफेसर जॉन मोसेस और स्क्रिप्स रिसर्च के प्रोफेसर हॉवर्ड हैंग की टीम ने एक अलग रास्ता चुना। उन्होंने सोचा, 'क्यों न हम पुरानी दवा को ही फिर से जिंदा करें?' यहीं से 'एंटीबायोटिक एडज्वेंट' (Antibiotic Adjuvant) का विचार सामने आया।

एंटीबायोटिक एडज्वेंट क्या है?

इसे आप दवा के एक 'सहायक' या 'हेल्पर' के रूप में समझ सकते हैं। यह खुद बैक्टीरिया को नहीं मारता, बल्कि यह दवा की मदद करता है ताकि दवा अपना काम ठीक से कर सके। वैज्ञानिकों ने वैनकोमाइसिन के साथ एक छोटा सा रासायनिक अणु मिलाया, जिसका नाम pghi-4 है। जब इन दोनों को एक साथ मिलाया गया, तो नतीजे चौंकाने वाले थे। जो दवा कल तक बेकार हो चुकी थी, उसने दोबारा सुपरबग्स को मार गिराया!

pghi-4 अणु: यह बैक्टीरिया का सुरक्षा कवच कैसे तोड़ता है?

आपके मन में यह सवाल आ रहा होगा कि आखिर इस छोटे से अणु (pghi-4) ने ऐसा क्या जादू किया कि पुरानी दवा फिर से काम करने लगी? आइए इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए कि वैनकोमाइसिन एक सैनिक है जो बैक्टीरिया रूपी दुश्मन के किले पर हमला करने जा रहा है। बैक्टीरिया ने खुद को बचाने के लिए अपने किले के बाहर SagA (Secreted antigen A) नाम का एक एंजाइम तैनात कर दिया है।

यह अणु एक जासूस की तरह काम करता है

यह SagA एंजाइम एक मजबूत ढाल की तरह काम करता है। जब वैनकोमाइसिन हमला करता है, तो यह ढाल उसे रोक लेती है और दवा बेअसर हो जाती है। यहीं पर pghi-4 अणु की एंट्री होती है। यह अणु एक जासूस की तरह काम करता है। यह जाकर सीधा SagA एंजाइम (बैक्टीरिया की ढाल) को ब्लॉक कर देता है यानी उसे तोड़ देता है। जैसे ही बैक्टीरिया का सुरक्षा कवच टूटता है, वैनकोमाइसिन अपना काम शुरू कर देती है और बैक्टीरिया को आसानी से खत्म कर देती है।

कैसे हुई इस चमत्कारी अणु की खोज ? (क्लिक केमिस्ट्री का कमाल)

इस शानदार खोज की कहानी भी बहुत दिलचस्प है। प्रोफेसर जॉन मोसेस ने बताया कि वे मूल रूप से कोई नई एंटीबायोटिक नहीं खोज रहे थे। वे बस अपनी प्रयोगशाला में रसायन विज्ञान के कुछ बुनियादी प्रयोग कर रहे थे। उनकी लैब में DOC (Diversity Oriented Clicking) नाम की एक खास तकनीक का इस्तेमाल होता है। यह एक ऐसी प्रक्रिया है जिससे वैज्ञानिक बहुत तेजी से और आसानी से नए-नए रासायनिक यौगिक बना सकते हैं। इस तकनीक का इस्तेमाल करके उन्होंने 150 से अधिक अलग-अलग रसायनों की एक 'लाइब्रेरी' या संग्रह तैयार किया था। साल 2020 में, इसी संग्रह में से उन्हें यह pghi-4 नाम का अणु मिला।

मेडिकल एक्सपेरिमेंट रिसर्च को ड्रामेटिक अंदाज में ऐसे समझें। (विजुअल: ChatGPT)

यह अणु एंटीबायोटिक प्रतिरोध से लड़ने में मास्टर-की साबित हो सकता है

जब प्रोफेसर जॉन मोसेस ने इसे स्क्रिप्स रिसर्च की टीम के साथ मिलकर टेस्ट किया, तो उन्हें पता चला कि यह अणु तो एंटीबायोटिक प्रतिरोध से लड़ने में एक मास्टर-की (Master Key) साबित हो सकता है। वे कहते हैं, "यह खोज इस बात का सुबूत है कि बुनियादी विज्ञान पर किया गया शोध कभी बेकार नहीं जाता। हम लगातार नए-नए अणु बना रहे हैं ताकि दुनिया भर के वैज्ञानिक अपनी रिसर्च में उनका फायदा उठा सकें।"

दुनिया के लिए क्यों है यह एक बहुत बड़ी खुशखबरी?

यह शोध सिर्फ एक दवा या एक बैक्टीरिया तक सीमित नहीं है। यह पूरी दुनिया की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए एक नई उम्मीद लेकर आया है। इसके कई बड़े फायदे हैं। नई दवा बनाने में दशकों लग जाते हैं। लेकिन इस तकनीक से, हम पहले से मौजूद और सुरक्षित साबित हो चुकी हजारों दवाओं को वापस इस्तेमाल के लायक बना सकते हैं।

टीबी जैसी बीमारियों का इलाज

आज के समय में टीबी के कई ऐसे मरीज हैं जिन पर कोई दवा काम नहीं करती (MDR-TB)। वैज्ञानिकों को पूरी उम्मीद है कि इसी 'हेल्पर अणु' वाली तकनीक का इस्तेमाल करके भविष्य में टीबी का भी पक्का और तेज इलाज ढूंढा जा सकेगा।

भयानक भविष्य को रोकने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम

अगर सुपरबग्स को रोकने का तरीका नहीं खोजा गया, तो एक रिपोर्ट के मुताबिक साल 2050 तक हर साल करोड़ों लोग सिर्फ मामूली इन्फेक्शन से जान गंवा बैठेंगे। यह खोज उस भयानक भविष्य को रोकने की दिशा में एक बहुत बड़ा कदम है।

कंक्लूजन: चिकित्सा जगत में एक नए युग की शुरुआत

बहरहाल, अब हमें सुपरबग्स के सामने हार मानने की जरूरत नहीं है। विज्ञान ने हमें दिखा दिया है कि समस्या चाहे कितनी भी बड़ी क्यों न हो, अगर हम चीजों को एक नये नजरिये से देखें, तो समस्या का समाधान मिल ही जाता है। भविष्य में जब आप डॉक्टर के पास जाएंगे, तो हो सकता है कि वह आपको कोई नई एंटीबायोटिक न दे। इसके बजाय, वह आपको वही पुरानी, जानी-पहचानी दवा देगा, लेकिन एक छोटे से 'रासायनिक हेल्पर' के साथ, जो उस दवा को सुपर-पावरफुल बना देगा।