
बुंदेलखंड के कई इलाकों में लगातार बारिश और जलभराव से खरीफ फसलों को नुकसान पहुंचा है। झांसी में तिल, मूंग और उड़द जैसी फसलों के खेतों में पानी भरने की खबरें सामने आई हैं। हमीरपुर में भी तिल, उड़द, मूंग और मूंगफली की फसलों को नुकसान हुआ है। प्रभावित किसान फसल सर्वे और राहत की मांग कर रहे हैं।
फसल खराब होने के बाद किसान के सामने अगली बुवाई, कर्ज की किस्त और परिवार के खर्च की चिंता खड़ी हो जाती है। ऐसे समय में जल्दबाजी में नया निवेश करने के बजाय नुकसान का आकलन और उपलब्ध राहत का लाभ लेना जरूरी है।
अगर किसान ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत फसल का बीमा कराया है तो नुकसान की सूचना समय पर देना बेहद जरूरी है। स्थानीय आपदा जैसे बाढ़, जलभराव या दूसरी अधिसूचित घटनाओं से व्यक्तिगत खेत को नुकसान होने पर किसान को संबंधित बीमा कंपनी, बैंक या अधिकृत माध्यम के जरिए 72 घंटे के भीतर सूचना देनी होती है। PMFBY में बाढ़ और जलभराव जैसे जोखिमों का प्रावधान है, लेकिन संबंधित फसल और क्षेत्र का योजना के तहत अधिसूचित होना जरूरी है।
नुकसान की सूचना देते समय खेत की फोटो, वीडियो, बीमा से जुड़े दस्तावेज और फसल का विवरण सुरक्षित रखना भी उपयोगी रहेगा।
फसल खराब होने पर किसान अपने लेखपाल, कृषि विभाग या संबंधित तहसील प्रशासन को इसकी जानकारी दें। स्थानीय स्तर पर होने वाला सर्वे नुकसान के आकलन और उपलब्ध सरकारी राहत की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण होता है।
किसान खेत में पानी भरने, फसल गिरने या सड़ने की स्थिति की तस्वीरें भी सुरक्षित रखें। हाल में झांसी में प्रशासन की ओर से बारिश से हुए फसल नुकसान का त्वरित आकलन कराने के निर्देश दिए गए हैं।
यदि खेत में अभी भी पानी जमा है और फसल पूरी तरह नष्ट नहीं हुई है तो जल निकासी को प्राथमिकता दें। लंबे समय तक पानी जमा रहने से जड़ों में ऑक्सीजन की कमी और सड़न जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं।
तिल की फसल जलभराव के प्रति संवेदनशील मानी जाती है। इसलिए खेत में पानी निकालने के लिए उपलब्ध प्राकृतिक नालियों या उचित निकासी व्यवस्था का इस्तेमाल करें।
बारिश से प्रभावित फसल को देखकर किसान उसे अगली बुवाई के लिए बीज के रूप में बचाने का फैसला तुरंत न करें। यदि फसल में रोग, सड़न या बीज की गुणवत्ता प्रभावित हुई है तो ऐसा बीज अगली फसल के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
अगली बुवाई के लिए प्रमाणित और स्थानीय क्षेत्र के लिए अनुशंसित बीज लेना अधिक सुरक्षित विकल्प है। कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विभाग से उपयुक्त किस्म की जानकारी ली जा सकती है।
फसल खराब होने के बाद किसान खाली खेत में तुरंत कोई भी फसल बोने के बजाय मिट्टी की नमी, मौसम और बची हुई फसल अवधि को देखें।
यदि खेत में पर्याप्त नमी है तो अगली फसल का चुनाव स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह से करें। दलहन वाली फसलों का चयन भी क्षेत्र, मौसम और उपलब्ध समय के अनुसार किया जाना चाहिए।
बाढ़ या लगातार बारिश के बाद बिना जांच के बड़ी मात्रा में यूरिया, डीएपी, एनपीके, जिप्सम या सल्फर डालना उचित नहीं है। बारिश के बाद मिट्टी में पोषक तत्वों की स्थिति बदल सकती है।
अगली फसल के लिए मिट्टी की जांच और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह के आधार पर खाद-उर्वरक की मात्रा तय करें। इससे अनावश्यक खर्च से भी बचा जा सकता है।
जलभराव के बाद खेत में फफूंदजनित रोग और जड़ या तने से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए बची हुई फसल की नियमित निगरानी करें।
किसी रोग के लक्षण दिखाई देने पर किसान अपनी ओर से कई दवाओं को मिलाकर छिड़काव करने के बजाय कृषि विभाग या KVK से रोग की पहचान कराकर अनुशंसित दवा और मात्रा का इस्तेमाल करें।
फसल पूरी तरह नष्ट होने पर किसान को एक साथ नया कर्ज लेने से बचना चाहिए। पहले बीमा दावा, सरकारी राहत और उपलब्ध कृषि सहायता की स्थिति स्पष्ट करें।
यदि बैंक या संस्थागत कृषि ऋण चल रहा है तो संबंधित बैंक शाखा से संपर्क कर ऋण खाते और पुनर्भुगतान से जुड़े उपलब्ध विकल्पों की जानकारी लेना बेहतर है। किसी भी राहत या ऋण सुविधा को स्वत: मिलने वाला लाभ न मानें; यह संबंधित नियम और पात्रता पर निर्भर करता है।
किसानों के लिए जरूरी कदम-
| प्राथमिकता | क्या करें |
|---|---|
| 1 | फसल नुकसान की सूचना दें |
| 2 | बीमा है तो दावा प्रक्रिया शुरू करें |
| 3 | खेत से पानी निकालें |
| 4 | नुकसान का फोटो-वीडियो रिकॉर्ड रखें |
| 5 | कृषि विभाग से सर्वे की जानकारी लें |
| 6 | अगली फसल का चुनाव मौसम देखकर करें |
| 7 | प्रमाणित बीज और संतुलित उर्वरक का इस्तेमाल करें |
| 8 | नया निवेश करने से पहले लागत का हिसाब लगाएं |
PMFBY के तहत स्थानीय आपदा और पात्र फसल कटाई-बाद नुकसान की सूचना 72 घंटे के भीतर देने का प्रावधान है। इसलिए जिस किसान की बीमित फसल को ऐसी अधिसूचित घटना से नुकसान हुआ है, उसे सूचना देने में देरी नहीं करनी चाहिए।
साथ ही, केवल बीमा पर निर्भर रहने के बजाय किसान को स्थानीय प्रशासन से फसल नुकसान के सर्वे और उपलब्ध राहत की जानकारी भी लेनी चाहिए।
Updated on:
14 Sept 2026 03:20 pm
Published on:
14 Sept 2026 03:20 pm
