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10 साल में 76 छोटे एयरपोर्ट बने, लेकिन 14 पर उड़ानें बंद: क्या UDAN योजना अपनी मंजिल से भटक गई?

UDAN scheme status in India : UDAN योजना के तहत 10 साल में दर्जनों छोटे एयरपोर्ट बने, लेकिन कई जगहों पर उड़ानें क्यों बंद हो गईं? जानिए यूपी के बंद पड़े एयरपोर्ट्स का सच और मोदी सरकार की नई Modified UDAN योजना का प्लान।
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क्यों बंद हो रहीं छोटे एयरपोर्ट की उड़ानें, PC- Gemini

भारत में हवाई यात्रा को आम लोगों तक पहुंचाने के लिए 2016 में केंद्र सरकार ने उड़ान (UDAN - Ude Desh Ka Aam Nagrik) योजना शुरू की थी। इसका उद्देश्य था कि छोटे शहरों और दूरदराज के इलाकों को हवाई नेटवर्क से जोड़ा जाए, ताकि हवाई सफर सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित न रहे।

पिछले एक दशक में इस योजना के तहत देशभर में दर्जनों छोटे एयरपोर्ट विकसित किए गए। लेकिन अब एक बड़ा सवाल उठ रहा है अगर एयरपोर्ट बन गए हैं, तो कई जगहों से उड़ानें क्यों बंद हो गईं?

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2024 तक UDAN के तहत 76 एयरपोर्ट, 9 हेलिपोर्ट और 2 वाटर एयरोड्रोम को चालू किया गया था। 2026 तक यह संख्या बढ़कर 95 हो चुकी है।

क्या है UDAN योजना?

UDAN योजना अक्टूबर 2016 में शुरू हुई थी। इसका मकसद था ऐसे शहरों को हवाई सेवा से जोड़ना जहां पहले उड़ानें नहीं थीं या बहुत कम थीं। योजना के तहत एयरलाइंस को कुछ वर्षों तक Viability Gap Funding (VGF) यानी वित्तीय सहायता दी जाती है, ताकि कम यात्रियों वाले रूट पर भी उड़ानें चलाई जा सकें।

सरकार का दावा है कि 2026 तक इस योजना के तहत 663 से अधिक रूट चालू किए गए और 3.4 लाख से ज्यादा उड़ानों के जरिए 1.6 करोड़ से अधिक यात्रियों ने सफर किया।

फिर एयरपोर्ट बंद क्यों होने लगे?

यहीं से कहानी दिलचस्प हो जाती है। संसद में दिए गए जवाबों के अनुसार कई एयरपोर्ट और रूट अस्थायी रूप से बंद हो गए हैं। 2025-26 में कम से कम 15 एयरपोर्ट ऐसे थे जहां उड़ान संचालन रुक गया था। इनमें उत्तर प्रदेश के अलीगढ़, आजमगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती, मुरादाबाद और कुशीनगर जैसे एयरपोर्ट भी शामिल हैं।

उड़ानें बंद होने के प्रमुख कारण

सब्सिडी खत्म होते ही एयरलाइंस पीछे हट गईं : UDAN योजना में एयरलाइंस को सीमित अवधि तक आर्थिक सहायता मिलती है। कई मामलों में तीन साल की VGF अवधि पूरी होने के बाद एयरलाइंस ने रूट छोड़ दिए क्योंकि यात्री संख्या इतनी नहीं थी कि संचालन लाभकारी हो सके।

यात्रियों की संख्या उम्मीद से कम रही : कई छोटे शहरों में एयरपोर्ट तो बन गए, लेकिन नियमित यात्रियों की संख्या नहीं बढ़ी। कम सीट भरने (Low Passenger Load Factor) के कारण एयरलाइंस को नुकसान होने लगा।

छोटे विमानों की कमी : क्षेत्रीय उड़ानों के लिए 20 से 80 सीट वाले विमानों की जरूरत होती है। भारत में ऐसे विमानों की संख्या सीमित है। विमान लीज, स्पेयर पार्ट्स और रखरखाव की समस्याओं ने भी संचालन को प्रभावित किया।

तकनीकी और मौसम संबंधी दिक्कतें : कई छोटे एयरपोर्ट केवल दिन में और साफ मौसम में संचालित हो सकते हैं। खराब दृश्यता या आधुनिक नेविगेशन सिस्टम की कमी के कारण उड़ानें नियमित नहीं रह पातीं।

यूपी का मामला सबसे ज्यादा चर्चा में क्यों? : 2016 से 2026 के बीच उत्तर प्रदेश में 13 एयरपोर्ट विकसित या शुरू किए गए, लेकिन इनमें से कई जगहों पर नियमित उड़ानें बंद हो गईं।

संसदीय जवाबों में भी अलीगढ़, आजमगढ़, चित्रकूट, श्रावस्ती, मुरादाबाद और कुशीनगर जैसे एयरपोर्टों के गैर-संचालित होने का उल्लेख किया गया है।

कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट को बौद्ध पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित किया गया था, लेकिन यहां भी नियमित उड़ानों को बनाए रखना चुनौती बना रहा।

क्या एयरपोर्ट बनाना ही काफी है?

विशेषज्ञ मानते हैं कि केवल रनवे और टर्मिनल बना देने से एयरपोर्ट सफल नहीं होता। किसी भी एयरपोर्ट को सफल बनाने के लिए चाहिए:

  • पर्याप्त यात्री
  • मजबूत स्थानीय अर्थव्यवस्था
  • पर्यटन या व्यापारिक गतिविधियां
  • एयरलाइंस की व्यावसायिक रुचि
  • सड़क और रेल कनेक्टिविटी

यदि ये सभी तत्व मौजूद न हों तो एयरपोर्ट लंबे समय तक टिकाऊ नहीं रह पाते।

फिर सरकार की नई योजना क्या है?

मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने Modified UDAN को मंजूरी दी। इसके तहत अगले 10 वर्षों में 100 नए एयरपोर्ट विकसित करने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को और मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। योजना का कुल बजट 28,840 करोड़ रुपये है।

सरकार का कहना है कि अब केवल एयरपोर्ट बनाने पर नहीं, बल्कि उनके दीर्घकालिक संचालन और आर्थिक व्यवहार्यता पर भी ध्यान दिया जाएगा।

क्या UDAN योजना असफल है?

सीधे तौर पर ऐसा कहना सही नहीं होगा। UDAN ने कई ऐसे शहरों को पहली बार हवाई नक्शे पर लाया जहां पहले कोई उड़ान नहीं थी। लाखों यात्रियों ने इसका लाभ उठाया और कई क्षेत्रों में पर्यटन व व्यापार को बढ़ावा मिला।

लेकिन यह भी सच है कि कुछ एयरपोर्ट और रूट आर्थिक रूप से टिकाऊ साबित नहीं हुए। इससे यह सवाल जरूर उठता है कि भविष्य में एयरपोर्ट चुनते समय केवल बुनियादी ढांचे पर नहीं, बल्कि वास्तविक मांग और आर्थिक संभावनाओं पर भी ज्यादा ध्यान देना होगा।