
फोन को अपने आप साफ करने की तकनीक। (फोटोः एआई)
नए स्मार्टफोन में प्रदूषण से सुरक्षा के लिए ‘सेल्फ‑क्लींजिंग’ तकनीक का आगाज एक दिलचस्प और उपयोगी पहल है। यह फीचर सिर्फ एक तकनीकी नवाचार नहीं है। यह आपकी रोजमर्रा की जिंदगी में साफ‑सफाई और स्वास्थ्य की चिंता को कम करने वाला कदम भी है। इस लेख में हम जानेंगे कि यह तकनीक क्या है और कैसे काम करती है।
सेल्फ‑क्लींजिंग सतहें वे होती हैं जो खुद से गंदगी, धूल, बैक्टीरिया या अन्य प्रदूषक हटाने में सक्षम होती हैं। इनमें दो मुख्य प्रकार होते हैं:
अब तक स्मार्टफोन में इस तकनीक का व्यापक उपयोग नहीं हुआ है, लेकिन कुछ शोध और प्रोटोटाइप इस दिशा में संकेत देते हैं। उदाहरण के लिए, TiO₂ (टाइटेनियम डाइऑक्साइड) आधारित फोटोकैटलिटिक कोटिंग्स पारदर्शी सतहों पर गंदगी और जैविक प्रदूषकों को प्रकाश की मदद से तोड़ने में सक्षम होती हैं। यह तकनीक स्मार्टफोन स्क्रीन पर लागू की जा सकती है, जिससे स्क्रीन खुद साफ हो सके।
हाल ही, भारत की एक टीम ने सौर पैनलों पर सुपरहाइड्रोफोबिक नैनोकॉम्पोजिट कोटिंग लगाई, जिससे पैनल की पावर आउटपुट में 16% की वृद्धि हुई। यह दिखाता है कि सेल्फ‑क्लींजिंग कोटिंग्स तकनीकी रूप से प्रभावी हैं और स्मार्टफोन पर भी लागू हो सकती हैं।
अभी तक ऐसा कोई प्रमुख स्मार्टफोन नहीं मिला है जिसमें सेल्फ‑क्लींजिंग स्क्रीन कोटिंग हो। 2015 में जापान की KDDI कंपनी ने “DIGNO rafre” नामक ऐसा फोन लॉन्च किया था, जिसे साबुन से धोया जा सकता था। यह एक शुरुआती कदम था, लेकिन यह तकनीक सेल्फ‑क्लींजिंग कोटिंग्स जैसी आधुनिक विधियों से अलग थी।
हाल ही में एक कंपनी ने UV‑C लाइट वाले स्मार्टफोन केस “SmartCover” लॉन्च किया, जो हर उपयोग के बाद स्क्रीन को स्व‑सैनिटाइज करता है। यह भी एक प्रकार का सेल्फ‑क्लींजिंग समाधान है, लेकिन यह कोटिंग नहीं बल्कि बाहरी केस है।
यदि भविष्य में सेल्फ‑क्लींजिंग स्क्रीन वाले स्मार्टफोन आते हैं, तो यह आपके लिए कई मायनों में फायदेमंद हो सकता है:
Updated on:
15 Aug 2026 12:54 pm
Published on:
15 Aug 2026 12:54 pm
