
सांकेतिक इमेज (सोर्स- Chatgpt)
विश्वकर्मा पूजा के दिन सभी मशीनें बंद रहती हैं और इस दिन उन मशीनों की विधि पूर्वक पूजा की जाती है। इस दिन सभी फैक्ट्रियां आम लोगों के लिए बंद होती हैं और मशीनों पर फूलों की माला चढ़ाई जाती है। ऑटो-रिक्शा, टैक्सी चालक भी अपने वाहनों की पूजा करते हैं। इस दिन दर्जी अपनी कैंची को पूजते हैं, तो वास्तुकार और शिल्पकार अपने सामान की पूजा करते हैं।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी के पुत्र हैं। भगवान विश्वकर्मा को देवताओं का शिल्पकार एवं दिव्य वास्तुकार माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, कन्या संक्रांति के दिन ब्रह्मा जी के पुत्र भगवान विश्वकर्मा का जन्म हुआ था, जिन्हें स्वर्ग लोक, पुष्पक विमान और कुबेरपुरी जैसी देवनगरियों का रचनाकार कहा जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, भगवान विश्वकर्मा ने रावण की लंका, भगवान कृष्ण की द्वारिका नगरी और पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ एवं हस्तिनापुर जैसी नगरियों का भी निर्माण किया था। ऐसी मान्यता है कि भगवान विश्वकर्मा ने रावण की लंका, कृष्ण नगरी द्वारिका, पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ नगरी और हस्तिनापुर का निर्माण किया था। इसी सृजनशीलता और कौशल के सम्मान में इंजीनियर, कारीगर, शिल्पकार, मैकेनिक और फैक्ट्री-कर्मी इस दिन को श्रद्धापूर्वक मनाते हैं।
घरों, फैक्ट्रियों और दफ्तरों में मशीनों व औजारों की सफाई के बाद विधि-विधान से पूजा होती है। मशीनों पर फूल-माला चढ़ाई जाती है, वाहनों के बोनट पर तिलक लगता है, दर्जी अपनी कैंची तो इंजीनियर अपना लैपटॉप पूजते हैं। पूजा में भगवान को फूल, हल्दी, कुमकुम और नारियल अर्पित किए जाते हैं। इसके साथ पंचामृत, ताजे फल, मिठाइयां और नारियल चढ़ाना शुभ माना जाता है। आरती के बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है। मान्यता है कि इससे व्यापार में उन्नति होती है और काम की बाधाएं दूर होती हैं।
विश्वकर्मा पूजा के दिन औजारों-मशीनों से जुड़ा काम, खासकर धारदार उपकरणों का उपयोग, वर्जित माना जाता है, क्योंकि इसी दिन उन्हें विश्राम देकर पूजा की जाती है। शुद्ध मन और स्वच्छ वातावरण को पूजा की सफलता के लिए जरूरी बताया गया है। मान्यता है कि भगवान को प्रसन्न करने के लिए शुद्ध मन, स्वच्छ वातावरण और पूर्ण श्रद्धा जरूरी है। इसलिए अस्वच्छता से बचने की सलाह दी जाती है। इसके अलावा इस दिन कर्ज लेना-देना, नए विवाद छेड़ना और नकारात्मक बोलचाल भी अशुभ माने जाते हैं।
Updated on:
17 Sept 2026 12:54 pm
Published on:
17 Sept 2026 12:54 pm
