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कौन हैं अर्शदीप सिंह डांग? 80 साल बाद ब्रिटेन की RAF में बने पहले सिख फाइटर पायलट

Arshdeep Singh Dang RAF Fighter Pilot : जानिए अर्शदीप सिंह डांग की पूरी कहानी, जो 80 साल बाद ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (RAF) में पहले सिख फाइटर पायलट बने हैं। चंडीगढ़ से लंदन और RAF वैली तक का ऐतिहासिक सफर।
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Flight Lieutenant Arshdeep Singh Dang

Flight Lieutenant Arshdeep Singh Dang : कौन हैं ब्रिटेन में फ्लाइट लेफ्टिनेंट बनें अर्शदीप सिंह डांग, PC- RAF Valley FB page

ब्रिटेन की रॉयल एयर फोर्स (RAF) में भारतीय मूल के एक युवा ने ऐसा इतिहास रच दिया है, जिसकी चर्चा भारत से लेकर ब्रिटेन तक हो रही है। 28 वर्षीय फ्लाइट लेफ्टिनेंट अर्शदीप सिंह डांग द्वितीय विश्व युद्ध के बाद RAF के पहले सिख फाइटर पायलट बने हैं। उन्होंने 14 अगस्त 2026 को वेल्स स्थित RAF वैली में फास्ट जेट पायलट के रूप में अपने "विंग्स" हासिल किए। यह उपलब्धि सिर्फ व्यक्तिगत सफलता नहीं, बल्कि सिख समुदाय और भारतीय मूल के लोगों के लिए भी एक ऐतिहासिक पड़ाव मानी जा रही है।

आखिर क्यों खास है यह उपलब्धि?

द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान कई सिख सैनिक और पायलट ब्रिटिश सेना और RAF का हिस्सा रहे थे। हालांकि युद्ध के बाद पिछले लगभग 80 वर्षों में कोई सिख पायलट RAF के फाइटर स्ट्रीम तक नहीं पहुंच पाया। ऐसे में अर्शदीप सिंह डांग का फाइटर पायलट बनना एक ऐतिहासिक अंतराल को खत्म करने जैसा माना जा रहा है।

कौन हैं अर्शदीप सिंह डांग?

अर्शदीप सिंह डांग का जन्म 1998 में चंडीगढ़ में हुआ था। उनके पिता जगदीप सिंह डांग लुधियाना से हैं, जबकि उनकी मां गगनदीप कौर अमृतसर से संबंध रखती हैं। जब अर्शदीप लगभग छह वर्ष के थे, तब उनका परिवार ब्रिटेन चला गया और लंदन के साउथॉल इलाके में बस गया।

हालांकि परिवार ब्रिटेन में बस गया, लेकिन घर में पंजाबी भाषा, सिख परंपराओं और गुरुद्वारे से जुड़ाव बरकरार रहा। अर्शदीप खुद कई बार कह चुके हैं कि कठिन प्रशिक्षण के दौरान "चढ़दी कला" की भावना ने उन्हें प्रेरित किया।

दादा का सपना, पोते ने किया पूरा

अर्शदीप की सफलता के पीछे एक भावनात्मक पारिवारिक कहानी भी है। उनके दादा सरदार संतोक सिंह डांग चाहते थे कि उनका बेटा यानी अर्शदीप के पिता पायलट बने, लेकिन परिस्थितियों के कारण यह सपना पूरा नहीं हो सका। बाद में यही सपना अर्शदीप ने साकार कर दिखाया।

अर्शदीप ने कई मौकों पर अपनी मां को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा बताया है। उनका कहना है कि आर्थिक चुनौतियों के बावजूद उनकी मां ने परिवार को संभाला और उन्हें बड़े सपने देखने के लिए प्रेरित किया।

RAF तक पहुंचने का सफर कैसा रहा?

फाइटर पायलट बनना दुनिया के सबसे कठिन सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रमों में से एक माना जाता है। अर्शदीप ने भी कई वर्षों तक कड़े चयन और प्रशिक्षण से गुजरकर यह मुकाम हासिल किया।

उनकी शिक्षा और प्रशिक्षण

सवालजवाब
अर्शदीप सिंह डांग कौन हैं?भारतीय मूल के RAF अधिकारी
उन्होंने क्या उपलब्धि हासिल की?द्वितीय विश्व युद्ध के बाद RAF के पहले सिख फाइटर पायलट बने
जन्म कहां हुआ?चंडीगढ़, भारत
परिवार की जड़ें कहां हैं?लुधियाना और अमृतसर
RAF में विंग्स कब मिले?14 अगस्त 2026
आगे क्या करेंगे?ऑपरेशनल फाइटर प्रशिक्षण पूरा करेंगे
यह उपलब्धि क्यों खास है?लगभग 80 वर्षों बाद किसी सिख ने RAF फाइटर विंग्स हासिल किए हैं

RAF में फाइटर पायलट बनना कितना कठिन है?

RAF में हर साल बड़ी संख्या में उम्मीदवार आवेदन करते हैं, लेकिन बहुत कम लोग फाइटर स्ट्रीम तक पहुंच पाते हैं। चयन प्रक्रिया में शामिल प्रमुख चरण कुछ इस प्रकार।

  • मेडिकल और साइकोलॉजिकल टेस्ट
  • ऑफिसर चयन बोर्ड
  • बेसिक फ्लाइंग ट्रेनिंग
  • फास्ट जेट चयन
  • उन्नत जेट प्रशिक्षण
  • विंग्स टेस्ट

इन सभी चरणों को सफलतापूर्वक पार करने के बाद ही किसी पायलट को फाइटर जेट उड़ाने की अनुमति मिलती है।

अब आगे क्या करेंगे अर्शदीप?

विंग्स हासिल कर लेना अंतिम पड़ाव नहीं है। इसके बाद भी अर्शदीप को लगभग एक वर्ष का अतिरिक्त ऑपरेशनल कन्वर्जन प्रशिक्षण पूरा करना होगा। इसके बाद ही उन्हें किसी अग्रिम पंक्ति (Frontline) के फाइटर स्क्वाड्रन में तैनाती मिल सकती है।

सिख समुदाय का सैन्य इतिहास बेहद समृद्ध रहा है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध में सिख सैनिकों ने ब्रिटिश भारतीय सेना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। लेकिन आधुनिक फाइटर एविएशन में उनकी मौजूदगी बहुत कम दिखाई दी।

अर्शदीप ने खुद कहा है कि वे चाहते हैं कि वे 'पहले हों, आखिरी नहीं'। उनका मानना है कि उनकी सफलता अन्य युवाओं को भी रक्षा सेवाओं और विमानन क्षेत्र में करियर बनाने के लिए प्रेरित करेगी।

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